अमेरिका–भारत अंतरिम ट्रेड डील का ढांचा सार्वजनिक, आर्थिक रिश्तों को मिली नई रफ्तार
US-India interim trade deal framework gives new impetus to public, economic relations
नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक सहयोग को नई ऊंचाई देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने दोनों देशों के बीच प्रस्तावित अंतरिम ट्रेड डील का फ्रेमवर्क जारी कर दिया है। यह ढांचा फरवरी 2025 में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच शुरू हुई व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौता (BTA) वार्ता की अगली कड़ी माना जा रहा है। इसका मकसद दोनों देशों के बीच व्यापार को संतुलित और दीर्घकालिक आधार देना है।
आर्थिक साझेदारी में अहम मोड़
संयुक्त बयान में इस अंतरिम समझौते को भारत–अमेरिका आर्थिक संबंधों के लिए एक अहम उपलब्धि बताया गया है। दोनों देशों ने इसे पारस्परिक लाभ पर आधारित और परिणामोन्मुखी करार दिया है। फ्रेमवर्क में यह स्पष्ट किया गया है कि समझौते का उद्देश्य केवल व्यापार बढ़ाना नहीं, बल्कि निवेश, रोजगार और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने वाला स्थायी ढांचा तैयार करना है।
अमेरिकी उत्पादों को भारतीय बाजार में राहत
फ्रेमवर्क के तहत भारत ने अमेरिकी औद्योगिक और कृषि उत्पादों पर टैरिफ घटाने या समाप्त करने पर सहमति जताई है। इसमें पशु आहार, सूखे अनाज, ट्री नट्स, फल, सोयाबीन तेल, वाइन और अन्य प्रोसेस्ड फूड आइटम शामिल हैं। इस कदम से अमेरिकी किसानों और निर्यातकों को भारत जैसे बड़े बाजार में बेहतर अवसर मिलने की उम्मीद है।
भारतीय निर्यात पर अमेरिकी टैरिफ का प्रावधान
इसके बदले अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर 18 प्रतिशत तक टैरिफ लागू करने की शर्त रखी है। इन टैरिफ का असर टेक्सटाइल, परिधान, चमड़ा, फुटवियर, प्लास्टिक, रबर उत्पाद, केमिकल्स, हस्तशिल्प और कुछ मशीनरी सेक्टर पर पड़ सकता है। हालांकि, दोनों देशों ने इसे अस्थायी व्यवस्था बताते हुए भविष्य में इसमें बदलाव के संकेत दिए हैं।
सफलता पर मिल सकती है बड़ी राहत
फ्रेमवर्क में यह भी कहा गया है कि अगर अंतरिम समझौता अपेक्षित परिणाम देता है, तो अमेरिका कई प्रमुख भारतीय निर्यात उत्पादों पर लगाए गए शुल्क हटाने पर विचार करेगा। इनमें जेनेरिक दवाएं, रत्न एवं आभूषण, विमान और उनके पुर्जे शामिल हैं। इसके अलावा स्टील, एल्यूमीनियम और तांबे से जुड़े कुछ सुरक्षा टैरिफ में भी ढील की संभावना जताई गई है।
नॉन-टैरिफ बाधाओं को हटाने पर जोर
दोनों देशों ने माना है कि व्यापार में केवल टैरिफ ही नहीं, बल्कि नॉन-टैरिफ बाधाएं भी बड़ी चुनौती हैं। भारत ने अमेरिकी मेडिकल डिवाइस, आईसीटी उत्पाद और कृषि वस्तुओं से जुड़ी अड़चनों को दूर करने का भरोसा दिया है। वहीं अमेरिका ने मानकों और परीक्षण प्रक्रियाओं में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है।
तकनीक और डिजिटल ट्रेड पर फोकस
फ्रेमवर्क में तकनीकी सहयोग और डिजिटल व्यापार को भी खास महत्व दिया गया है। दोनों देश डेटा सेंटर, जीपीयू जैसे हाई-टेक उत्पादों के व्यापार को बढ़ावा देने और डिजिटल नियमों को सरल बनाने की दिशा में काम करेंगे।
500 अरब डॉलर की संभावित खरीद और भविष्य की दिशा
भारत ने अगले पांच वर्षों में अमेरिका से ऊर्जा, विमान, टेक्नोलॉजी और कच्चे माल समेत लगभग 500 अरब डॉलर की खरीद की मंशा जाहिर की है। दोनों देशों ने इस फ्रेमवर्क को तेजी से लागू कर एक व्यापक और दीर्घकालिक व्यापार समझौते की ओर बढ़ने की प्रतिबद्धता दोहराई है।



