Trump का नया दांव, ग्लोबल टैरिफ 15% करने की घोषणा, अदालत के फैसले के बाद बदली रणनीति
Trump's new move, announcing a 15% global tariff, changed strategy after court ruling
वॉशिंगटन: अमेरिका की व्यापार नीति में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिला है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने वैश्विक टैरिफ दर को 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत करने की घोषणा की है। यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने हाल ही में प्रशासन द्वारा लागू किए गए कुछ टैरिफ प्रावधानों पर सवाल उठाए थे। व्हाइट हाउस का कहना है कि यह कदम घरेलू उद्योगों की सुरक्षा और व्यापार घाटे को नियंत्रित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद त्वरित कदम
हाल ही में अदालत ने 6-3 के बहुमत से फैसला सुनाते हुए कहा कि आपातकालीन आर्थिक शक्तियों का उपयोग कर व्यापक टैरिफ लगाना अधिकार क्षेत्र से बाहर हो सकता है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि आपातकालीन कानूनों का इस्तेमाल स्थायी व्यापारिक नीति बनाने के लिए नहीं किया जा सकता। फैसले के तुरंत बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने बयान जारी कर कहा कि अमेरिका अपने आर्थिक हितों की रक्षा के लिए उपलब्ध सभी वैधानिक विकल्पों का उपयोग करेगा।
ट्रेड एक्ट 1974 के तहत नई पहल
अदालती आपत्ति के बाद प्रशासन ने 1974 के ट्रेड एक्ट के सेक्शन 122 का सहारा लिया है। यह प्रावधान सरकार को भुगतान संतुलन से जुड़ी समस्याओं के मामले में सीमित अवधि के लिए अधिकतम 15 प्रतिशत टैरिफ लगाने की अनुमति देता है। पहले इसी प्रावधान के तहत 10 प्रतिशत दर तय की गई थी, जिसे अब बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया है। प्रशासन का दावा है कि यह कदम अस्थायी है, लेकिन आवश्यक परिस्थितियों में इसे आगे भी बढ़ाया जा सकता है।
“अमेरिका फर्स्ट” को नई गति
राष्ट्रपति ने प्रेस वार्ता में कहा कि उनकी “अमेरिका फर्स्ट” नीति का मूल उद्देश्य घरेलू विनिर्माण को मजबूत करना है। उनका तर्क है कि कई देशों ने लंबे समय तक अमेरिकी बाजार का लाभ उठाया, जिससे स्थानीय उद्योगों को नुकसान हुआ। नई दर से राजस्व में वृद्धि और स्थानीय उत्पादन को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि, अर्थशास्त्रियों का कहना है कि आयात महंगा होने से उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।
भारत समेत अन्य देशों पर असर
इस फैसले का प्रभाव भारत सहित कई व्यापारिक साझेदार देशों पर पड़ सकता है। हाल के महीनों में अमेरिका और भारत के बीच अंतरिम व्यापार समझौते पर सहमति बनी थी, जिसके बाद कुछ टैरिफ दरों में कमी आई थी। अब नई वैश्विक दर लागू होने से प्रभावी शुल्क में हल्का बदलाव संभव है, हालांकि विशेषज्ञ इसे तात्कालिक बड़ा झटका नहीं मान रहे।
वैश्विक बाजार में अनिश्चितता
टैरिफ दर में वृद्धि से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अनिश्चितता बढ़ी है। निवेशक यह आकलन कर रहे हैं कि आने वाले समय में किन-किन उत्पादों और देशों पर नई दर लागू होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह नीति लंबे समय तक जारी रहती है, तो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं और व्यापार संतुलन पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।


