Census 2027: जनगणना में बाधा डालने वालों पर होगी FIR, उत्तराखंड शासन ने जारी किए सख्त निर्देश
उत्तराखंड में Census 2027 के तहत चल रहे मकान सूचीकरण और हाउस लिस्टिंग ऑपरेशन (HLO) को लेकर शासन ने सख्त रुख अपना लिया है। अब यदि कोई व्यक्ति जनगणना कर्मचारियों को जानकारी देने से इनकार करता है, सरकारी कार्य में बाधा उत्पन्न करता है या कर्मचारियों के साथ अभद्र व्यवहार करता है, तो उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी। जनगणना कार्य निदेशालय, उत्तराखंड ने सभी चार्ज अधिकारियों को इस संबंध में स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए हैं।
राज्य सरकार का कहना है कि Census 2027 केवल आंकड़े जुटाने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों की विकास योजनाओं की आधारशिला है। इसलिए इस राष्ट्रीय अभियान में बाधा डालना गंभीर कानूनी मामला माना जाएगा।
देहरादून समेत कई जिलों से मिली थीं शिकायतें
पिछले कुछ दिनों में देहरादून सहित राज्य के कई हिस्सों से ऐसी शिकायतें सामने आई थीं, जिनमें जनगणना कर्मचारियों को विरोध, असहयोग और अभद्रता का सामना करना पड़ा। कई घरों में लोगों ने दरवाजे तक नहीं खोले, जबकि कुछ स्थानों पर कर्मचारियों को घंटों इंतजार करना पड़ा।
कुछ मामलों में मकानों पर लिखे गए जनगणना नंबर मिटा दिए गए। सबसे चिंताजनक घटनाएं वे रहीं, जहां कर्मचारियों पर पालतू कुत्ते छोड़ दिए गए या उन्हें आवारा कुत्तों ने काट लिया। इन घटनाओं के बाद कर्मचारियों में भय और असुरक्षा की भावना बढ़ गई थी। इसके बाद शासन ने स्थिति को गंभीरता से लेते हुए Census 2027 को प्रभावित करने वालों पर कार्रवाई का निर्णय लिया।
जनगणना अधिनियम 1948 के तहत होगी कार्रवाई
जनगणना निदेशालय द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि जनगणना अधिनियम, 1948 के तहत प्रत्येक नागरिक का कानूनी दायित्व है कि वह सही और पूर्ण जानकारी उपलब्ध कराए। साथ ही सरकारी कार्य में सहयोग करना भी अनिवार्य है।
यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर गलत जानकारी देता है, जानकारी देने से इनकार करता है या सरकारी कार्य में व्यवधान डालता है, तो उसके खिलाफ अधिनियम की धारा 11 के तहत मुकदमा दर्ज किया जा सकता है। Census 2027 के दौरान ऐसे मामलों में स्थानीय पुलिस को भी तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
पहले जागरूकता, फिर कानूनी कार्रवाई
शासन ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए हैं कि कार्रवाई से पहले लोगों को उनके कानूनी दायित्वों और जनगणना के महत्व के बारे में जागरूक किया जाए। यदि समझाने के बाद भी कोई व्यक्ति सहयोग नहीं करता, तभी उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जाए।
प्रशासन का मानना है कि अधिकांश लोग जानकारी के अभाव में विरोध करते हैं। इसलिए पहले संवाद और जागरूकता को प्राथमिकता दी जाएगी। लेकिन Census 2027 में जानबूझकर बाधा डालने वालों के प्रति किसी तरह की ढील नहीं बरती जाएगी।
राष्ट्रीय महत्व का अभियान है Census 2027
भारत में जनगणना देश की सबसे व्यापक प्रशासनिक प्रक्रियाओं में से एक है। इसके माध्यम से जनसंख्या, आवास, शिक्षा, रोजगार, सामाजिक स्थिति और संसाधनों से जुड़े महत्वपूर्ण आंकड़े एकत्र किए जाते हैं।
इन्हीं आंकड़ों के आधार पर सरकारें स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, पेयजल, आवास और सामाजिक कल्याण योजनाओं की रूपरेखा तैयार करती हैं। इसलिए Census 2027 के दौरान एकत्र की जाने वाली जानकारी का सीधा असर भविष्य की सरकारी नीतियों और बजट पर पड़ता है।
गलत जानकारी से प्रभावित होती हैं विकास योजनाएं
विशेषज्ञों के अनुसार यदि जनगणना में गलत या अधूरी जानकारी दर्ज होती है, तो किसी क्षेत्र की वास्तविक जरूरतों का आकलन सही ढंग से नहीं हो पाता। इससे संसाधनों का वितरण प्रभावित होता है और कई क्षेत्रों को अपेक्षित सुविधाएं नहीं मिल पातीं।
यही कारण है कि सरकार Census 2027 को बेहद गंभीरता से ले रही है। प्रशासन का कहना है कि नागरिकों का सहयोग न केवल कानूनी जिम्मेदारी है, बल्कि विकास प्रक्रिया में उनकी भागीदारी भी है।
कर्मचारियों की सुरक्षा पर भी विशेष जोर
जनगणना कार्य में लगे कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन ने संबंधित पुलिस थानों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। यदि किसी कर्मचारी के साथ दुर्व्यवहार, धमकी या हिंसा की घटना होती है, तो तत्काल कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
सरकार का मानना है कि Census 2027 जैसे महत्वपूर्ण अभियान की सफलता तभी संभव है जब फील्ड में काम कर रहे कर्मचारियों को सुरक्षित वातावरण मिले।
जनता से सहयोग की अपील
उत्तराखंड शासन ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे जनगणना कर्मचारियों का सम्मान करें और सही जानकारी उपलब्ध कराएं। प्रशासन ने कहा है कि यह अभियान किसी व्यक्ति विशेष के लिए नहीं, बल्कि पूरे राज्य और देश के विकास के लिए संचालित किया जा रहा है। Census 2027 के सफल संचालन से ही भविष्य की योजनाओं को प्रभावी और वास्तविक जरूरतों के अनुरूप बनाया जा सकेगा।
विकास की नींव है जनगणना
जनगणना केवल संख्या गिनने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि देश के सामाजिक और आर्थिक ढांचे का विस्तृत दस्तावेज है। इसी के आधार पर सरकार यह तय करती है कि किस क्षेत्र को कितनी आवश्यकता है और संसाधनों का वितरण किस प्रकार किया जाए।
इसलिए Census 2027 में बाधा डालना केवल कानून का उल्लंघन नहीं, बल्कि विकास की प्रक्रिया में रुकावट पैदा करना भी है। उत्तराखंड शासन का यह सख्त कदम स्पष्ट संकेत देता है कि राष्ट्रीय महत्व के इस अभियान में किसी भी प्रकार की लापरवाही या असहयोग अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।


