Nuclear Submarine Aridaman: नौसेना की बढ़ी ‘त्रिशक्ति’, परमाणु पनडुब्बी INS अरिदमन और युद्धपोत तारागिरी शामिल, चीन-पाक खेमे में खलबली!
Nuclear Submarine Aridaman: Navy's 'Trinity' increased, nuclear submarine INS Aridaman and warship Taragiri included, panic in China-Pakistan camp!
भारतीय नौसेना के इतिहास में आज का दिन स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज होने जा रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह आज विशाखापत्तनम के नेवल डॉकयार्ड में आयोजित एक भव्य समारोह में दो बड़ी समुद्री ताकतों को देश को समर्पित करेंगे। भारत की तीसरी स्वदेशी परमाणु बैलिस्टिक पनडुब्बी (SSBN) INS अरिदमन और अत्याधुनिक युद्धपोत INS तारागिरी के शामिल होने से हिंद महासागर में भारत का दबदबा कई गुना बढ़ जाएगा। INS Aridaman and INS Taragiri Commissioning Vizag 2026 की यह घटना भारत की ‘न्यूक्लियर ट्रायड’ (जल, थल और नभ से परमाणु हमले की क्षमता) को और अधिक मारक और अभेद्य बनाएगी।
‘अरिदमन’, शब्द नहीं, अजेय शक्ति है
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस ऐतिहासिक अवसर से पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर एक गर्वपूर्ण पोस्ट साझा किया। उन्होंने लिखा, “शब्द नहीं शक्ति है, ‘अरिदमन’।” आईएनएस अरिदमन (S4) अरिहंत श्रेणी की तीसरी परमाणु पनडुब्बी है। इसे विशाखापत्तनम स्थित बेहद गोपनीय ‘शिप बिल्डिंग सेंटर’ (SBC) में तैयार किया गया है। निजी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी एलएंडटी (L&T) के सहयोग से निर्मित यह पनडुब्बी पिछले कई महीनों से कड़े समुद्री परीक्षणों (Sea Trials) से गुजर रही थी, जिन्हें इसने सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है।
न्यूक्लियर ट्रायड में भारत की बढ़ती धमक
INS अरिदमन के नौसेना में शामिल होते ही यह भारत की ‘रणनीतिक बल कमान’ (SFC) के तहत अपनी दो सहयोगी पनडुब्बियों आईएनएस अरिहंत (2016 में शामिल) और आईएनएस अरिघात (2024 में शामिल) के साथ जुड़ जाएगी। यह पनडुब्बी लंबी दूरी की परमाणु मिसाइलों (K-15 और K-4) से लैस है, जो दुश्मन के इलाके में गहराई तक मार करने में सक्षम हैं। परमाणु ऊर्जा से चलने के कारण यह हफ्तों तक बिना सतह पर आए समंदर की गहराई में छिपी रह सकती है, जो इसे दुश्मन की रडार से बचाकर रखती है।
समंदर का नया ‘अदृश्य’ शिकारी
आज के समारोह का दूसरा बड़ा आकर्षण ‘प्रोजेक्ट 17ए’ (P17A) के तहत निर्मित चौथा स्टील्थ फ्रिगेट INS तारागिरी है। 6,670 टन वजनी इस युद्धपोत को मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL), मुंबई द्वारा बनाया गया है।
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स्टील्थ तकनीक: तारागिरी की बनावट ऐसी है कि यह दुश्मन के रडार पर बहुत कम दिखाई देता है, जिससे यह ‘साइलेंट किलर’ की भूमिका निभा सकता है।
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75% स्वदेशी: यह पोत भारत के ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान का प्रतीक है, जिसमें 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है।
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अत्याधुनिक हथियार: यह सुपरसोनिक सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइलों और मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों (MRSAM) से लैस है।
क्यों जरूरी है यह कदम?
पूर्वी नौसेना कमान के सूत्रों के अनुसार, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का विशाखापत्तनम का यह दौरा भारत के पूर्वी समुद्री तट की सुरक्षा और रणनीतिक महत्व को रेखांकित करता है। हिंद महासागर में बढ़ती विदेशी गतिविधियों, विशेषकर चीन की पनडुब्बियों की आवाजाही को देखते हुए, INS Aridaman and INS Taragiri Commissioning Vizag 2026 भारत की सुरक्षा के लिए एक ‘गेम चेंजर’ साबित होगा। यह न केवल हमारी युद्धक क्षमता को बढ़ाएगा, बल्कि ‘सेकंड स्ट्राइक’ (परमाणु हमले के बाद जवाबी कार्रवाई) की क्षमता को भी पुख्ता करेगा।


