भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते में ऊर्जा क्षेत्र पर खास फोकस
Energy sector is the main focus of the India-US interim trade agreement
मुंबई: केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शनिवार को कहा कि भारत और United States के बीच हुए अंतरिम व्यापार समझौते में भारत की ऊर्जा जरूरतों को प्राथमिकता दी गई है। इस समझौते के तहत कच्चा तेल, एलएनजी और एलपीजी जैसी ऊर्जा वस्तुओं की आपूर्ति अधिक प्रतिस्पर्धी दरों पर सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है। सरकार का मानना है कि इससे देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और उद्योगों को स्थिर आपूर्ति मिल सकेगी।
2030 तक 500 अरब डॉलर व्यापार का महत्वाकांक्षी लक्ष्य
मंत्री ने बताया कि दोनों देशों ने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 500 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए ऊर्जा, विनिर्माण और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाया जाएगा। भारत की ऊर्जा मांग हर साल लगभग 7 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है, ऐसे में अधिक आपूर्तिकर्ताओं के जुड़ने से बेहतर कीमत और स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित होगी।
टैरिफ कटौती से खुलेगा व्यापार का रास्ता
हाल ही में दोनों देशों ने अंतरिम समझौते की रूपरेखा पर सहमति जताई है। इसके तहत अमेरिका भारतीय वस्तुओं पर लागू टैरिफ को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करेगा। वहीं भारत अमेरिकी औद्योगिक उत्पादों, कृषि और खाद्य वस्तुओं पर आयात शुल्क कम या समाप्त करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से दोनों देशों के बीच व्यापारिक गतिविधियों में तेजी आएगी और निवेश के अवसर बढ़ेंगे।
इस्पात उत्पादन दोगुना करने की तैयारी
पीयूष गोयल ने कहा कि भारत वर्तमान में लगभग 140 मिलियन टन इस्पात का उत्पादन करता है, जिसे आने वाले वर्षों में दोगुना करने की योजना है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए कोकिंग कोल की मांग भी तेजी से बढ़ेगी। अभी भारत इस क्षेत्र में सीमित देशों पर निर्भर है और आयात पर भारी खर्च करता है। यदि आपूर्ति के स्रोत बढ़ते हैं तो लागत में कमी और आपूर्ति सुरक्षा दोनों सुनिश्चित की जा सकती हैं।
आईटी और डेटा सेंटर क्षेत्र को मिलेगा नया प्रोत्साहन
मंत्री ने बताया कि अमेरिका के पास इंफ्रास्ट्रक्चर, कनेक्टिविटी और उन्नत तकनीकी उपकरणों में विशेष दक्षता है। भारत इन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाकर डेटा सेंटर और डिजिटल सेवाओं का विस्तार करना चाहता है। फिलहाल भारत का आईटी निर्यात करीब 200 अरब डॉलर है और उन्नत उपकरणों की उपलब्धता से इसमें उल्लेखनीय वृद्धि संभव है।
ऊर्जा सुरक्षा से अर्थव्यवस्था को मजबूती
केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह समझौता केवल व्यापार बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य भारत की ऊर्जा सुरक्षा को दीर्घकालिक आधार पर मजबूत करना भी है। विविध आपूर्ति स्रोतों और प्रतिस्पर्धी कीमतों से उद्योगों की लागत कम होगी, जिससे समग्र अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी।


