Mohan Yadav Rahul Gandhi Controversy: ‘छात्रों की गूंज’ पर CM का पलटवार, शिक्षा बजट से ड्रॉपआउट तक गिनाए आंकड़े
Mohan Yadav-Rahul Gandhi Controversy: CM hits back over 'students' outcry', cites figures ranging from the education budget to dropout rates.
Mohan Yadav Rahul Gandhi Controversy: इंदौर में कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के बाद मध्य प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कार्यक्रम को लेकर राहुल गांधी पर सवाल उठाए और कहा कि छात्रों, युवाओं और शिक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा तथ्यों और आंकड़ों के आधार पर होनी चाहिए। वहीं राहुल गांधी ने कार्यक्रम में शिक्षा व्यवस्था, भर्ती, परीक्षा और युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दे उठाए।
राहुल गांधी का इंदौर कार्यक्रम 19 सितंबर को हुआ। उनके आधिकारिक अभियान पेज के अनुसार ‘Chhatron Ki Goonj’ का उद्देश्य छात्रों को शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर अपनी आवाज उठाने का मंच देना है। कार्यक्रम में छात्रों ने भी अपनी समस्याएं साझा कीं।
CM मोहन यादव ने कार्यक्रम पर क्या कहा?
Mohan Yadav Rahul Gandhi Controversy में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी का कार्यक्रम गंभीर शैक्षणिक संवाद के बजाय राजनीतिक संदेश तक सीमित रहा। उन्होंने कहा कि बच्चों और युवाओं से बातचीत के दौरान वास्तविक सवाल-जवाब का विस्तृत सत्र होना चाहिए था।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जब स्कूल शिक्षा और बच्चों के भविष्य पर चर्चा हो रही हो तो सरकार के आंकड़ों और उपलब्धियों को भी सामने रखा जाना चाहिए। उन्होंने राहुल गांधी के कार्यक्रम को लेकर ‘झूठ की गूंज’ जैसी राजनीतिक टिप्पणी की। ये मुख्यमंत्री की ओर से किए गए राजनीतिक आरोप और मूल्यांकन हैं।
राहुल गांधी के कार्यक्रम में किन मुद्दों पर हुई चर्चा?
राहुल गांधी ने इंदौर में छात्रों से संवाद के दौरान शिक्षा व्यवस्था, भर्ती प्रक्रिया, परीक्षा संबंधी समस्याओं, पेपर लीक और रोजगार के अवसरों जैसे मुद्दे उठाए। कार्यक्रम में अलग-अलग जिलों से आए छात्रों ने भी अपनी परेशानियां बताईं।
रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ छात्रों ने भर्ती और नियुक्तियों में देरी, परीक्षा परिणाम, छात्रावास, किराये के आवास और उच्च शिक्षा से जुड़े मुद्दे उठाए। एक छात्रा ने परीक्षा पास करने के बावजूद नौकरी न मिलने की बात कही, जबकि अन्य विद्यार्थियों ने लंबित परिणाम और डिग्री जैसी समस्याओं का जिक्र किया।
शिक्षा बजट पर CM यादव ने क्या आंकड़े दिए?
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मध्य प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था का बचाव करते हुए स्कूल शिक्षा बजट में वृद्धि का आंकड़ा रखा। उन्होंने कहा कि वर्ष 2002-03 के दौरान यह बजट करीब 2,000 करोड़ रुपये था, जबकि अब यह बढ़कर 38,658 करोड़ रुपये हो गया है। इसी तुलना के आधार पर उन्होंने वर्तमान सरकार की शिक्षा प्राथमिकताओं को रेखांकित किया।
हालांकि सरकारी स्रोतों से जुड़े हालिया प्रकाशनों में स्कूल शिक्षा के एक अलग बजट मद के लिए 2026-27 में 9,623.12 करोड़ रुपये का आंकड़ा भी प्रकाशित हुआ है। इसलिए 38,658 करोड़ रुपये के आंकड़े की सटीक बजटीय परिभाषा और इसमें शामिल मदों को स्पष्ट करना जरूरी है।
ड्रॉपआउट रेट को लेकर क्या दावा?
Mohan Yadav Rahul Gandhi Controversy में स्कूल ड्रॉपआउट रेट भी प्रमुख मुद्दा बन गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश ने स्कूल शिक्षा में ड्रॉपआउट को शून्य तक लाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की है और इसके लिए उन्होंने सांदीपनि स्कूलों तथा अन्य सरकारी पहलों का उल्लेख किया।
हालिया रिपोर्टों में मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग के हवाले से कहा गया है कि प्राथमिक स्तर पर ड्रॉपआउट दर 2002-03 में 15 प्रतिशत से घटकर 2025-26 में शून्य हुई। वहीं माध्यमिक स्तर का आंकड़ा 24.70 प्रतिशत से घटकर 6.2 प्रतिशत बताया गया है। NITI Aayog के 2026 के विश्लेषण में भी मध्य प्रदेश की प्राथमिक स्तर की ड्रॉपआउट दर 2024-25 के लिए शून्य बताई गई है।
स्कूटी, लैपटॉप और साइकिल का मुद्दा भी उठा
मुख्यमंत्री ने अपने जवाब में छात्र कल्याण योजनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने कांग्रेस से सवाल किया कि उसके शासनकाल में विद्यार्थियों को गणवेश, साइकिल, लैपटॉप और मेधावी छात्रों के लिए स्कूटी जैसी सुविधाएं किस स्तर पर दी गई थीं।
यह बयान राजनीतिक तुलना के तौर पर आया। मुख्यमंत्री का कहना था कि वर्तमान सरकार ने विद्यार्थियों और युवाओं को प्रोत्साहन देने के लिए कई योजनाएं संचालित की हैं।
DUSU चुनाव के नतीजों को लेकर भी वार-पलटवार
इसी विवाद के बीच दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ यानी DUSU चुनाव के नतीजों का भी जिक्र हुआ। 2026 के चुनाव में ABVP ने चार केंद्रीय पदों में से तीन—अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव—जीते, जबकि उपाध्यक्ष पद निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन ने जीता। NSUI चारों केंद्रीय पदों में कोई पद हासिल नहीं कर सकी। मतदान प्रतिशत 40.46 रहा।
मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने इन नतीजों को कांग्रेस और उसके छात्र संगठन के खिलाफ जनमत के रूप में प्रस्तुत किया। हालांकि चुनाव परिणाम से पूरे देश के युवाओं की राय का निष्कर्ष निकालना एक राजनीतिक व्याख्या है, प्रत्यक्ष तथ्य इतना है कि इस चुनाव में ABVP ने तीन केंद्रीय पद जीते और एक पद निर्दलीय उम्मीदवार के खाते में गया।
एक लाख की भीड़ या 12 हजार क्षमता? क्या है विवाद?
विजयवर्गीय ने राहुल गांधी के कार्यक्रम की भीड़ को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने दावा किया कि कार्यक्रम स्थल की क्षमता करीब 12 हजार लोगों की थी, जबकि आयोजकों की ओर से एक लाख लोगों की मौजूदगी का दावा किया गया।
दूसरी ओर, कार्यक्रम से पहले कांग्रेस ने करीब 1.20 लाख छात्रों के रजिस्ट्रेशन का दावा किया था। रजिस्ट्रेशन का आंकड़ा वास्तविक कार्यक्रम में मौजूद लोगों की संख्या के बराबर नहीं माना जा सकता। इसलिए आयोजन की वास्तविक उपस्थिति को लेकर दोनों पक्षों के दावों को अलग-अलग समझना जरूरी है।
शिक्षा पर बहस अब राजनीतिक मुद्दा क्यों बनी?
Mohan Yadav Rahul Gandhi Controversy से यह साफ है कि मध्य प्रदेश में शिक्षा, रोजगार, भर्ती और परीक्षा व्यवस्था अब राजनीतिक बहस के प्रमुख विषयों में शामिल हैं। राहुल गांधी छात्रों की समस्याओं और शिक्षा व्यवस्था में बदलाव की जरूरत पर जोर दे रहे हैं, जबकि मुख्यमंत्री मोहन यादव सरकार की योजनाओं, बजट और शिक्षा संबंधी आंकड़ों के आधार पर अपनी सरकार का पक्ष रख रहे हैं।
इस बहस में एक ओर छात्रों की ओर से सामने रखे गए व्यक्तिगत अनुभव हैं, तो दूसरी ओर सरकार की ओर से प्रस्तुत किए गए राज्यस्तरीय आंकड़े। दोनों तरह की सूचनाओं का अर्थ अलग है और इन्हें एक-दूसरे का सीधा विकल्प मानना उचित नहीं होगा।
अब आगे क्या?
इंदौर का ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम खत्म होने के बाद भी उससे जुड़ा राजनीतिक संवाद जारी है। कांग्रेस शिक्षा और युवाओं से जुड़े मुद्दों को उठा रही है, जबकि भाजपा सरकार अपने कार्यकाल की योजनाओं और आंकड़ों के जरिए जवाब दे रही है।
Mohan Yadav Rahul Gandhi Controversy में फिलहाल सबसे अहम सवाल यही है कि शिक्षा, रोजगार, भर्ती और छात्र सुविधाओं पर चल रही राजनीतिक बहस आने वाले दिनों में किन ठोस मुद्दों तक पहुंचती है। इंदौर की यह राजनीतिक तकरार अब आंकड़ों, छात्र अनुभवों और दोनों दलों के दावों के बीच जारी सार्वजनिक बहस का हिस्सा बन चुकी है।


