Uttarakhand Forest Corporation Digital Move: अब मोबाइल ऐप से घर बैठे खरीदें लकड़ी; वन निगम ने रजत जयंती पर डिपो प्रबंधन में AI को दी हरी झंडी
Uttarakhand Forest Corporation Digital Move: Now buy wood from home using a mobile app; Forest Corporation greenlights AI in depot management on silver jubilee
उत्तराखंड वन विकास निगम अपनी स्थापना की रजत जयंती के अवसर पर एक बड़े डिजिटल परिवर्तन की ओर कदम बढ़ा रहा है। प्रमुख सचिव वन, आरके सुधांशु की अध्यक्षता में हुई प्रबंध मंडल की बैठक में निगम को पूरी तरह हाई-टेक बनाने के प्रस्तावों को मंजूरी दे दी गई है। अब आम जनता को लकड़ी खरीदने के लिए डिपो के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे, बल्कि Uttarakhand Forest Corporation Digital Move के तहत 1 अप्रैल से मोबाइल ऐप के जरिए फुटकर बिक्री शुरू की जाएगी।
डिपो प्रबंधन में AI का प्रवेश: पारदर्शिता और गति पर जोर
निगम ने अपने कामकाज में पारदर्शिता लाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग करने का निर्णय लिया है।
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स्मार्ट डिपो: डिपो प्रबंधन में AI के जरिए लकड़ी के स्टॉक, गुणवत्ता और मांग का सटीक विश्लेषण किया जा सकेगा।
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मोबाइल ऐप: 1 अप्रैल से लॉन्च होने वाले इस ऐप के माध्यम से उपभोक्ता सीधे लकड़ी बुक कर सकेंगे, जिससे बिचौलियों की भूमिका खत्म होगी।
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ईको-टूरिज्म और पौधारोपण: निगम अब केवल लकड़ी कटान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ईको-टूरिज्म और बड़े स्तर पर पौधारोपण के कार्यों का भी विस्तार करेगा।
कर्मचारियों के लिए सौगातों की बौछार: बोनस और भत्तों में वृद्धि
रजत जयंती के अवसर पर निगम के कार्मिकों के हित में कई बड़े फैसले लिए गए हैं:
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महंगाई भत्ता (DA): सातवें वेतनमान के तहत पिछले वर्ष की दोनों किस्तों (जनवरी और जुलाई) के एरियर भुगतान को मंजूरी दी गई है।
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तदर्थ बोनस: अराजपत्रित श्रेणी, संविदा और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को वर्ष 2024-25 के लिए उत्पादकता असंबद्ध बोनस दिया जाएगा।
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विनियमितीकरण: वर्षों से दैनिक रूप से कार्य कर रहे कर्मियों को नियमित करने का प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है।
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कल्याण कोष: मेधावी बच्चों को पुरस्कृत करने और स्थानांतरण नियमों में बदलाव के प्रस्तावों पर भी सहमति बनी है।
किसानों और वन पंचायतों के लिए नई योजनाएं
Uttarakhand Forest Corporation Digital Move केवल तकनीक तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देगा:
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जड़ी-बूटी संग्रहण: वन पंचायतों के माध्यम से जड़ी-बूटियों का संग्रहण कर उनके विपणन (Marketing) की व्यवस्था निगम करेगा।
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कृषि वानिकी: किसानों को उच्च गुणवत्ता वाली पौध सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी ताकि वे अपनी आय बढ़ा सकें।
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ऑफ-सीजन उपखनिज: शहरी क्षेत्रों के पास उपखनिज भंडारण की व्यवस्था की जाएगी ताकि ऑफ-सीजन में निर्माण सामग्री की कमी न हो।

