उत्तराखंड

Uttarakhand Land Scam Allegations: सरकारी जमीनों को लेकर धामी सरकार के खिलाफ कांग्रेस का बड़ा आंदोलन, दिल्ली में कुमारी सैलजा करेंगी खुलासा 4 नवंबर को 11 स्थानों पर प्रदर्शन

Uttarakhand Land Scam Allegations: Congress launches major agitation against the Dhami government over government lands; Kumari Selja to make revelations in Delhi protests to be held at 11 locations on November 4.

Uttarakhand Land Scam Allegations: उत्तराखंड में सरकारी जमीनों के आवंटन, बिक्री और सार्वजनिक संपत्तियों के इस्तेमाल को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। कांग्रेस ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के खिलाफ चार नवंबर को प्रदेशव्यापी विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा की है। ‘भूमि बचाओ–धामी हटाओ’ अभियान के तहत पार्टी राज्य के 11 स्थानों पर प्रदर्शन करेगी।

वहीं, कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव एवं उत्तराखंड प्रभारी कुमारी सैलजा ने दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके राज्य में कथित भूमि घोटालों का खुलासा करने की घोषणा की है। कांग्रेस का दावा है कि उसके पास जमीनों के आवंटन और बिक्री से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी और दस्तावेज हैं।

इस अभियान में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह सहित कई वरिष्ठ नेताओं को अलग-अलग क्षेत्रों की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

कांग्रेस का आरोप है कि उत्तराखंड की बहुमूल्य सरकारी जमीनों और सार्वजनिक संपत्तियों को निजी हितों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और किसी विशेष आवंटन में भ्रष्टाचार सिद्ध होने के लिए आधिकारिक रिकॉर्ड तथा जांच के निष्कर्ष आवश्यक होंगे।

Uttarakhand Land Scam Allegations: चार नवंबर को सरकार के खिलाफ सड़क पर उतरेगी कांग्रेस

उत्तराखंड कांग्रेस ने चार नवंबर 2026 को सरकारी जमीनों और सार्वजनिक संपत्तियों के मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन करने का निर्णय लिया है।

पार्टी के प्रदेशव्यापी अभियान को ‘भूमि बचाओ–धामी हटाओ’ नाम दिया गया है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल के आह्वान और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के निर्देश पर आयोजित होने वाले इन कार्यक्रमों की शुरुआत सुबह 10 बजे निर्धारित की गई है।

कांग्रेस ने संबंधित जिलों के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से बड़ी संख्या में प्रदर्शन स्थलों पर पहुंचने का आह्वान किया है।

पार्टी का कहना है कि यह आंदोलन केवल राजनीतिक विरोध तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रदेश की सरकारी संपत्तियों, प्राकृतिक संसाधनों और जनता के अधिकारों से जुड़ा है।

प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस राज्य सरकार से विभिन्न भूमि आवंटनों और सार्वजनिक संपत्तियों के उपयोग संबंधी फैसलों पर जवाब मांगेगी।

दिल्ली में कुमारी सैलजा करेंगी प्रेस कॉन्फ्रेंस

उत्तराखंड में प्रस्तावित विरोध प्रदर्शनों के साथ कांग्रेस ने राष्ट्रीय स्तर पर भी इस मुद्दे को उठाने की रणनीति बनाई है।

प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा ने दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय से प्रेस कॉन्फ्रेंस करने और कथित भूमि अनियमितताओं की जानकारी सार्वजनिक करने की घोषणा की है।

सैलजा ने आरोप लगाया है कि उत्तराखंड में बहुमूल्य जमीनें बहुत कम कीमतों पर बेची जा रही हैं।

उन्होंने भूमि संबंधी मामलों को राज्य में भ्रष्टाचार के बड़े मुद्दों में शामिल बताया है।

उनके अनुसार, कांग्रेस के पास विभिन्न स्थानों पर जमीनों से जुड़े मामलों की विस्तृत जानकारी है और पार्टी जनता के सामने इन विषयों को उठाएगी।

हालांकि, प्रस्तावित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कौन-कौन से दस्तावेज पेश किए जाएंगे और उनसे किन विशिष्ट आरोपों का समर्थन होगा, यह उनके सार्वजनिक होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

खड़गे और राहुल गांधी के साथ बैठक में बनी रणनीति

कांग्रेस ने उत्तराखंड में आगामी राजनीतिक गतिविधियों और वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर दिल्ली में महत्वपूर्ण बैठक की।

इस बैठक में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल और उत्तराखंड प्रभारी कुमारी सैलजा शामिल हुए।

प्रदेश से कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, प्रीतम सिंह और हरक सिंह रावत सहित वरिष्ठ नेताओं ने भाग लिया।

बैठक में उत्तराखंड की राजनीतिक स्थिति, संगठन को मजबूत बनाने और आगामी चुनावी रणनीति पर चर्चा की गई।

सरकारी जमीनों और कथित भ्रष्टाचार से जुड़े मुद्दों को जनता के बीच ले जाने पर भी जोर दिया गया।

कांग्रेस ने भूमि संबंधी मामलों को लेकर अगले कई महीनों तक राजनीतिक गतिविधियां जारी रखने के संकेत दिए हैं।

प्रदेश के इन 11 स्थानों पर होगा कांग्रेस का प्रदर्शन

कांग्रेस ने उत्तराखंड के अलग-अलग क्षेत्रों में सरकारी भूमि और सार्वजनिक संपत्तियों से जुड़े मामलों को लेकर प्रदर्शन की योजना तैयार की है।

अभियान के प्रमुख स्थान और संबंधित मुद्दे इस प्रकार हैं:

  1. नैनीताल: पटवाडांगर की 13.64 एकड़ भूमि और ज्योलीकोट निरीक्षण भवन।
  2. अल्मोड़ा: निरीक्षण भवन और कटारमल क्षेत्र की भूमि।
  3. रानीखेत: चौबटिया उद्यान पार्क और निरीक्षण भवन।
  4. हल्द्वानी: एचएमटी रानीबाग की लगभग 53 एकड़ भूमि।
  5. भीमताल: रामगढ़ की लगभग 15 एकड़ भूमि और संबंधित निरीक्षण भवन।
  6. ऋषिकेश: आईडीपीएल की लगभग 633 एकड़ भूमि।
  7. विकासनगर: डाकपत्थर क्षेत्र की लगभग 180 एकड़ भूमि।
  8. मसूरी: जॉर्ज एवरेस्ट एस्टेट की लगभग 142 एकड़ भूमि।
  9. टिहरी गढ़वाल: धनोल्टी की लगभग 247 एकड़ भूमि और कद्दूखाल निरीक्षण भवन।
  10. हरिद्वार: अलकनंदा होटल और हरकी पैड़ी क्षेत्र से संबंधित सार्वजनिक संपत्तियां।
  11. रानीपुर: सलेमपुर महदूद क्षेत्र की लगभग 21 एकड़ भूमि।

इन स्थानों पर कांग्रेस भूमि आवंटन, उपयोग और सार्वजनिक संपत्तियों के प्रबंधन से जुड़े सवाल उठाएगी।

हालांकि, संबंधित भूमि का क्षेत्रफल और कानूनी स्थिति आधिकारिक राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर सत्यापित की जानी चाहिए। सूची में शामिल होना अपने आप में किसी अवैध आवंटन का प्रमाण नहीं है।

IDPL Rishikesh की 633 एकड़ जमीन पर उठेंगे सवाल

कांग्रेस के अभियान में ऋषिकेश स्थित आईडीपीएल की भूमि प्रमुख मुद्दों में शामिल है।

पार्टी ने लगभग 633 एकड़ भूमि से जुड़े मामलों को लेकर राज्य सरकार से जवाब मांगने की तैयारी की है।

आईडीपीएल परिसर उत्तराखंड के महत्वपूर्ण औद्योगिक क्षेत्रों में शामिल रहा है।

इस भूमि के भविष्य में उपयोग, हस्तांतरण और विकास संबंधी फैसलों को लेकर विभिन्न स्तरों पर चर्चा होती रही है।

कांग्रेस इस जमीन को सार्वजनिक संसाधनों के संरक्षण से जुड़ा मुद्दा बना रही है।

देहरादून और ऋषिकेश क्षेत्र में पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत तथा संबंधित जिला और महानगर कांग्रेस पदाधिकारियों को आंदोलन की जिम्मेदारी दी गई है।

हालांकि, इस भूमि से संबंधित किसी विशिष्ट निर्णय की वैधता का आकलन उसके स्वामित्व, स्वीकृतियों और लागू कानूनी शर्तों के आधार पर ही किया जा सकता है।

Uttarakhand Land Scam Allegations: Mussoorie George Everest Estate की भूमि भी विवाद के केंद्र में

मसूरी स्थित जॉर्ज एवरेस्ट एस्टेट कांग्रेस के विरोध अभियान का एक अन्य महत्वपूर्ण मुद्दा है।

पार्टी ने लगभग 142 एकड़ भूमि से जुड़े सरकारी निर्णयों पर सवाल उठाए हैं।

कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि इस ऐतिहासिक और पर्यटन महत्व वाले क्षेत्र की जमीन के उपयोग से संबंधित फैसलों की समीक्षा होनी चाहिए।

पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत ने भी सार्वजनिक बयानों में जॉर्ज एवरेस्ट क्षेत्र की भूमि के संबंध में सवाल उठाए हैं।

हालांकि, उनके द्वारा लगाए गए किसी व्यक्ति या संस्था विशेष को अनुचित लाभ पहुंचाने के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

मसूरी में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल को प्रदर्शन का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

Dakpathar की 180 एकड़ भूमि पर प्रीतम सिंह संभालेंगे मोर्चा

देहरादून जिले के विकासनगर क्षेत्र में डाकपत्थर की लगभग 180 एकड़ भूमि को भी कांग्रेस ने अपने अभियान में शामिल किया है।

डाकपत्थर क्षेत्र जलविद्युत परियोजनाओं और संबंधित सार्वजनिक परिसंपत्तियों के कारण महत्वपूर्ण माना जाता है।

कांग्रेस ने इस क्षेत्र की भूमि से संबंधित फैसलों पर सवाल उठाने की योजना बनाई है।

पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं चकराता विधायक प्रीतम सिंह को विकासनगर क्षेत्र में आंदोलन का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी दी गई है।

भूमि से संबंधित आरोपों की पुष्टि के लिए उसके स्वामित्व, आवंटन के उद्देश्य और किसी संभावित हस्तांतरण की वैधानिक प्रक्रिया को देखना जरूरी होगा।

HMT Ranibagh की 53 एकड़ जमीन का मुद्दा उठाएगी कांग्रेस

हल्द्वानी के रानीबाग क्षेत्र में स्थित एचएमटी की लगभग 53 एकड़ भूमि भी विरोध अभियान का हिस्सा है।

एचएमटी परिसर की भूमि औद्योगिक विरासत और भविष्य में सार्वजनिक संसाधनों के उपयोग से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है।

कांग्रेस इस जमीन के संबंध में लिए गए फैसलों पर सवाल उठाएगी।

हल्द्वानी में विधायक तिलक राज बेहड़ और सुमित हृदयेश को आंदोलन की जिम्मेदारी दी गई है।

पार्टी का उद्देश्य भूमि संबंधी मामलों को जनता के सामने लाना और सरकार से जवाब मांगना है।

हालांकि, भूमि से जुड़े किसी भी कथित घोटाले की पुष्टि दस्तावेजी जांच से ही संभव होगी।

नैनीताल, अल्मोड़ा और रानीखेत में भी प्रदर्शन

कांग्रेस ने कुमाऊं क्षेत्र के विभिन्न स्थानों पर वरिष्ठ नेताओं की जिम्मेदारी तय की है।

नैनीताल में पटवाडांगर की 13.64 एकड़ भूमि और ज्योलीकोट निरीक्षण भवन के मुद्दे पर नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य तथा कांग्रेस कार्यसमिति सदस्य गुरदीप सिंह सप्पल अभियान का नेतृत्व करेंगे।

अल्मोड़ा में विधायक मनोज तिवारी और पूर्व विधायक गोविंद सिंह कुंजवाल को जिम्मेदारी दी गई है।

रानीखेत के चौबटिया उद्यान पार्क और निरीक्षण भवन से जुड़े मामलों को लेकर पूर्व प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा आंदोलन का नेतृत्व करेंगे।

भीमताल और रामगढ़ क्षेत्र में उपनेता प्रतिपक्ष भुवन कापड़ी और विधायक आदेश चौहान को जिम्मेदारी सौंपी गई है।

इन कार्यक्रमों के माध्यम से कांग्रेस कुमाऊं के विभिन्न हिस्सों में सरकारी भूमि और सार्वजनिक संपत्तियों के मुद्दे उठाएगी।

हरिद्वार में हरीश रावत करेंगे प्रदर्शन का नेतृत्व

हरिद्वार में कांग्रेस ने अलकनंदा होटल और हरकी पैड़ी क्षेत्र से संबंधित सार्वजनिक संपत्तियों को अभियान के केंद्र में रखा है।

इस क्षेत्र में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के साथ विधायक ममता राकेश, अनुपमा रावत और रवि बहादुर को जिम्मेदारी दी गई है।

रानीपुर क्षेत्र के सलेमपुर महदूद की लगभग 21 एकड़ भूमि से संबंधित मामले में विधायक फुरकान अहमद और अन्य पार्टी पदाधिकारी आंदोलन से जुड़ेंगे।

हरिद्वार धार्मिक पर्यटन और सार्वजनिक सुविधाओं की दृष्टि से महत्वपूर्ण शहर है।

इसलिए कांग्रेस यहां भूमि और संपत्तियों के उपयोग संबंधी फैसलों पर सरकार से जवाब मांगने की तैयारी कर रही है।

कांग्रेस के आरोपों पर भाजपा का जवाब

कांग्रेस के प्रस्तावित अभियान के बीच भाजपा ने भी विपक्ष पर पलटवार किया है।

भाजपा विधायक और प्रदेश प्रवक्ता विनोद चमोली ने कांग्रेस से उसके अपने शासनकाल में किए गए भूमि आवंटनों पर स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।

चमोली का तर्क है कि सरकारी जमीनों की रक्षा की बात करने से पहले कांग्रेस को अपने पूर्व निर्णयों के संबंध में जवाब देना चाहिए।

इस प्रकार भाजपा और कांग्रेस दोनों एक-दूसरे की सरकारों के भूमि आवंटन संबंधी फैसलों पर सवाल उठा रहे हैं।

हालांकि, किसी भी आवंटन को अवैध घोषित करने के लिए राजनीतिक आरोप पर्याप्त नहीं हैं।

इसका निर्धारण संबंधित प्रशासनिक रिकॉर्ड, सरकारी मंजूरियों और सक्षम न्यायिक अथवा जांच संस्थाओं के निष्कर्षों से ही किया जा सकता है।

2027 विधानसभा चुनाव से पहले भूमि विवाद बना राजनीतिक मुद्दा

उत्तराखंड में वर्ष 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं।

ऐसे में कांग्रेस और भाजपा दोनों की राजनीतिक सक्रियता बढ़ रही है।

कांग्रेस भूमि बचाओ अभियान के माध्यम से सरकारी संपत्तियों, भ्रष्टाचार और संसाधनों के संरक्षण को जनता के बीच प्रमुख मुद्दे के रूप में प्रस्तुत कर रही है।

दूसरी ओर भाजपा विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए पूर्व कांग्रेस सरकारों के फैसलों पर सवाल उठा रही है।

भूमि आवंटन का मुद्दा राज्य में पर्यटन, औद्योगिक विकास, स्थानीय रोजगार और सार्वजनिक संसाधनों से जुड़ा हुआ है।

इसलिए इससे संबंधित विवाद राजनीतिक चर्चा के अतिरिक्त प्रशासनिक जवाबदेही के लिए भी महत्वपूर्ण है।

Kumari Selja Press Conference पर रहेंगी नजरें

कांग्रेस की उत्तराखंड प्रभारी कुमारी सैलजा की प्रस्तावित दिल्ली प्रेस कॉन्फ्रेंस इस अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकती है।

पार्टी ने संकेत दिए हैं कि वह कथित भूमि अनियमितताओं से संबंधित विवरण और दस्तावेज सामने रखेगी।

हालांकि, इन दस्तावेजों की सामग्री, उनकी प्रमाणिकता और उनसे निकलने वाले कानूनी निष्कर्षों की अभी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

यदि कांग्रेस भूमि आवंटन से जुड़े सरकारी आदेश, अनुबंध या अन्य अभिलेख सार्वजनिक करती है, तो उनका मूल्यांकन संबंधित नियमों और सरकार के पक्ष के साथ करना आवश्यक होगा।

इस मुद्दे पर धामी सरकार की विशिष्ट प्रतिक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी।

Uttarakhand Congress Protest: चार नवंबर को क्या होगा?

उत्तराखंड कांग्रेस चार नवंबर को प्रदेश के 11 स्थानों पर ‘भूमि बचाओ–धामी हटाओ’ अभियान के तहत प्रदर्शन करेगी।

पार्टी ने प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं को क्षेत्रवार जिम्मेदारियां सौंपी हैं और कार्यकर्ताओं से सुबह 10 बजे निर्धारित स्थलों पर पहुंचने की अपील की है।

इसके साथ दिल्ली में कुमारी सैलजा की प्रस्तावित प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से कांग्रेस इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की तैयारी कर रही है।

कांग्रेस का दावा है कि सरकारी भूमि और सार्वजनिक संपत्तियों के उपयोग में अनियमितताएं हुई हैं, जबकि भाजपा विपक्ष से उसके पुराने भूमि आवंटनों का हिसाब मांग रही है।

अब इस विवाद में सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि कांग्रेस अपने आरोपों के समर्थन में कौन से दस्तावेज प्रस्तुत करती है और राज्य सरकार उन पर क्या जवाब देती है।

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