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यूनियन बजट 2026 पर टिकी मिडिल क्लास की नजर, टैक्स राहत और महंगाई से उम्मीद

The middle class is keeping a close eye on the Union Budget 2026, hoping for tax relief and measures to control inflation.

नई दिल्ली: 1 फरवरी को पेश होने वाले यूनियन बजट 2026 को लेकर देशभर के मिडिल क्लास परिवारों में उत्सुकता साफ दिखाई दे रही है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के इस बजट से खासतौर पर सैलरी पाने वाले वर्ग को बड़ी उम्मीदें हैं। बढ़ती महंगाई, सीमित वेतन वृद्धि और रोजमर्रा के खर्चों के दबाव के बीच आम करदाता यह जानना चाहता है कि सरकार इस बार उसे कितनी राहत दे पाएगी।

यह बजट ऐसे समय में आ रहा है, जब भारतीय अर्थव्यवस्था वैश्विक और घरेलू दोनों तरह की चुनौतियों से गुजर रही है। रुपये में कमजोरी, अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अनिश्चितता और वैश्विक व्यापार तनाव का असर देश की आर्थिक स्थिति पर पड़ रहा है। ऐसे माहौल में सरकार से उम्मीद की जा रही है कि वह ऐसे कदम उठाए, जिससे आम लोगों की क्रय शक्ति मजबूत हो और आर्थिक गतिविधियों को रफ्तार मिले।

मिडिल क्लास के लिए टैक्स बोझ बड़ी चिंता

नोएडा में कार्यरत प्रोफेशनल मधुर राय का कहना है कि परिवार की जिम्मेदारियां बढ़ने के साथ टैक्स का दबाव भी लगातार महसूस हो रहा है। उनके मुताबिक खर्च हर साल बढ़ते जा रहे हैं, जबकि आय में उतनी तेजी से इजाफा नहीं हो पा रहा। अगर बजट में टैक्स स्लैब या कटौतियों में कुछ और राहत दी जाती है, तो इससे घरेलू बजट को संभालने में मदद मिलेगी और बचत की गुंजाइश भी बनेगी।

आईटी सेक्टर से जुड़े स्वप्निल श्रीवास्तव का मानना है कि नए टैक्स सिस्टम के साथ-साथ पुराने टैक्स सिस्टम को भी मजबूत बनाए रखना जरूरी है। उनके अनुसार पुराना टैक्स ढांचा लोगों को बचत और निवेश के लिए प्रेरित करता है, जो लंबे समय में वित्तीय सुरक्षा के लिए अहम है। बैंक ब्याज दरों में गिरावट के चलते यह मुद्दा और भी महत्वपूर्ण हो गया है।

रिटायरमेंट और भविष्य की सुरक्षा पर फोकस

केंद्र सरकार के कर्मचारी आदित्य शुक्ला के लिए रिटायरमेंट के बाद की सुरक्षा एक बड़ी चिंता है। उनका कहना है कि टैक्स देना जरूरी है, लेकिन उम्र बढ़ने के साथ स्वास्थ्य और जीवन यापन के खर्च बढ़ने का डर भी रहता है। ऐसे में बजट में ऐसी पेंशन या सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की जरूरत है, जो कर्मचारियों को भविष्य के लिए भरोसा दे सकें।

एक्सपर्ट्स की राय: संतुलन बनाना चुनौती

आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार के लिए इस बजट में संतुलन बनाना आसान नहीं होगा। ईवाई इंडिया के नेशनल टैक्स लीडर समीर गुप्ता के अनुसार उभरते टेक्नोलॉजी सेक्टर जैसे एआई, रोबोटिक्स और स्पेस टेक्नोलॉजी में निवेश बढ़ाकर निजी पूंजी को आकर्षित किया जा सकता है। इससे रोजगार और ग्रोथ दोनों को सहारा मिलेगा।

वहीं चार्टर्ड अकाउंटेंट योगेंद्र कपूर का कहना है कि अगर सैलरी क्लास के लिए मानक कटौती बढ़ाई जाए या हाउसिंग लोन पर अतिरिक्त छूट दी जाए, तो उपभोग को बढ़ावा मिल सकता है। हालांकि, एक्सपर्ट डी के मिश्रा का मानना है कि मौजूदा वैश्विक दबावों को देखते हुए बड़े लोकलुभावन ऐलान की गुंजाइश सीमित है।

कुल मिलाकर, यूनियन बजट 2026 से मिडिल क्लास को राहत की उम्मीद जरूर है, लेकिन सरकार किस हद तक इन अपेक्षाओं पर खरी उतरती है, इसका जवाब 1 फरवरी को सामने आएगा।

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