हरीश रावत के ‘ब्राह्मण नेतृत्व’ बयान से मचा सियासी बवाल, कांग्रेस और भाजपा दोनों में बढ़ी हलचल
Harish Rawat's 'Brahmin leadership' statement has sparked a political controversy, causing a stir in both the Congress and BJP parties.
देहरादून: उत्तराखंड की राजनीति इन दिनों पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत के एक बयान को लेकर गरमाई हुई है। हाल ही में हरीश रावत ने कहा था कि अब उत्तराखंड में नेतृत्व ब्राह्मणों के हाथों में दिया जाना चाहिए। उनके इस बयान ने राज्य के सियासी गलियारों में नए समीकरणों और अटकलों को जन्म दे दिया है।
बयान से उठे कई सियासी सवाल
हरीश रावत के इस बयान को लेकर कई तरह की व्याख्याएं की जा रही हैं। भाजपा के नेताओं ने इस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि रावत का यह बयान जातिवाद को बढ़ावा देता है। वहीं कांग्रेस खेमे में भी यह चर्चा जोरों पर है कि रावत का यह संकेत गणेश गोदियाल की ओर है, जिन्हें वह उत्तराखंड कांग्रेस की कमान सौंपना चाहते हैं।
भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने हरीश रावत से इस बयान की स्पष्टता मांगते हुए कहा कि उन्हें बताना चाहिए कि आखिर ब्राह्मण नेतृत्व की बात कहने के पीछे उनकी मंशा क्या है।
कार्यक्रम में हुई हंसी-ठिठोली, फिर उठे सवाल
राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित एक सामाजिक कार्यक्रम के दौरान हरीश रावत और भाजपा नेता विनोद चमोली एक ही मंच पर मौजूद थे। इस दौरान हरीश रावत ने कहा कि वे चमोली को हमेशा से योग्य और सक्षम नेता मानते हैं, जिन्हें भाजपा में नज़रअंदाज किया जा रहा है।
इस पर भाजपा से कांग्रेस में गए किशोर उपाध्याय ने बीच में टोका कि रावत भाजपा में फूट डालने की कोशिश कर रहे हैं। जिस पर रावत ने मुस्कराते हुए कहा कि वे उपाध्याय को भी बहुत योग्य मानते हैं। कार्यक्रम का माहौल कुछ देर के लिए हल्का-फुल्का रहा, लेकिन इसके बाद मीडिया में उनके बयान ने राजनीतिक बहस को जन्म दे दिया।
हरीश रावत ने दिया सफाई भरा बयान
बयान पर बढ़ते विवाद के बाद हरीश रावत ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को आगे करना नहीं था। उन्होंने कहा, “ब्राह्मण कांग्रेस और हरीश रावत सनातन से निकले हैं। ब्राह्मण उदार और सहिष्णु होते हैं, इसलिए मैंने कहा कि उन्हें नेतृत्व दिया जाना चाहिए।”
रावत ने आगे कहा कि यह सैद्धांतिक विषय है कि क्या कांग्रेस को छोड़ने से ब्राह्मण कमजोर हुआ या ब्राह्मणों के जाने से कांग्रेस कमजोर हुई।
जातीय और धार्मिक परिदृश्य पर एक नज़र
उत्तराखंड में जनगणना 2011 के अनुसार, ब्राह्मणों की आबादी लगभग 27% और ठाकुर समुदाय की 35% है। राज्य में हिंदू जनसंख्या 82.97%, मुस्लिम 13.95% और अन्य धर्मों के लोग लगभग 3% हैं।
इन आंकड़ों के बीच, हरीश रावत का यह बयान राज्य की जातीय राजनीति को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ले आया है।
हरीश रावत के इस बयान ने न केवल कांग्रेस के भीतर, बल्कि भाजपा खेमे में भी नई राजनीतिक हलचल पैदा कर दी है। जहां एक ओर इसे ब्राह्मण वोट बैंक को साधने की कोशिश बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इसे रावत की राजनीतिक रणनीति के रूप में देखा जा रहा है — जो आने वाले विधानसभा चुनावों की दिशा तय कर सकती है।



