उत्तराखंड के पौड़ी जनपद स्थित कोटद्वार में नशे के कारोबार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। Kotdwar Charas Smuggling मामले में कोतवाली पुलिस ने डेढ़ किलोग्राम चरस के साथ दो युवकों को गिरफ्तार किया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी यह खेप उत्तर प्रदेश के नजीबाबाद से लेकर आए थे और इसे कोटद्वार में फैक्ट्रियों में काम करने वाले मजदूरों, स्कूल-कॉलेज के छात्रों तथा स्थानीय युवाओं को बेचने की योजना बना रहे थे।
पुलिस अब इस पूरे Kotdwar Charas Smuggling नेटवर्क की तह तक पहुंचने के लिए सप्लाई चेन और अन्य संभावित आरोपियों की तलाश में जुट गई है।
मालन नदी क्षेत्र में गश्त के दौरान हुई गिरफ्तारी
पुलिस उप निरीक्षक राजाराम डोभाल के नेतृत्व में पुलिस टीम नियमित गश्त पर थी। इसी दौरान मालन नदी क्षेत्र में दो युवक संदिग्ध परिस्थितियों में घूमते दिखाई दिए। पुलिस को उनकी गतिविधियां संदिग्ध लगीं, जिसके बाद दोनों को रोककर पूछताछ की गई।
तलाशी लेने पर उनके पास से लगभग 1.5 किलोग्राम चरस बरामद हुई। इतनी बड़ी मात्रा में नशीला पदार्थ मिलने के बाद पुलिस ने दोनों को मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया। इस कार्रवाई के बाद Kotdwar Charas Smuggling का मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान
कोतवाली प्रभारी प्रदीप नेगी के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों की पहचान शहनवाज उर्फ शानू और मोहम्मद फईम के रूप में हुई है। दोनों फिलहाल कोटद्वार क्षेत्र में रहकर फल और मछली बेचने का काम करते थे।
पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे लंबे समय से चरस का सेवन करते थे और इसी आदत ने उन्हें नशे के कारोबार की ओर धकेल दिया। अधिकारियों के अनुसार Kotdwar Charas Smuggling के इस मामले में कई और लोगों की भूमिका सामने आ सकती है।
नजीबाबाद मंडी से जुड़ा तस्करी का सुराग
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि लगभग दो महीने पहले वे फल और मछली खरीदने के लिए नजीबाबाद मंडी गए थे। वहीं उनकी मुलाकात एक नेपाली व्यक्ति से हुई, जिसने उन्हें चरस पीने के लिए दी।
इसके बाद दोनों ने उसी व्यक्ति से लगातार संपर्क बनाए रखा और इस बार उससे बड़ी मात्रा में चरस लेकर कोटद्वार पहुंचे। पुलिस को संदेह है कि यह व्यक्ति किसी बड़े अंतरराज्यीय नेटवर्क से जुड़ा हो सकता है। इस दिशा में जांच तेज कर दी गई है। Kotdwar Charas Smuggling की यह कड़ी पुलिस के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
मजदूरों और छात्रों को निशाना बनाने की योजना
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि आरोपियों ने पूछताछ में स्वीकार किया कि वे चरस को कोटद्वार क्षेत्र के औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले मजदूरों, स्कूल-कॉलेज के छात्रों और युवाओं को बेचने वाले थे।
विशेषज्ञों का मानना है कि नशा तस्कर अक्सर ऐसे वर्गों को निशाना बनाते हैं, जहां तेजी से ग्राहक तैयार किए जा सकते हैं। Kotdwar Charas Smuggling का यह खुलासा सामाजिक दृष्टि से बेहद गंभीर माना जा रहा है, क्योंकि इसका सीधा असर युवाओं के भविष्य पर पड़ सकता है।
पुलिस ने तेज की नेटवर्क की जांच
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। अब मोबाइल कॉल रिकॉर्ड, संपर्क सूत्रों और आर्थिक लेनदेन की जांच की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि दोनों कितने समय से इस धंधे में सक्रिय थे और उनके साथ और कौन-कौन लोग जुड़े हुए हैं।
कोटद्वार पुलिस का कहना है कि Kotdwar Charas Smuggling से जुड़े हर व्यक्ति को कानून के दायरे में लाया जाएगा और किसी भी स्तर पर ढिलाई नहीं बरती जाएगी।
नशे के खिलाफ लगातार अभियान
उत्तराखंड पुलिस पिछले कुछ समय से नशे के खिलाफ व्यापक अभियान चला रही है। राज्य सरकार भी युवाओं को नशे से बचाने के लिए जनजागरूकता और सख्त कानूनी कार्रवाई पर जोर दे रही है।
कोटद्वार में हुई यह गिरफ्तारी दर्शाती है कि पुलिस केवल छोटे मामलों तक सीमित नहीं है, बल्कि संगठित तस्करी नेटवर्क को तोड़ने के लिए लगातार सक्रिय है। Kotdwar Charas Smuggling का यह मामला आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे कर सकता है।
युवाओं को बचाने की बड़ी चुनौती
स्कूल-कॉलेज के छात्रों तक नशे की पहुंच समाज के लिए गंभीर चेतावनी है। यदि समय रहते ऐसे नेटवर्क पर रोक नहीं लगाई गई, तो इसका असर आने वाली पीढ़ियों पर पड़ सकता है। कोटद्वार पुलिस की इस कार्रवाई ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि नशे के खिलाफ सतर्कता और सामूहिक प्रयास बेहद जरूरी हैं। Kotdwar Charas Smuggling के खुलासे ने समाज, प्रशासन और अभिभावकों सभी को सचेत कर दिया है।


