Uttarakhand Kedartal Trek Tragedy: केदारताल ट्रैक पर मिले चार शव, चार लोग अब भी लापता बर्फ में दबे साथियों की तलाश जारी
Uttarakhand Kedartal Trek Tragedy: Four bodies found on the Kedartal trek four people remain missing; search continues for those buried in the snow.
Uttarakhand Kedartal Trek Tragedy: उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में केदारताल ट्रैक पर आए हिमस्खलन और भारी बर्फबारी ने एक ट्रेकिंग अभियान को दर्दनाक हादसे में बदल दिया है। लापता आठ लोगों की तलाश के दौरान बुधवार को बचाव दल ने दो और शव बरामद किए। इससे पहले मंगलवार को भी दो शव मिले थे। अब तक कुल चार लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि चार अन्य लोगों की तलाश जारी है।
यह हादसा 29 अक्टूबर को केदारताल से लौट रहे ट्रेकिंग दल के रास्ते में भारी बर्फबारी और हिमस्खलन की चपेट में आने के बाद हुआ था। बचाव अभियान में राज्य आपदा प्रतिवादन बल (SDRF), नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (NIM), उत्तराखंड पुलिस और अन्य एजेंसियों की टीमें जुटी हुई हैं। करीब 4,000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित दुर्गम क्षेत्र में लगातार जमा बर्फ और कठिन मौसम के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
Uttarakhand Kedartal Trek Tragedy: बुधवार को मिले दो और शव
केदारताल क्षेत्र में बुधवार को SDRF और नेहरू पर्वतारोहण संस्थान की संयुक्त टीम ने तलाशी अभियान के दौरान दो और शव बरामद किए। दोनों शव पुरुषों के बताए गए हैं। इससे पहले मंगलवार को भी इसी क्षेत्र में दो लोगों के शव मिले थे।
बुधवार को बरामद शवों को हेलिकॉप्टर के जरिए केदारताल क्षेत्र से उत्तरकाशी के मातली हेलीपैड पहुंचाया गया। वहां से उन्हें जिला अस्पताल ले जाया गया। अधिकारियों के अनुसार, बुधवार को मिले दोनों शवों की पहचान की प्रक्रिया जारी थी।
इससे पहले मंगलवार को बरामद दो शवों की पहचान उत्तर प्रदेश के लखनऊ निवासी दो बहनों के रूप में हुई। उनकी पहचान वर्तिका वर्मा (28) और दीपिका वर्मा (29) के रूप में की गई है। दोनों गायत्रीपुरम, लखनऊ की रहने वाली थीं।
इस प्रकार अब तक चार शव बरामद किए जा चुके हैं और शेष चार लोगों को खोजने के लिए अभियान जारी है।
12 सदस्यीय दल के आठ लोग हुए थे लापता
केदारताल ट्रेक पर गया दल 27 अक्टूबर को गंगोत्री से रवाना हुआ था। वन विभाग से 26 अक्टूबर को अनुमति मिलने के बाद दल को तीन दिन की यात्रा पूरी करके 29 अक्टूबर तक वापस लौटना था।
इस अभियान में कुल 12 लोग शामिल थे। इनमें सात ट्रेकर्स, एक स्थानीय गाइड, एक कुक और तीन पोर्टर थे।
29 अक्टूबर को केदारताल क्षेत्र से लौटते समय दल भारी बर्फबारी और हिमस्खलन की चपेट में आ गया। इसके बाद आठ लोगों से संपर्क टूट गया।
31 अक्टूबर को बचाव दल ने कच्ची ढांग के पास तीन पोर्टर और एक कुक को सुरक्षित बचा लिया था। इन चार लोगों को गंगोत्री वापस लाया गया। वहीं, सात ट्रेकर्स और एक स्थानीय गाइड लापता रहे।
अब तक चार शव मिलने के बाद शेष चार लोगों की तलाश की जा रही है।
Uttarakhand Kedartal Trek Tragedy: 29 अक्टूबर को कई स्थानों पर आया था हिमस्खलन
केदारताल ट्रैक पर मौसम बिगड़ने के बाद कई स्थानों पर हिमस्खलन की घटनाएं हुई थीं। वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, ट्रेकिंग मार्ग पर लगभग 10 से 12 स्थानों पर हिमस्खलन हुआ था।
इससे रास्ते के कई हिस्सों में भारी मात्रा में बर्फ जमा हो गई और आवाजाही बाधित हो गई।
ट्रेकिंग दल के रवाना होने के कुछ घंटे बाद ही अधिकारियों को 29 अक्टूबर को खराब मौसम की आशंका से संबंधित अलर्ट मिला था। गंगोत्री नेशनल पार्क के उप निदेशक मयंक गर्ग के अनुसार, 27 अक्टूबर को सुबह करीब 10:30 से 11 बजे के बीच मौसम संबंधी चेतावनी प्राप्त हुई थी। हालांकि, तब तक दल ट्रेकिंग मार्ग में प्रवेश कर चुका था और उससे संपर्क स्थापित नहीं हो पाया।
30 अक्टूबर को जब दल निर्धारित समय तक वापस नहीं लौटा, तब प्रशासन को उसके हिमस्खलन और भारी बर्फबारी में फंसने की जानकारी मिली।
4,000 मीटर की ऊंचाई पर जारी है रेस्क्यू ऑपरेशन
लापता लोगों की तलाश के लिए SDRF और नेहरू पर्वतारोहण संस्थान की टीमें दुर्गम क्षेत्र में अभियान चला रही हैं।
बचाव दल को करीब 4,000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित केदारखरक और आसपास के हिमस्खलन प्रभावित इलाकों में तलाशी करनी पड़ रही है।
इससे पहले 2 नवंबर को बचाव दल को केदारखरक क्षेत्र के पास टेंट, बैग और ट्रेकिंग से जुड़ा अन्य सामान मिला था। हालांकि, उस समय लापता लोगों का कोई पता नहीं चल पाया था।
मौसम में कुछ सुधार के बाद 3 नवंबर को तलाशी अभियान के दौरान दो शव बरामद हुए। बुधवार को भी अभियान जारी रखा गया और दो अन्य शव मिले।
बचाव दल को इलाके में जमा भारी बर्फ के कारण काफी कठिनाई हो रही है। अधिकारियों के मुताबिक, कुछ स्थानों पर 10 से 12 फीट तक बर्फ जमा है। ऐसे में स्नो रिमूवल मशीनों को प्रभावित क्षेत्र तक पहुंचाना मुश्किल हो रहा है और बचावकर्मियों को हाथों से बर्फ हटाकर तलाशी करनी पड़ रही है।
SDRF और NIM की संयुक्त टीम चला रही अभियान
रेस्क्यू ऑपरेशन में SDRF और नेहरू पर्वतारोहण संस्थान के अलावा NDRF, उत्तराखंड पुलिस, वन विभाग और जिला प्रशासन की टीमें भी सहयोग कर रही हैं।
बुधवार को अभियान में लगी टीम की मदद के लिए SDRF की अतिरिक्त टीम भी भेजी गई। इसके साथ ही बचावकर्मियों के लिए भोजन, जरूरी सामान और अन्य सहायता हेलिकॉप्टर के माध्यम से पहुंचाई जा रही है।
प्रतिकूल मौसम और दुर्गम रास्तों के कारण बचावकर्मियों को भी अपनी सुरक्षा का ध्यान रखते हुए आगे बढ़ना पड़ रहा है।
प्रशासन के अनुसार, अभियान में शामिल सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ काम कर रहे हैं। लापता लोगों के परिजनों को भी रेस्क्यू ऑपरेशन की जानकारी उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है।
लापता लोगों के परिवार उत्तरकाशी पहुंचे
हादसे की जानकारी मिलने के बाद लापता ट्रेकर्स के परिजन उत्तरकाशी पहुंच रहे हैं। उत्तर प्रदेश के लखनऊ से दो बहनों के परिवार के सदस्य भी वहां पहुंचे थे। उनकी पहचान वर्तिका और दीपिका वर्मा के रूप में होने के बाद परिजनों को जानकारी दी गई।
वहीं, पश्चिम बंगाल के बांंकुड़ा जिले के पांच युवकों के लापता होने को लेकर वहां भी चिंता बनी हुई है।
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने सोशल मीडिया पर इन युवकों के लापता होने पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड सरकार और SDRF के संपर्क में है तथा बचाव अभियान की नियमित जानकारी ली जा रही है।
लापता युवकों में रिंटू मंडल, उदय घोष, रतन घोष, तपस बाउरी और मनोज खवास शामिल हैं।
परिजनों ने प्रशासन से तलाशी अभियान की जानकारी समय-समय पर उपलब्ध कराने और सभी संभावित प्रयास जारी रखने की अपील की है।
Kedartal Trek: 4,700 मीटर से अधिक ऊंचाई पर स्थित है झील
केदारताल उत्तरकाशी जिले के गंगोत्री क्षेत्र में स्थित एक हिमनदीय झील है। यह समुद्र तल से लगभग 4,700 मीटर से अधिक ऊंचाई पर स्थित है।
गंगोत्री से केदारताल तक का रास्ता कठिन पर्वतीय भूभाग से होकर गुजरता है। इस मार्ग में संकरे रास्ते, चट्टानी हिस्से, ऊंचाई वाले घास के मैदान और अस्थिर मोरेन क्षेत्र शामिल हैं।
गंगोत्री क्षेत्र में गोमुख ट्रेक की तुलना में केदारताल मार्ग पर अपेक्षाकृत कम ट्रेकर्स जाते हैं। कम आवाजाही के कारण इस मार्ग पर नियमित निगरानी और आवाजाही का स्तर भी अलग रहता है।
ऊंचाई, बदलते मौसम और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण इस ट्रेक पर जाने वाले लोगों के लिए मौसम की जानकारी और सुरक्षा संबंधी निर्देशों का पालन करना बेहद जरूरी है।
4,000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले ट्रेक पर परमिट रोकने का फैसला
लगातार खराब मौसम और बर्फबारी को देखते हुए प्रशासन ने 4,000 मीटर या उससे अधिक ऊंचाई वाले कुछ ट्रेक के लिए नए परमिट जारी करने पर रोक लगाई है।
गंगोत्री नेशनल पार्क और उत्तरकाशी वन प्रभाग की ओर से मौसम की स्थिति अनुकूल होने तक ऐसे ट्रेक पर आवाजाही सीमित रखने का फैसला लिया गया है।
केदारताल के अलावा कालिंदी खाल और अन्य ऊंचाई वाले ट्रेक मार्गों पर भी नए परमिट जारी नहीं किए जा रहे हैं। गोमुख-तपोवन मार्ग पर भी बर्फ जमा होने के कारण आवाजाही पर रोक लगाई गई है।
यह कदम पर्वतीय क्षेत्रों में मौसम की अनिश्चितता और हिमस्खलन के खतरे को देखते हुए उठाया गया है।
चार लोगों की तलाश में जारी है अभियान
केदारताल ट्रेक हादसे में अब तक चार लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं। इनमें लखनऊ की दो बहनें भी शामिल हैं, जिनकी पहचान उनके परिजनों ने की है। बुधवार को मिले दो अन्य शवों की पहचान की प्रक्रिया जारी है।
शेष चार लोगों का अभी कोई पता नहीं चल पाया है। SDRF, NIM और अन्य एजेंसियों की टीमें कठिन मौसम और भारी बर्फबारी के बीच तलाशी अभियान चला रही हैं।
प्रशासन का कहना है कि लापता लोगों की तलाश के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। अब सभी की नजरें इस बात पर हैं कि दुर्गम केदारताल क्षेत्र में जारी रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान बाकी लोगों का पता कब तक चल पाता है।



