डॉलर के मुकाबले 91 के पार फिसला रुपया, वैश्विक अनिश्चितता और विदेशी बिकवाली ने बढ़ाई चिंता
The rupee slipped past 91 against the dollar, with global uncertainty and foreign selling adding to concerns.
नई दिल्ली: भारतीय रुपये की कमजोरी थमने का नाम नहीं ले रही है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले घरेलू मुद्रा एक बार फिर अहम 91 रुपये प्रति डॉलर के स्तर के नीचे फिसल गई, जिससे मुद्रा बाजार में चिंता का माहौल गहरा गया है। कारोबार के दौरान रुपये पर लगातार दबाव बना रहा और निवेशकों की नजरें वैश्विक संकेतों व भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के संभावित कदमों पर टिकी रहीं।
कारोबार की शुरुआत से ही दबाव में रुपया
मंगलवार को रुपया मामूली गिरावट के साथ खुला, लेकिन दिन चढ़ने के साथ इसमें कमजोरी बढ़ती चली गई। शुरुआती कारोबार में ही डॉलर की मांग बढ़ने से रुपये पर दबाव बना और यह 91 के आसपास पहुंच गया। बाजार विश्लेषकों के अनुसार, हाल के दिनों में रुपये की चाल यह संकेत दे रही है कि फिलहाल घरेलू मुद्रा को मजबूत सहारा नहीं मिल पा रहा है।
वैश्विक कारकों ने बढ़ाई बेचैनी
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अनिश्चितता का माहौल रुपये पर भारी पड़ रहा है। अमेरिका और यूरोप से जुड़े भू-राजनीतिक तनाव, संभावित व्यापार शुल्कों को लेकर बयानबाजी और सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग ने डॉलर को मजबूती दी है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था से जुड़े मजबूत आंकड़ों के चलते यह धारणा भी बनी हुई है कि वहां ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रह सकती हैं, जिससे डॉलर को अतिरिक्त समर्थन मिल रहा है।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली बड़ा कारण
घरेलू स्तर पर रुपये की कमजोरी के पीछे विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की लगातार बिकवाली एक अहम वजह मानी जा रही है। बीते कुछ महीनों से विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार से पूंजी निकाल रहे हैं। इस पूंजी निकासी का सीधा असर मुद्रा बाजार पर पड़ा है और डॉलर की मांग बढ़ने से रुपया दबाव में आ गया है। जानकारों का कहना है कि जब तक विदेशी निवेशकों का रुख नहीं बदलता, तब तक रुपये में स्थायी मजबूती आना मुश्किल है।
एशियाई मुद्राओं के मुकाबले भी कमजोर प्रदर्शन
अगर एशियाई बाजारों की बात करें तो रुपया कई अन्य क्षेत्रीय मुद्राओं की तुलना में कमजोर नजर आ रहा है। कुछ एशियाई मुद्राओं को स्थानीय केंद्रीय बैंकों के हस्तक्षेप और बेहतर आर्थिक संकेतों का सहारा मिला है, जबकि रुपये को फिलहाल ऐसे मजबूत समर्थन की कमी दिख रही है।
आगे क्या हो सकता है रुख?
मुद्रा विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि वैश्विक तनाव और डॉलर की मजबूती बनी रहती है, तो रुपये पर और दबाव आ सकता है। हालांकि, माना जा रहा है कि आरबीआई अत्यधिक उतार-चढ़ाव को रोकने के लिए बाजार में दखल दे सकता है। निकट भविष्य में रुपये की दिशा काफी हद तक वैश्विक घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों के रुख पर निर्भर करेगी।


