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बाबा महाकाल की राजसी महासवारी में पहली बार गूंजा ‘कैलाश वाद्यम’, सवारी मार्ग बना भव्य आस्था कॉरिडोर

'Kailash Vadyam' echoed for the first time in Baba Mahakal's royal Mahasawari, the ride route became a grand faith corridor

Mahakal Royal Sawari 2026: भगवान महाकाल की नगरी उज्जैन में सोमवार को भाद्रपद मास की प्रमुख राजसी महासवारी ने धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक भव्यता का ऐसा संगम दिखाया, जिसने पूरे शहर को शिवमय कर दिया। ‘जय श्री महाकाल’ के जयघोष के बीच निकली बाबा महाकाल की सवारी में इस बार कई ऐसी विशेषताएं देखने को मिलीं, जो इसे पहले के आयोजनों से अलग बनाती रहीं। पहली बार ईशा फाउंडेशन का ‘कैलाश वाद्यम’ सवारी का हिस्सा बना, जबकि विशाल रंगोली, लाइव पेंटिंग, बैंड, ड्रोन से पुष्पवर्षा और आकर्षक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने पूरे मार्ग को एक भव्य आस्था कॉरिडोर में बदल दिया।

सवारी में बाबा महाकाल ने छह अलग-अलग स्वरूपों में भक्तों को दर्शन दिए। लाखों श्रद्धालु घंटों इंतजार करते रहे और जब बाबा का रथ सवारी मार्ग से निकला तो पूरा वातावरण ‘हर-हर महादेव’ और ‘जय श्री महाकाल’ के उद्घोष से गूंज उठा। इस ऐतिहासिक अवसर पर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया समेत कई मंत्री, पूर्व मुख्यमंत्री, साधु-संत और जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे।

पहली बार राजसी सवारी में गूंजा ‘कैलाश वाद्यम’

Mahakal Royal Sawari 2026 की सबसे खास बातों में ईशा फाउंडेशन के ‘कैलाश वाद्यम’ की प्रस्तुति रही। पहली बार बाबा महाकाल की इस राजसी सवारी में इसकी गूंज सुनाई दी। पारंपरिक वाद्ययंत्रों और भव्य संगीत प्रस्तुति ने धार्मिक माहौल को और प्रभावशाली बना दिया।

सिंहस्थ महाकुंभ की थीम पर सजी इस महासवारी में धार्मिक परंपराओं के साथ आधुनिक तकनीक और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का भी मेल देखने को मिला। आयोजकों के अनुसार, सवारी को ऐसा स्वरूप देने की कोशिश की गई, जिससे स्थानीय संस्कृति के साथ उज्जैन की धार्मिक पहचान भी देश-दुनिया के सामने और मजबूत तरीके से सामने आए।

एक लाख वर्गफीट से ज्यादा की विशाल रंगोली

सवारी मार्ग पर एक लाख वर्गफीट से अधिक क्षेत्र में विशाल रंगोली बनाई गई। यह अपने आप में लोगों के आकर्षण का बड़ा केंद्र रही। रंगोली के जरिए धार्मिक और सांस्कृतिक विषयों को बेहद भव्य रूप में प्रस्तुत किया गया।

इसके साथ लाइव चित्रकला का भी आयोजन हुआ। कलाकारों ने मौके पर ही अपनी कला के जरिए अलग-अलग दृश्य उकेरे, जिसे देखने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी रही। सवारी मार्ग को केवल दर्शन का रास्ता नहीं, बल्कि कला, संस्कृति और भक्ति के संगम के रूप में सजाया गया था।

पांच बैंड समूहों ने बढ़ाई शोभा

राजसी महासवारी में पांच बैंड समूहों ने हिस्सा लिया। प्रत्येक दल में 250 से अधिक सदस्य शामिल बताए गए। बैंड की धुनों के बीच ढोल, डमरू और पारंपरिक वाद्यों की आवाज ने पूरे वातावरण में अलग ही ऊर्जा भर दी।

सवारी मार्ग पर युवा दलों की ओर से विशेष सांस्कृतिक और युवा-केंद्रित प्रस्तुतियां भी दी गईं। इन कार्यक्रमों ने युवाओं को धार्मिक आयोजन से जोड़ने के साथ-साथ स्थानीय संस्कृति और परंपराओं को मंच भी दिया।

15 ड्रोन से हुई पुष्पवर्षा

इस बार सवारी में तकनीक का भी खास इस्तेमाल किया गया। सवारी मार्ग पर 15 ड्रोन के जरिए पुष्पवर्षा की गई। जैसे ही बाबा महाकाल की सवारी आगे बढ़ती, ऊपर से फूलों की बारिश होती और श्रद्धालु भाव-विभोर नजर आते।

इसके अलावा लाइव ऑडियो-विजुअल प्रस्तुति के माध्यम से सावन मास से जुड़े चलचित्र और डॉक्यूमेंट्री भी प्रदर्शित की गईं। इससे सवारी देखने आए लोगों को धार्मिक उत्सव के साथ दृश्यात्मक अनुभव भी मिला।

पुलिस जवानों ने दिया गॉड ऑफ ऑनर

भगवान महाकाल की सवारी की शुरुआत भी परंपरागत और विशेष धार्मिक विधियों के साथ हुई। मंदिर के सभामंडप में दोपहर 3 से 4 बजे तक शासकीय पुजारियों द्वारा पूजन और आरती की गई। शाम करीब 4 बजे जब बाबा महाकाल मुख्य द्वार पर पहुंचे तो पुलिस जवानों ने उन्हें गॉड ऑफ ऑनर दिया।

इसके बाद घुड़सवार दल, तोप और परेड करते जवान आगे बढ़े। यह दृश्य श्रद्धालुओं के लिए बेहद विशेष रहा। सुरक्षा और धार्मिक गरिमा के बीच यह सलामी समारोह सवारी की परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा नजर आया।

छह स्वरूपों में भक्तों को मिले बाबा के दर्शन

भाद्रपद मास की इस प्रमुख राजसी महासवारी में बाबा महाकाल के छह स्वरूपों के दर्शन भक्तों को प्राप्त हुए। अलग-अलग स्वरूपों के दर्शन के लिए सवारी मार्ग के दोनों ओर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जमा रही।

कई भक्त घंटों पहले ही सड़क किनारे पहुंच गए थे। हाथों में फूल-मालाएं लेकर लोग बाबा के स्वागत के लिए खड़े दिखाई दिए। जैसे ही सवारी उनके सामने से गुजरी, लोगों ने पुष्प अर्पित किए और भगवान का आशीर्वाद लेने के लिए जयकारे लगाए।

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया समेत कई दिग्गज पहुंचे

बाबा महाकाल की Mahakal Royal Sawari 2026 में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया भी शामिल हुए और महाकाल के दर्शन किए। उनके अलावा मध्य प्रदेश के मंत्री गौतम टेटवाल, प्रहलाद पटेल, पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती, दादागुरु और कई अन्य जनप्रतिनिधि, साधु-संत तथा धार्मिक हस्तियां भी मौजूद रहीं।

बड़े नेताओं और संतों की मौजूदगी ने आयोजन को और महत्वपूर्ण बना दिया। प्रशासन की ओर से भीड़ और सुरक्षा को लेकर व्यापक व्यवस्थाएं की गई थीं।

इन प्रमुख मार्गों से होकर निकली सवारी

बाबा महाकाल की सवारी महाकाल मंदिर से शुरू हुई। इसके बाद महाकाल चौराहा, गुदरी चौराहा, बक्षी बाजार, कहारवाड़ी, रामघाट, रामानुजकोट, मोढ़ की धर्मशाला, कार्तिक चौक, खाती समाज मंदिर, ढाबा रोड, टंकी चौराहा, मिर्जा नईम बेग, तेलीवाड़ा, कंठाल, सतीगेट, छत्री चौक, गोपाल मंदिर, पटनी बाजार और गुदरी बाजार से होते हुए यह वापस महाकाल चौराहे से मंदिर पहुंची।

पूरे मार्ग पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही। जगह-जगह स्वागत की तैयारियां थीं और भक्त बाबा की एक झलक पाने के लिए उत्साहित दिखाई दिए।

भक्ति, संस्कृति और तकनीक का बना अनोखा संगम

इस बार की Mahakal Royal Sawari 2026 ने यह दिखाया कि धार्मिक परंपराओं को आधुनिक प्रस्तुति के साथ किस तरह जोड़ा जा सकता है। कैलाश वाद्यम की गूंज, विशाल रंगोली, लाइव पेंटिंग, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, बैंड और ड्रोन पुष्पवर्षा ने सवारी को केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रहने दिया।

उज्जैन में इस राजसी महासवारी ने आस्था, संस्कृति और आधुनिक तकनीक को एक मंच पर ला दिया। बाबा महाकाल के दर्शन के लिए उमड़ा जनसैलाब और पूरे शहर में गूंजते जयकारे इस बात के गवाह रहे कि महाकाल की नगरी में भक्ति की ऊर्जा आज भी उतनी ही विराट है।

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