उत्तराखंड

BC Khanduri Death: बीसी खंडूड़ी के निधन से देशभर में शोक, राष्ट्रपति मुर्मू और पीएम मोदी ने दुख जताया!

BC Khanduri Death: Nation Mourns BC Khanduri's Demise; President Murmu and PM Modi Express Grief!

उत्तराखंड की राजनीति में सादगी, अनुशासन और ईमानदारी की मिसाल माने जाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) भुवन चंद्र खंडूड़ी का 91 वर्ष की आयु में निधन हो गया। लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे खंडूड़ी ने देहरादून के मैक्स अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके निधन के साथ ही उत्तराखंड की राजनीति का एक ऐसा अध्याय समाप्त हो गया, जिसे साफ-सुथरे प्रशासन और कठोर कार्यशैली के लिए हमेशा याद किया जाएगा। BC Khanduri Death की खबर मिलते ही पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और पीएम मोदी ने जताया शोक

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भुवन चंद्र खंडूड़ी के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। वहीं प्रधानमंत्री Narendra Modi ने कहा कि मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी का जीवन राष्ट्रसेवा, सुशासन और विकास के लिए समर्पित रहा।

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर लिखा कि सशस्त्र बलों से लेकर राजनीति तक खंडूड़ी जी ने अमूल्य योगदान दिया। मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री के रूप में उनका कार्यकाल प्रेरणादायक रहा। विशेष रूप से देश में सड़क संपर्क सुधारने के लिए उनके प्रयासों को हमेशा याद किया जाएगा।

हरिद्वार में होगा अंतिम संस्कार

भुवन चंद्र खंडूड़ी का पार्थिव शरीर मैक्स अस्पताल से उनके देहरादून स्थित वसंत विहार आवास लाया गया। बुधवार सुबह 10 बजे उनकी अंतिम यात्रा निकलेगी और हरिद्वार में पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

BC Khanduri Death के बाद देहरादून से लेकर पहाड़ के दूरस्थ गांवों तक शोक का माहौल है। राजनीतिक दलों के नेताओं, समर्थकों और आम लोगों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी है।

सेना की वर्दी से राजनीति तक का अनुशासित सफर

1 अक्टूबर 1934 को जन्मे भुवन चंद्र खंडूड़ी ने भारतीय सेना की इंजीनियर्स कोर में लगभग 36 वर्षों तक सेवा दी। उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उन्हें अति विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया गया।

सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया। पूर्व प्रधानमंत्री Atal Bihari Vajpayee के आग्रह पर वे भारतीय जनता पार्टी से जुड़े और जल्द ही राष्ट्रीय राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई।

‘रोडमैन’ के रूप में मिली राष्ट्रीय पहचान

भुवन चंद्र खंडूड़ी केंद्र सरकार में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री रहे। इस दौरान प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना और राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं को गति देने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।

देशभर में सड़क नेटवर्क विस्तार के कारण उन्हें लोग प्यार से ‘रोडमैन’ भी कहते थे। पहाड़ी राज्यों में सड़क संपर्क बेहतर बनाने के लिए उनका योगदान विशेष रूप से सराहा गया। BC Khanduri Death के बाद लोग उन्हें विकास और बुनियादी ढांचे के मजबूत पैरोकार के रूप में याद कर रहे हैं।

उत्तराखंड के सख्त लेकिन ईमानदार मुख्यमंत्री

साल 2007 में भाजपा सरकार बनने के बाद वे उत्तराखंड के मुख्यमंत्री बने। मुख्यमंत्री के रूप में उनकी पहचान एक कठोर, अनुशासित और भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस रखने वाले प्रशासक की रही।

वे समय की पाबंदी और पारदर्शिता पर विशेष जोर देते थे। सरकारी अधिकारियों को स्पष्ट संदेश था कि जनता के काम में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यही कारण था कि आम जनता के बीच उनकी छवि अत्यंत सम्मानजनक रही।

हार के बाद भी नहीं धूमिल हुई प्रतिष्ठा

2012 के विधानसभा चुनाव में वे कोटद्वार सीट से चुनाव हार गए, लेकिन उनकी व्यक्तिगत ईमानदारी और साफ छवि पर कभी प्रश्नचिह्न नहीं लगा। विरोधी दलों के नेता भी उनके प्रशासनिक कौशल और निष्पक्षता की सराहना करते रहे। उत्तराखंड की राजनीति में यह अक्सर कहा जाता था कि यदि और नेता भी खंडूड़ी जैसे होते, तो शासन व्यवस्था की तस्वीर अलग होती।

गणेश गोदियाल ने साझा की पुरानी यादें

Ganesh Godiyal ने भुवन चंद्र खंडूड़ी को याद करते हुए कहा कि उनका निधन प्रदेश और देश के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने एक पुराना प्रसंग साझा करते हुए बताया कि कांग्रेस में होने के बावजूद जब उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्ग का प्रस्ताव रखा, तो खंडूड़ी ने दलगत राजनीति से ऊपर उठकर उसे गंभीरता से लिया।

उनके अनुसार, खंडूड़ी की सोच हमेशा विकास और जनहित केंद्रित रही।

हरीश रावत ने कहा—बहुत बड़ी क्षति

पूर्व मुख्यमंत्री Harish Rawat ने कहा कि खंडूड़ी केवल एक सफल सैनिक और प्रशासक ही नहीं, बल्कि उत्कृष्ट व्यक्तित्व के धनी भी थे। उनका जाना उत्तराखंड के लिए बहुत बड़ी क्षति है।

उत्तराखंड की राजनीति में हमेशा जीवित रहेगा नाम

BC Khanduri Death केवल एक वरिष्ठ नेता का निधन नहीं, बल्कि उत्तराखंड की स्वच्छ और मूल्य आधारित राजनीति के एक युग का अंत है। उन्होंने अपने जीवन से यह साबित किया कि राजनीति में सादगी, अनुशासन और ईमानदारी के साथ भी जनसेवा की जा सकती है। आज जब पूरा उत्तराखंड उन्हें अंतिम विदाई की तैयारी कर रहा है, तब हर आंख नम है और हर जुबान पर यही शब्द हैं—ऐसे नेता विरले ही जन्म लेते हैं।

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