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Iran US Conflict: क्या फिर ईरान पर होगा हमला? तय समय से पहले व्हाइट हाउस लौटे ट्रंप, ब्रिटेन से बॉम्बर रवाना

Iran-US Conflict: Will Iran be attacked again? Trump returns to the White House ahead of schedule; bombers depart from Britain.

पश्चिम एशिया में जारी Iran US Conflict के बीच शनिवार रात घटनाक्रम तेजी से बदलता दिखाई दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने तय कार्यक्रम से पहले कैंप डेविड से व्हाइट हाउस लौट आए। इसी दौरान ईरान ने अमेरिका के सामने बातचीत दोबारा शुरू करने के लिए सात शर्तें रखीं और साफ चेतावनी दी कि मांगें स्वीकार नहीं होने पर वह “निर्णायक युद्ध” के लिए तैयार है। दूसरी तरफ अमेरिका ने पश्चिम एशिया में मौजूद अपने नागरिकों के लिए सुरक्षा चेतावनी जारी की है।

इन घटनाओं के बीच ब्रिटेन के RAF Fairford एयरबेस से अमेरिकी B-1B बॉम्बर के उड़ान भरने की रिपोर्ट भी सामने आई है। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों में इस बात की आधिकारिक पुष्टि नहीं है कि विमान ईरान के खिलाफ किसी आगामी सैन्य अभियान के लिए रवाना हुआ है। इसलिए ट्रंप की वापसी और बॉम्बर की उड़ान को सीधे किसी नए हमले से जोड़ना फिलहाल जल्दबाजी होगी।

ट्रंप ने क्यों छोटा किया कैंप डेविड प्रवास?

व्हाइट हाउस के सार्वजनिक कार्यक्रम के अनुसार ट्रंप को रविवार को कैंप डेविड से वॉशिंगटन लौटना था। लेकिन शनिवार शाम उनका कार्यक्रम बदला गया और वह निर्धारित समय से पहले व्हाइट हाउस पहुंच गए। यह बदलाव ऐसे वक्त हुआ जब ईरान के साथ संघर्ष को लेकर अमेरिकी प्रशासन के अगले कदमों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नजर बनी हुई है।

ट्रंप की इस अचानक वापसी ने Iran US Conflict को लेकर अटकलों को जरूर बढ़ाया है, लेकिन व्हाइट हाउस की ओर से यह नहीं कहा गया है कि वापसी का कारण ईरान पर तत्काल सैन्य कार्रवाई की तैयारी है। इसलिए इस घटनाक्रम को फिलहाल संदर्भ के साथ देखना जरूरी है।

ईरान ने अमेरिका के सामने रखीं सात शर्तें

ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसेन रेजाई ने बताया कि कतर के माध्यम से तेहरान की शर्तें वॉशिंगटन तक पहुंचाई गई हैं। ईरान अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के जवाब का इंतजार कर रहा है।

रेजाई के मुताबिक, बातचीत शुरू करने की दिशा में ईरान की प्रमुख मांगों में सभी मोर्चों पर युद्ध समाप्त करना, ईरान के फ्रीज किए गए धन को जारी करना और अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी को खत्म करना शामिल है। उन्होंने कहा कि ट्रंप की धमकियों से ईरान की स्थिति नहीं बदलेगी और जरूरत पड़ने पर उनका देश निर्णायक युद्ध के लिए तैयार है।

बातचीत भी, सैन्य तैयारी भी

ईरान का मौजूदा रुख एक साथ दो दिशाओं में दिखाई दे रहा है। एक तरफ कतर के जरिए अमेरिका तक बातचीत की शर्तें पहुंचाई गई हैं, वहीं दूसरी तरफ ईरानी अधिकारी संभावित नए अमेरिकी हमले की तैयारी की बात कर रहे हैं।

रेजाई ने एक अन्य बयान में कहा कि ईरानी सैन्य आकलन के मुताबिक अमेरिका की ओर से एक और हमला संभव है और इसी को ध्यान में रखते हुए सैन्य योजनाओं में बदलाव किया गया है। हालांकि, ये ईरानी अधिकारी के दावे हैं और उपलब्ध रिपोर्टों में इनके सभी सैन्य विवरणों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

अमेरिका ने पश्चिम एशिया में जारी किया सुरक्षा अलर्ट

Iran US Conflict के बीच अमेरिकी विदेश विभाग ने पश्चिम एशिया में मौजूद अमेरिकी नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी है। अमेरिका ने क्षेत्र में तेजी से हालात बिगड़ने, उड़ानों में व्यवधान और संभावित एयरस्पेस बंद होने की आशंका जताई है।

अमेरिकी चेतावनी में ईरान और उसके समर्थक समूहों से जुड़े संभावित खतरों का भी उल्लेख किया गया है। नागरिकों से यात्रा और स्थानीय सुरक्षा परिस्थितियों को लेकर ताजा जानकारी पर नजर रखने को कहा गया है।

यह अलर्ट ऐसे समय जारी हुआ है जब क्षेत्र में अमेरिका से जुड़े राजनयिक और सैन्य हितों को लेकर पहले से सुरक्षा चिंताएं बनी हुई हैं।

ब्रिटेन से अमेरिकी B-1B बॉम्बर ने भरी उड़ान

इसी बीच ब्रिटेन के RAF Fairford एयरबेस से अमेरिकी B-1B Lancer बॉम्बर के उड़ान भरने की रिपोर्ट सामने आई। कुछ रिपोर्टों में विमान को हथियारों से लैस बताया गया है और इसे पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के संदर्भ में देखा जा रहा है।

हालांकि, विमान की उड़ान को ईरान के खिलाफ आगामी हमले का आधिकारिक संकेत नहीं माना जा सकता। उपलब्ध रिपोर्टों में विमान की अंतिम मंजिल या मिशन की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए Iran US Conflict के संदर्भ में यह एक महत्वपूर्ण सैन्य गतिविधि जरूर है, लेकिन इससे किसी नए हमले का निष्कर्ष निकालना अभी उचित नहीं होगा।

सऊदी अरब पर हूती हमले से नया मोर्चा

पश्चिम एशिया में तनाव का एक और महत्वपूर्ण कारण सऊदी अरब और यमन के हूती विद्रोहियों के बीच बढ़ता संघर्ष है। शनिवार को सऊदी अरब ने कहा कि हूतियों की ओर से रियाद को निशाना बनाकर बैलिस्टिक मिसाइल दागी गई, जिसे रोक दिया गया।

हूतियों ने रियाद और अन्य संवेदनशील ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया, लेकिन उनके दावों के सभी हिस्सों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। रिपोर्टों के अनुसार हमले के दौरान रियाद में विस्फोट और धुआं दिखाई दिया तथा एयरपोर्ट के आसपास सुरक्षा गतिविधियां बढ़ीं।

इस घटनाक्रम ने Iran US Conflict का दायरा और व्यापक होने की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि हूतियों को ईरान के साथ गठजोड़ रखने वाला समूह माना जाता है।

क्या अमेरिका फिर ईरान पर हमला करेगा?

यही इस समय सबसे बड़ा सवाल है। ट्रंप का तय समय से पहले व्हाइट हाउस लौटना, पश्चिम एशिया में अमेरिकी सुरक्षा चेतावनी और ब्रिटेन से B-1B बॉम्बर की उड़ान—इन सभी घटनाओं ने अटकलों को तेज किया है।

लेकिन इन घटनाओं को जोड़कर यह कहना कि अमेरिका ने ईरान पर नए हमले का फैसला कर लिया है, फिलहाल उपलब्ध आधिकारिक जानकारी से साबित नहीं होता। दूसरी तरफ ईरान ने बातचीत का रास्ता खुला रखने के साथ सैन्य टकराव के लिए तैयार रहने का संदेश दिया है।

संयुक्त राष्ट्र महासभा पर भी दुनिया की नजर

यह घटनाक्रम ऐसे समय हो रहा है जब न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के लिए दुनिया के कई नेता पहुंच रहे हैं। पश्चिम एशिया का संघर्ष इस बार भी अंतरराष्ट्रीय चर्चा के प्रमुख मुद्दों में रहने वाला है।

फिलहाल Iran US Conflict एक ऐसे मोड़ पर है जहां कूटनीतिक बातचीत और सैन्य तैयारी दोनों समानांतर दिखाई दे रहे हैं। ईरान ने अपनी शर्तें अमेरिका तक पहुंचा दी हैं और ट्रंप के जवाब का इंतजार किया जा रहा है। अब आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि दोनों पक्ष बातचीत की दिशा में आगे बढ़ते हैं या क्षेत्र में सैन्य तनाव और बढ़ता है।

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