Uttarakhand Diwali Bonus 2026: धामी सरकार का कर्मचारियों को दिवाली गिफ्ट, 80 हजार कर्मियों को मिलेगा ₹6,908 तक बोनस जानिए कौन होंगे पात्र और किसे नहीं मिलेगा लाभ
Uttarakhand Diwali Bonus 2026: A Diwali gift for employees from the Dhami government 80,000 staff members to receive a bonus of up to ₹6,908; find out who is eligible and who will not receive the benefit.
Uttarakhand Diwali Bonus 2026: उत्तराखंड सरकार ने दिवाली से पहले राज्य के हजारों कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए तदर्थ बोनस (Ad-hoc Bonus) देने का आदेश जारी कर दिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर वित्त विभाग ने पात्र अराजपत्रित और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को 30 दिन के बराबर बोनस देने की मंजूरी दी है।
सरकार के इस फैसले से प्रदेश के लगभग 80 हजार कर्मचारियों को लाभ मिलने का अनुमान है। पात्र नियमित कर्मचारियों को अधिकतम ₹6,908, जबकि निर्धारित शर्तें पूरी करने वाले दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को अधिकतम ₹1,184 बोनस मिलेगा।
हालांकि, यह बोनस सभी सरकारी कर्मचारियों को नहीं मिलेगा। इसके लिए ग्रेड पे, सेवा अवधि, कर्मचारी की श्रेणी और अनुशासनात्मक रिकॉर्ड जैसी शर्तें निर्धारित की गई हैं।
Uttarakhand Diwali Bonus 2026: सरकार ने जारी किया शासनादेश
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की स्वीकृति के बाद सोमवार, 2 नवंबर 2026 को वित्त सचिव डॉ. वी. षणमुगम ने तदर्थ बोनस के भुगतान संबंधी आदेश जारी किया।
यह बोनस वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए स्वीकृत किया गया है।
इसके अंतर्गत पात्र कर्मचारियों को 30 दिन की परिलब्धियों के बराबर बोनस दिया जाएगा। बोनस की गणना के लिए अधिकतम मासिक परिलब्धियों की सीमा ₹7,000 निर्धारित की गई है।
इस सीमा के आधार पर पूरे वर्ष की पात्र सेवा वाले कर्मचारियों के लिए अधिकतम बोनस ₹6,908 बनता है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि बोनस का भुगतान नकद किया जाएगा।
दिवाली से पहले जारी इस आदेश से पात्र कर्मचारियों और उनके परिवारों को त्योहार के खर्चों में आर्थिक सहायता मिलने की उम्मीद है।
किन कर्मचारियों को मिलेगा ₹6,908 तक बोनस?
वित्त विभाग के आदेश के अनुसार, तदर्थ बोनस का लाभ राज्य सरकार के समूह ‘ग’ और समूह ‘घ’ के पात्र कर्मचारियों को मिलेगा।
इसके अतिरिक्त समूह ‘ख’ के वे अराजपत्रित कर्मचारी भी इसके दायरे में आएंगे, जिनका ग्रेड वेतन ₹4,800 तक है।
सातवें वेतन आयोग की व्यवस्था में यह वेतन स्तर-8 तक की पात्रता से संबंधित है।
बोनस के लिए यह भी जरूरी है कि संबंधित कर्मचारी किसी अन्य उत्पादकता-संबद्ध बोनस योजना के अंतर्गत लाभ प्राप्त नहीं कर रहा हो।
पात्रता की मुख्य शर्तें इस प्रकार हैं:
- कर्मचारी संबंधित अराजपत्रित श्रेणी में आता हो।
- उसका ग्रेड वेतन ₹4,800 तक हो।
- वह 31 मार्च 2026 को सेवा में कार्यरत रहा हो।
- उसने निर्धारित तारीख तक कम से कम छह महीने की निरंतर और संतोषजनक सेवा पूरी की हो।
- वह किसी अन्य उत्पादकता-संबद्ध बोनस योजना के अंतर्गत शामिल न हो।
- उसके विरुद्ध बोनस रोकने से संबंधित कोई लागू अनुशासनात्मक प्रतिबंध न हो।
इन शर्तों को पूरा करने वाले कर्मचारियों को सेवा अवधि और गणना नियमों के अनुसार बोनस दिया जाएगा।
Uttarakhand Diwali Bonus 2026: ₹7,000 की सीमा के बावजूद ₹6,908 ही क्यों मिलेंगे?
कर्मचारियों के बीच सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि जब बोनस की गणना सीमा ₹7,000 है, तो अधिकतम भुगतान ₹6,908 क्यों होगा।
दरअसल, सरकार ने बोनस की गणना के लिए अधिकतम मासिक परिलब्धियों की सीमा ₹7,000 तय की है, लेकिन भुगतान 30 दिनों के आधार पर किया जाता है।
इसके लिए प्रचलित गणना इस प्रकार है:
₹7,000 × 30 ÷ 30.4 = ₹6,907.89
पूर्ण रुपये में यह राशि लगभग ₹6,908 बनती है।
इसलिए ₹7,000 बोनस की गणना के लिए निर्धारित अधिकतम मासिक सीमा है, जबकि ₹6,908 पात्र नियमित कर्मचारी को मिलने वाली अधिकतम बोनस राशि है।
इस अंतर को समझना जरूरी है, क्योंकि कुछ रिपोर्टों में ₹7,000 तक बोनस का उल्लेख किया गया है।
Daily Wage Employees को मिलेगा ₹1,184 बोनस
उत्तराखंड सरकार ने दैनिक वेतनभोगी और कैजुअल कर्मचारियों को भी निर्धारित शर्तों के आधार पर तदर्थ बोनस का लाभ देने का निर्णय लिया है।
इन कर्मचारियों के लिए अधिकतम बोनस राशि ₹1,184 तय की गई है।
हालांकि, दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए पात्रता की शर्तें नियमित कर्मचारियों से अलग हैं।
छह कार्यदिवसीय सप्ताह वाले कार्यालयों में कार्यरत दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों ने पिछले तीन वर्षों या उससे अधिक अवधि में प्रत्येक वर्ष कम से कम 240 दिन कार्य किया होना चाहिए।
वहीं, पांच कार्यदिवसीय सप्ताह वाले कार्यालयों में प्रत्येक वर्ष कम से कम 206 दिन काम करने की शर्त लागू होगी।
दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के बोनस की गणना के लिए ₹1,200 की मासिक सीमा निर्धारित की गई है।
इस आधार पर अधिकतम बोनस लगभग ₹1,184 होगा।
छह महीने की सेवा पूरी करने वालों को भी लाभ
तदर्थ बोनस के लिए कर्मचारी का पूरा एक वर्ष सेवा में रहना अनिवार्य नहीं है।
वित्त विभाग के आदेश के अनुसार, जिन पात्र कर्मचारियों ने 31 मार्च 2026 तक कम से कम छह महीने की निरंतर और संतोषजनक सेवा पूरी की है, वे भी बोनस प्राप्त कर सकते हैं।
हालांकि, छह महीने से अधिक लेकिन एक वर्ष से कम सेवा अवधि वाले कर्मचारियों को पूर्ण बोनस नहीं मिलेगा।
ऐसे कर्मचारियों को उनकी पात्र सेवा अवधि के अनुपात में बोनस दिया जाएगा।
उदाहरण के लिए, यदि किसी कर्मचारी की पात्र सेवा अवधि पूरे वर्ष के बजाय नौ महीने रही है, तो उसकी बोनस राशि का निर्धारण संबंधित सेवा अवधि और लागू गणना नियमों के अनुसार होगा।
अंतिम भुगतान संबंधित विभाग के वेतन और सेवा रिकॉर्ड के आधार पर तय किया जाएगा।
इन कर्मचारियों को नहीं मिलेगा दिवाली बोनस
सरकार ने बोनस के लिए कुछ स्पष्ट प्रतिबंध भी निर्धारित किए हैं।
इन शर्तों के कारण सभी कर्मचारियों को स्वतः बोनस का लाभ नहीं मिलेगा।
बोनस से बाहर रहने वाले या भुगतान रोके जाने वाले कर्मचारियों की प्रमुख श्रेणियां हैं:
- ₹4,800 से अधिक ग्रेड वेतन वाले कर्मचारी, जो निर्धारित पात्रता श्रेणी में नहीं आते।
- राजपत्रित कर्मचारी, जिन पर यह अराजपत्रित कर्मचारियों वाला आदेश लागू नहीं होता।
- निर्धारित न्यूनतम छह महीने की सेवा पूरी नहीं करने वाले कर्मचारी।
- संबंधित लेखा वर्ष में निलंबित रहे कर्मचारी, जहां शासनादेश के अनुसार बोनस देय नहीं है।
- ऐसे कर्मचारी जिनके विरुद्ध विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई या आपराधिक मामला लंबित है और नियमों के अनुसार भुगतान रोका जाना है।
- वित्तीय वर्ष 2025-26 में दंडित कर्मचारी, जिन पर आदेश के प्रतिबंध लागू होते हैं।
- अन्य उत्पादकता-संबद्ध बोनस योजना के अंतर्गत आने वाले कर्मचारी।
हालांकि, लंबित अनुशासनात्मक या आपराधिक मामले वाले कर्मचारी के संबंध में भुगतान रोकने और अंतिम अपात्रता के बीच अंतर है।
ऐसे मामलों में अंतिम पात्रता संबंधित कार्यवाही के परिणाम और शासनादेश की शर्तों के अनुसार निर्धारित होगी।
निलंबित कर्मचारियों के लिए क्या नियम हैं?
बोनस संबंधी आदेश में कर्मचारी की सेवा और अनुशासनात्मक स्थिति को विशेष महत्व दिया गया है।
रिपोर्टों के अनुसार, संबंधित लेखा वर्ष में निलंबित रहे कर्मचारियों के बोनस भुगतान पर प्रतिबंध लागू होगा।
इसके अतिरिक्त जिन कर्मचारियों के विरुद्ध विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई या आपराधिक मामला लंबित है, उनके बोनस का भुगतान मामले के निस्तारण तक रोका जा सकता है।
यदि संबंधित कर्मचारी दोषी पाया जाता है और शासनादेश के अनुसार अपात्र हो जाता है, तो उसे बोनस का लाभ नहीं मिलेगा।
इसलिए केवल कर्मचारी का नाम किसी मामले में होने और नियमों के अंतर्गत उसकी अंतिम अपात्रता निर्धारित होने को एक समान नहीं समझना चाहिए।
कर्मचारी की वास्तविक पात्रता विभागीय रिकॉर्ड और लागू आदेश के अनुसार तय होगी।
शिक्षण संस्थानों और जिला पंचायतों के कर्मचारियों को भी लाभ
उत्तराखंड सरकार का यह निर्णय केवल सामान्य सरकारी विभागों के कर्मचारियों तक सीमित नहीं है।
शासनादेश में पात्रता की शर्तें पूरी करने वाले अन्य संस्थानों के कर्मचारियों को भी शामिल किया गया है।
इनमें सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थानों, प्राविधिक शिक्षण संस्थानों, विभिन्न विभागों के कार्यप्रभारित कर्मचारियों, स्थानीय निकायों और जिला पंचायतों के पात्र कर्मचारी शामिल हैं।
हालांकि, इन संस्थानों में कार्यरत प्रत्येक व्यक्ति को स्वतः बोनस मिलने का अर्थ नहीं है।
संबंधित कर्मचारी की सेवा श्रेणी, वेतन स्तर और अन्य निर्धारित शर्तों के आधार पर ही भुगतान की पात्रता तय होगी।
स्थानीय निकाय और विकास प्राधिकरण खुद करेंगे भुगतान
वित्त विभाग ने स्थानीय निकायों और विकास प्राधिकरणों के कर्मचारियों के बोनस भुगतान के संबंध में भी स्थिति स्पष्ट की है।
लाभ की स्थिति में चल रहे पात्र स्थानीय निकाय और विकास प्राधिकरण अपने कर्मचारियों को निर्धारित नियमों के अनुसार बोनस दे सकेंगे।
लेकिन इसके लिए राज्य सरकार की ओर से अलग से अनुदान नहीं दिया जाएगा।
बोनस का भुगतान संबंधित निकाय या विकास प्राधिकरण को अपने संसाधनों से करना होगा।
इस व्यवस्था का अर्थ है कि ऐसे संस्थानों की वित्तीय स्थिति और लागू पात्रता शर्तें भुगतान के लिए महत्वपूर्ण होंगी।
लगभग 80 हजार कर्मचारियों को मिलेगा फायदा
उत्तराखंड सरकार के इस निर्णय से राज्य के लगभग 80 हजार कर्मचारियों को लाभ मिलने का अनुमान जताया गया है।
इनमें नियमित अराजपत्रित कर्मचारियों के साथ पात्र दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी भी शामिल हैं।
बोनस की वास्तविक राशि कर्मचारी की श्रेणी और सेवा अवधि पर निर्भर करेगी।
इसलिए सभी 80 हजार कर्मचारियों को समान रूप से ₹6,908 मिलने का अनुमान लगाना सही नहीं होगा।
कुछ कर्मचारियों को पूर्ण बोनस मिलेगा, जबकि अन्य को आनुपातिक आधार पर या दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए निर्धारित सीमा के अनुसार भुगतान होगा।
राज्य सरकार पर पड़ने वाले कुल वित्तीय भार का सटीक आंकड़ा उपलब्ध रिपोर्टों में स्पष्ट नहीं है।
CM Pushkar Singh Dhami ने कर्मचारियों के योगदान को सराहा
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने तदर्थ बोनस की स्वीकृति को कर्मचारियों के कल्याण से जुड़ा निर्णय बताया है।
उन्होंने राज्य के विकास और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में कर्मचारियों के योगदान का उल्लेख किया।
मुख्यमंत्री के अनुसार, सरकारी कर्मचारी जनकल्याणकारी योजनाओं और विकास कार्यों को धरातल पर लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने दिवाली के अवसर पर कर्मचारियों को बोनस देने के फैसले को उनके परिश्रम और योगदान की सराहना से जोड़ा।
राज्य सरकार ने कर्मचारियों के हितों और कल्याण से जुड़े विषयों पर सकारात्मक निर्णय लेने की प्रतिबद्धता भी दोहराई है।
कर्मचारियों को बोनस कब मिलेगा?
सरकार ने दिवाली से पहले तदर्थ बोनस के भुगतान को मंजूरी दी है और वित्त विभाग की ओर से आदेश जारी कर दिया गया है।
हालांकि, प्रत्येक विभाग के कर्मचारियों के बैंक खातों में राशि जमा होने की एक समान निश्चित तारीख की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
भुगतान की प्रक्रिया संबंधित विभागों और वित्तीय अधिकारियों के माध्यम से पूरी की जाएगी।
कर्मचारी अपने विभाग के आहरण एवं वितरण अधिकारी या संबंधित लेखा अनुभाग से भुगतान की स्थिति की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि शासनादेश जारी होना और प्रत्येक कर्मचारी के खाते में राशि पहुंचना अलग-अलग प्रशासनिक चरण हैं।
Uttarakhand Government Employees के लिए क्या मायने रखता है फैसला?
दिवाली से पहले तदर्थ बोनस की मंजूरी उत्तराखंड के पात्र कर्मचारियों के लिए आर्थिक राहत का निर्णय है।
सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 30 दिन के बराबर बोनस स्वीकृत किया है।
इसके तहत पात्र नियमित कर्मचारियों को अधिकतम ₹6,908 और पात्र दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को अधिकतम ₹1,184 मिलेंगे।
लगभग 80 हजार कर्मचारियों को इस फैसले से लाभ मिलने की उम्मीद है।
हालांकि, बोनस के लिए ग्रेड वेतन, सेवा अवधि, कर्मचारी की श्रेणी और अनुशासनात्मक स्थिति जैसी शर्तें लागू होंगी।
इसलिए प्रत्येक कर्मचारी को अपनी पात्रता संबंधित विभाग और शासनादेश के आधार पर सुनिश्चित करनी चाहिए।



