गन्ने के रस से एथेनॉल बनाने पर रोक! चीनी की सप्लाई बढ़ाने के लिए सरकार का बड़ा कदम
Ban on producing ethanol from sugarcane juice! A major move by the government to increase sugar supply.
कमजोर मानसून से चीनी उत्पादन पर असर की आशंका
भारत में महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्य गन्ना उत्पादन के प्रमुख केंद्र हैं। कमजोर मानसून और सूखे जैसी परिस्थितियों के कारण इन क्षेत्रों में फसल प्रभावित होने की आशंका है। ऐसे में गन्ने का इस्तेमाल चीनी के साथ-साथ एथेनॉल बनाने में भी होने से घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता पर दबाव पड़ सकता है।
सरकार का उद्देश्य खाद्य जरूरतों और वैकल्पिक ईंधन की मांग के बीच संतुलन बनाए रखना है। चीनी की आपूर्ति प्रभावित होने पर बाजार में कीमतें बढ़ने का खतरा रहता है, इसलिए नीति में बदलाव किया गया है।
तेल कंपनियों ने जारी किया 11 अरब लीटर एथेनॉल का टेंडर
नए निर्देश के बाद इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL), भारत पेट्रोलियम (BPCL), हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL), नुमालीगढ़ रिफाइनरी और मंगलोर रिफाइनरी सहित सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने लगभग 11 अरब लीटर एथेनॉल की मांग के लिए निविदा जारी की है।
इस टेंडर में गन्ने के रस, चीनी और बी-हैवी मोलासेस से बने एथेनॉल को शामिल नहीं किया गया है। इससे एथेनॉल उत्पादकों को दूसरे कच्चे माल पर निर्भरता बढ़ानी होगी।
मक्का और चावल से बनेगा एथेनॉल
नई व्यवस्था के तहत एथेनॉल उत्पादन के लिए मक्का, खराब या अतिरिक्त खाद्यान्न, भारतीय खाद्य निगम (FCI) का अतिरिक्त चावल और सी-हैवी मोलासेस जैसे विकल्पों का इस्तेमाल किया जा सकेगा।
सी-हैवी मोलासेस चीनी उत्पादन के बाद बचने वाला एक उप-उत्पाद है। इन विकल्पों से पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने के कार्यक्रम को जारी रखने के साथ गन्ने और चीनी पर दबाव कम करने की कोशिश की जाएगी।
चीनी मिलों को अतिरिक्त बिक्री की अनुमति
त्योहारी मौसम में बाजार में पर्याप्त चीनी उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने चीनी मिलों को अक्टूबर 2026 में उत्पादित चीनी को निर्धारित मासिक कोटे के अतिरिक्त अक्टूबर और नवंबर में बेचने की विशेष अनुमति भी दी है। इससे बाजार में अतिरिक्त आपूर्ति पहुंचाने में मदद मिल सकती है।
खाद्य सुरक्षा और हरित ऊर्जा के बीच संतुलन
भारत ने पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य 2025 में हासिल किया था। हालांकि, कृषि उत्पादन और मौसम से जुड़ी चुनौतियों के बीच सरकार के सामने ईंधन नीति और खाद्य सुरक्षा दोनों को संतुलित रखने की चुनौती है।
नई नीति से चीनी की उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिलने की उम्मीद है, जबकि एथेनॉल उद्योग को अनाज आधारित उत्पादन की क्षमता बढ़ाने की जरूरत पड़ सकती है। चीनी की कीमतों पर वास्तविक असर आने वाले महीनों में उत्पादन, मांग और बाजार में उपलब्ध आपूर्ति पर निर्भर करेगा।


