Dussehra 2026: रुड़की और रुद्रपुर में 70 फीट ऊंचे रावण का होगा दहन, मुस्लिम कारीगर दे रहे भाईचारे का संदेश
70-foot-tall effigies of Ravana to be burnt in Roorkee and Rudrapur, Muslim artisans convey a message of brotherhood
रुड़की/रुद्रपुर: बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक दशहरा पर्व मनाने के लिए उत्तराखंड के रुड़की और रुद्रपुर में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। दोनों शहरों में रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के विशाल पुतले तैयार किए गए हैं, जिनका विजयदशमी के अवसर पर दहन किया जाएगा। इस बार उत्सव की खास बात पुतलों की ऊंचाई के साथ-साथ इन्हें बनाने वाले मुस्लिम कारीगर भी हैं, जो अपनी कला और मेहनत से सामाजिक सौहार्द और आपसी भाईचारे की मिसाल पेश कर रहे हैं।
रुड़की में 70 फीट ऊंचे रावण का होगा दहन
रुड़की के नेहरू स्टेडियम में दशहरा उत्सव को लेकर पिछले करीब एक महीने से तैयारियां चल रही थीं। अब आयोजन को अंतिम रूप दे दिया गया है। कार्यक्रम के दौरान 70 फीट ऊंचे रावण, 55 फीट ऊंचे कुंभकर्ण और 45 फीट ऊंचे मेघनाद के पुतलों का दहन किया जाएगा। इन विशालकाय पुतलों को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की उम्मीद है।
इन पुतलों को तैयार करने के लिए उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के पुरकाजी कस्बे से मुस्लिम कारीगरों की टीम रुड़की पहुंची है। कारीगर पिछले एक महीने से लगातार मेहनत कर रहे हैं, ताकि दशहरे के दिन पुतले आकर्षण का केंद्र बन सकें।
कारीगर तनवीर के मुताबिक, उनका परिवार पिछले 20 से 25 वर्षों से रावण और अन्य पुतले बनाने का काम कर रहा है। यह हुनर उनके परिवार की परंपरा का हिस्सा है और इसी से उनकी आजीविका भी चलती है।
महंगाई बढ़ी, लेकिन मेहनताने में नहीं हुआ इजाफा
पुतले बनाने वाले कारीगरों के सामने आर्थिक चुनौतियां भी हैं। तनवीर का कहना है कि समय के साथ पुतले तैयार करने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की कीमतें बढ़ गई हैं, लेकिन मेहनताने में उसी अनुपात में वृद्धि नहीं हुई। ऐसे में परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो जाता है।
इसके बावजूद कारीगर अपनी पारंपरिक कला को आगे बढ़ाने में जुटे हैं। उनका काम यह संदेश देता है कि कला, मेहनत और रोजगार का कोई धर्म नहीं होता। अलग-अलग समुदायों के लोगों की भागीदारी त्योहारों को साझा सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक बनाती है।
रुद्रपुर में भी खास होंगे दशहरा के आयोजन
रुद्रपुर में भी विजयदशमी को लेकर उत्साह है। शहर के राम पार्क, जिसे पहले गांधी पार्क के नाम से जाना जाता था, में रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले तैयार किए गए हैं। इस बार यहां 70 फीट ऊंचा रावण, 65 फीट ऊंचा कुंभकर्ण और 60 फीट ऊंचा मेघनाद आकर्षण का केंद्र रहेगा।
यहां पुतले बनाने की जिम्मेदारी रामपुर का एक मुस्लिम परिवार वर्ष 1957 से निभा रहा है। दिलशाद और उनके परिवार की कई पीढ़ियां इस परंपरा को आगे बढ़ा रही हैं। उनके लिए यह काम केवल रोजगार नहीं, बल्कि पीढ़ियों से संजोई गई कला का हिस्सा भी है।
दशहरा आयोजन को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए पुलिस प्रशासन और नगर निगम ने भी तैयारियां की हैं। रुड़की और रुद्रपुर में होने वाला यह उत्सव एक बार फिर परंपरा, कला और सामाजिक सद्भाव का संदेश देगा।
