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एक PG हादसा और अब पूरे दिल्ली के PG पर संकट! सुप्रीम कोर्ट में 2 बजे हो सकती है बड़ी सुनवाई

Satya Niketan PG building collapse case has reached the Supreme Court after seven deaths. A safety audit and inspection of PGs and private hostels

Satya Niketan PG Building Collapse: दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में PG इमारत गिरने से हुई सात लोगों की मौत के बाद मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। Satya Niketan PG Building Collapse को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त एमिकस क्यूरी और वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर हादसे और राजधानी में छात्रों के लिए चल रहे PG एवं निजी हॉस्टलों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता जताई है।

रिपोर्ट में दिल्ली के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के आसपास संचालित सभी PG हॉस्टलों और निजी छात्र आवासों का तत्काल और समयबद्ध सुरक्षा ऑडिट कराने की सिफारिश की गई है। मामले पर सुप्रीम कोर्ट में दोपहर 2 बजे सुनवाई हो सकती है। एमिकस क्यूरी की ओर से अदालत से इस विषय पर जल्द सुनवाई करने की मांग की जा सकती है।

Satya Niketan PG Building Collapse के बाद यह सवाल भी तेज हो गया है कि दिल्ली में बड़ी संख्या में छात्रों और नौकरीपेशा युवाओं को रहने की सुविधा देने वाली इमारतों की संरचनात्मक सुरक्षा की नियमित जांच आखिर कितनी प्रभावी है।

सुप्रीम कोर्ट के एमिकस क्यूरी ने दाखिल की स्टेटस रिपोर्ट

सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त एमिकस क्यूरी और वरिष्ठ अधिवक्ता अजीत कुमार सिन्हा ने अदालत के समक्ष स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर सत्य निकेतन हादसे की जानकारी दी है। रिपोर्ट में इस बात पर विशेष जोर दिया गया है कि छात्रों के रहने वाली इमारतों की सुरक्षा को केवल एक सामान्य प्रशासनिक विषय मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

रिपोर्ट में अप्रैल 2022 में सत्य निकेतन क्षेत्र में हुई एक अन्य इमारत गिरने की घटना का भी उल्लेख किया गया है। उस हादसे में दो लोगों की मौत हुई थी और चार लोग घायल हुए थे। एक ही इलाके में कुछ वर्षों के अंतराल पर दो गंभीर इमारत हादसे सामने आने के बाद भवन सुरक्षा और निरीक्षण व्यवस्था पर नए सवाल खड़े हो गए हैं।

एमिकस क्यूरी ने सिफारिश की है कि दिल्ली के कॉलेज और विश्वविद्यालय क्षेत्रों के आसपास चल रहे PG, निजी हॉस्टल और छात्रों के लिए बनाए गए आवासीय परिसरों का व्यापक सुरक्षा ऑडिट किया जाए।

‘Hostel Daze’ नाम से चल रहा था बॉयज PG

स्टेटस रिपोर्ट के अनुसार, 6 सितंबर को दोपहर करीब 1:30 बजे सत्य निकेतन के P-14 इलाके में एक इमारत ढह गई थी। इमारत में बेसमेंट के अलावा चार मंजिलें थीं और इसका इस्तेमाल छात्रों के लिए ‘Hostel Daze’ नाम से बॉयज PG के रूप में किया जा रहा था।

हादसे के बाद राहत और बचाव अभियान चलाया गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस घटना में सात लोगों की मौत हुई, जबकि कम से कम 12 लोगों को बचाया गया। कई लोगों के घायल होने की भी जानकारी सामने आई।

Satya Niketan PG Building Collapse ने विशेष रूप से उन परिवारों की चिंता बढ़ा दी है, जिनके बच्चे दिल्ली में पढ़ाई के लिए दूसरे शहरों से आकर PG और हॉस्टलों में रहते हैं। राजधानी के कई प्रमुख विश्वविद्यालयों के आसपास बड़ी संख्या में निजी PG संचालित होते हैं।

दिल्ली यूनिवर्सिटी साउथ कैंपस के पास बड़ा छात्र आवास केंद्र

सत्य निकेतन दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के नजदीक स्थित है। यह इलाका लंबे समय से छात्रों के लिए एक प्रमुख आवासीय केंद्र के रूप में विकसित हुआ है। यहां बड़ी संख्या में PG, निजी हॉस्टल, मेस, रेस्तरां, खाने-पीने की दुकानें और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान संचालित होते हैं।

किराए और PG सुविधाओं की उपलब्धता के कारण देश के अलग-अलग राज्यों से आने वाले छात्र इस इलाके में रहते हैं। बड़ी छात्र आबादी होने के कारण यहां भवनों का सुरक्षित होना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

Satya Niketan PG Building Collapse के बाद यह मुद्दा सिर्फ एक इमारत तक सीमित नहीं रहा है। अब सवाल उन सभी भवनों की सुरक्षा का है, जहां बड़ी संख्या में छात्र रोजाना रहते हैं और जिनमें से कई इमारतों का इस्तेमाल मूल निर्माण उद्देश्य से अलग तरीके से किया जा रहा हो सकता है।

2022 में भी हुई थी इमारत गिरने की घटना

रिपोर्ट में अप्रैल 2022 की घटना का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि सत्य निकेतन में पहले भी एक इमारत गिरने से दो लोगों की मौत हो चुकी थी। उस घटना में चार लोग घायल हुए थे।

अब 2026 में दोबारा गंभीर हादसा होने के बाद भवनों की नियमित जांच को लेकर सवाल और गहरे हो गए हैं। रिपोर्ट में चिंता जताई गई है कि क्या खतरनाक इमारतों की पहचान समय रहते की जा रही है और क्या भवन नियमों का पालन सुनिश्चित करने वाली व्यवस्था प्रभावी ढंग से काम कर रही है।

ऐसे हादसों के बाद केवल राहत और बचाव अभियान चलाना पर्याप्त नहीं माना जा सकता। जरूरत इस बात की भी है कि संभावित रूप से कमजोर या असुरक्षित इमारतों की पहचान हादसा होने से पहले की जाए।

सभी PG और निजी हॉस्टलों के समयबद्ध सेफ्टी ऑडिट की मांग

एमिकस क्यूरी की रिपोर्ट में दिल्ली के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के आसपास स्थित सभी PG और निजी हॉस्टलों की एक तय समय सीमा के भीतर सुरक्षा जांच कराने की जरूरत बताई गई है।

इस जांच के दौरान भवन के नक्शे और स्वीकृत निर्माण की स्थिति की समीक्षा करने की सिफारिश की गई है। इसके अलावा यह भी देखा जाना चाहिए कि इमारत का निर्माण किस उद्देश्य से किया गया था और वर्तमान में उसका उपयोग किस तरह किया जा रहा है।

Satya Niketan PG Building Collapse के बाद प्रस्तावित सुरक्षा जांच में बेसमेंट के इस्तेमाल, जमीन के उपयोग, भवन की संरचनात्मक मजबूती और इमारत की उम्र जैसे पहलुओं की भी समीक्षा अहम हो सकती है।

आग से सुरक्षा और आपातकालीन निकास की भी जांच जरूरी

रिपोर्ट में भवन की मजबूती के साथ-साथ आग से सुरक्षा व्यवस्था और आपात स्थिति में बाहर निकलने के रास्तों की जांच की जरूरत पर भी जोर दिया गया है।

PG और हॉस्टलों में अक्सर बड़ी संख्या में लोग एक साथ रहते हैं। ऐसे में आग, इमारत गिरने या किसी अन्य आपात स्थिति में सुरक्षित निकास व्यवस्था होना बेहद जरूरी है।

सेफ्टी ऑडिट के दौरान फायर सेफ्टी उपकरण, सीढ़ियों की स्थिति, आपातकालीन निकास, प्रवेश और निकास मार्ग तथा बेसमेंट के उपयोग की जांच महत्वपूर्ण हो सकती है।

विशेषज्ञों की ओर से अक्सर यह भी कहा जाता रहा है कि घनी आबादी वाले छात्र क्षेत्रों में भवनों का व्यावसायिक और आवासीय उपयोग बदलने पर सुरक्षा मानकों की समीक्षा आवश्यक हो जाती है।

सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी नजर

अब Satya Niketan PG Building Collapse मामले में सभी की नजर सुप्रीम कोर्ट की संभावित सुनवाई पर है। अदालत में दाखिल स्टेटस रिपोर्ट और एमिकस क्यूरी की सिफारिशों के बाद यह मामला दिल्ली के सभी छात्र आवासों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर व्यापक स्तर पर चर्चा का विषय बन सकता है।

यदि अदालत सुरक्षा ऑडिट और निरीक्षण को लेकर कोई निर्देश जारी करती है, तो इसका असर राजधानी के विश्वविद्यालय क्षेत्रों में संचालित बड़ी संख्या में PG और निजी हॉस्टलों पर पड़ सकता है।

सत्य निकेतन हादसे में सात लोगों की मौत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि छात्रों और युवाओं के लिए उपलब्ध रहने की जगहों में केवल किराया और सुविधाएं ही नहीं, बल्कि भवन की संरचनात्मक सुरक्षा भी सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए।

भवन सुरक्षा व्यवस्था की होगी बड़ी परीक्षा

सत्य निकेतन की घटना के बाद प्रशासन, नगर निकाय और भवन मालिकों की जिम्मेदारी पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। 2022 की घटना के बाद 2026 में दोबारा बड़ा हादसा सामने आने से यह मांग मजबूत हुई है कि खतरनाक और कमजोर इमारतों की पहचान के लिए नियमित निरीक्षण व्यवस्था को प्रभावी बनाया जाए।

Satya Niketan PG Building Collapse अब केवल एक स्थानीय हादसा नहीं रह गया है। सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचने के बाद यह मामला दिल्ली में छात्रों के PG और निजी हॉस्टलों की सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा का कारण बन सकता है।

अदालत की संभावित सुनवाई और आने वाले निर्देश इस बात के लिए महत्वपूर्ण होंगे कि दिल्ली में छात्र आवासों की सुरक्षा जांच किस स्तर पर और कितनी तेजी से की जाती है। फिलहाल सात लोगों की मौत के बाद उठे सवालों का जवाब जांच और कानूनी प्रक्रिया से मिलना बाकी है, लेकिन एक बात स्पष्ट है कि भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए भवन सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना अब सबसे बड़ी जरूरत बन गया है।

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