उत्तराखंड

उत्तराखंड की राजनीति में साइडलाइन होने के सवाल पर रमेश पोखरियाल निशंक का जवाब, बोले- ‘मुझे साइडलाइन कौन कह रहा है?’

On the question of being sidelined in Uttarakhand politics, Ramesh Pokhriyal 'Nishank' responds, "Who is saying I’ve been sidelined?"

देहरादून: उत्तराखंड में वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज होने लगी हैं। इसी बीच पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक का एक बयान चर्चा में है। राजनीति में उन्हें साइडलाइन किए जाने से जुड़े सवाल पर निशंक ने इसे खारिज करते हुए कहा, “मुझे साइडलाइन कौन कह रहा है? ऐसा तो नहीं है।” उनके इस जवाब के बाद राज्य की राजनीति में उनकी आगामी भूमिका को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

निशंक ने स्पष्ट किया कि राजनीति में उनकी भूमिका हमेशा पार्टी और संगठन की जरूरतों के अनुसार रही है। उन्होंने अपने लंबे राजनीतिक सफर का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने अलग-अलग समय पर विभिन्न जिम्मेदारियां निभाई हैं और आगे भी संगठन को जहां उनकी आवश्यकता होगी, वह अपनी भूमिका निभाने के लिए तैयार रहेंगे।

‘पार्टी को जहां जरूरत होगी, वहां खड़ा रहूंगा’

प्रेसवार्ता के दौरान निशंक से सवाल किया गया कि क्या भाजपा में उन्हें अब पहले जैसी राजनीतिक जिम्मेदारियां नहीं मिल रही हैं। इस पर उन्होंने साइडलाइन किए जाने की धारणा पर सवाल उठाया। उनका कहना था कि राजनीतिक जीवन में उन्होंने कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया है और पार्टी के लिए जिम्मेदारियां निभाई हैं।

निशंक के बयान का प्रमुख संदेश यही रहा कि वह अपनी राजनीतिक भूमिका को किसी पद या जिम्मेदारी तक सीमित करके नहीं देखते। उनके अनुसार, संगठन की जरूरत के हिसाब से काम करना महत्वपूर्ण है।

हालांकि, उन्होंने वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर अपनी किसी निश्चित जिम्मेदारी, चुनाव लड़ने की योजना या किसी विशेष पद के बारे में स्पष्ट घोषणा नहीं की। इसलिए उनके बयान को आगामी चुनाव के लिए किसी औपचारिक भूमिका के ऐलान के रूप में देखना उचित नहीं होगा।

विधायक से मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री तक का सफर

डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक उत्तराखंड की राजनीति के वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं। उनके राजनीतिक सफर में विधायक, मंत्री और मुख्यमंत्री जैसे पद रहे हैं। इसके अलावा उन्होंने केंद्र सरकार में भी मंत्री के रूप में जिम्मेदारी निभाई है।

उनका अनुभव राज्य की राजनीति और राष्ट्रीय स्तर की राजनीति, दोनों से जुड़ा रहा है। इसी वजह से उनके राजनीतिक भविष्य और भाजपा संगठन में उनकी भूमिका को लेकर होने वाली चर्चाओं को अहम माना जाता है।

निशंक का कहना है कि उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में समय-समय पर संगठन की जरूरतों के अनुसार काम किया है। उनका ताजा बयान भी इसी बात को रेखांकित करता है कि वह भविष्य में मिलने वाली जिम्मेदारी को पार्टी के निर्णय के अनुसार स्वीकार करेंगे।

2027 के चुनाव से पहले बढ़ रही राजनीतिक सरगर्मी

उत्तराखंड में अगले विधानसभा चुनाव को अभी समय है, लेकिन राजनीतिक दलों के स्तर पर संगठन को मजबूत करने और आगामी चुनाव की तैयारियों पर चर्चा शुरू हो गई है। भाजपा के लिए भी वरिष्ठ नेताओं का अनुभव, संगठनात्मक नेटवर्क और जनता के बीच उनकी पहुंच महत्वपूर्ण हो सकती है।

ऐसे माहौल में निशंक से उनकी राजनीतिक भूमिका को लेकर सवाल पूछा जाना स्वाभाविक है। उनके जवाब ने यह संकेत दिया कि वह पार्टी के साथ सक्रिय भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं, लेकिन अंतिम जिम्मेदारी संगठन के निर्णय पर निर्भर करेगी।

राजनीतिक विश्लेषण के लिहाज से वरिष्ठ नेताओं की भूमिका केवल चुनाव लड़ने तक सीमित नहीं होती। वे संगठन को दिशा देने, कार्यकर्ताओं के साथ संवाद स्थापित करने और चुनावी रणनीति में अनुभव साझा करने जैसे काम भी कर सकते हैं। हालांकि, निशंक को आगामी चुनाव में कौन-सी जिम्मेदारी दी जाएगी, इस बारे में अभी कोई औपचारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

साइडलाइन होने की चर्चा पर निशंक ने क्या संदेश दिया?

निशंक के बयान का मुख्य संदेश यह है कि वह खुद को राजनीतिक रूप से अलग-थलग किए जाने की धारणा से सहमत नहीं हैं। उन्होंने अपने लंबे राजनीतिक अनुभव का उल्लेख करते हुए कहा कि पार्टी को जहां उनकी आवश्यकता होगी, वह वहां काम करेंगे।

उनके इस रुख को भाजपा संगठन के प्रति अपनी उपलब्धता जताने के रूप में देखा जा सकता है। लेकिन यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि उन्हें 2027 के विधानसभा चुनाव में कोई खास पद या चुनावी जिम्मेदारी मिलने जा रही है।

फिलहाल, उत्तराखंड की राजनीति में निशंक का बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह आगामी चुनाव से पहले वरिष्ठ नेताओं की भूमिका को लेकर चल रही चर्चा के बीच आया है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि भाजपा आने वाले महीनों में अपने वरिष्ठ नेताओं और संगठनात्मक ढांचे को लेकर क्या रणनीति अपनाती है।

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