मजबूत डॉलर का दबाव, सोना-चांदी की चमक फीकी, बाजार में सतर्कता का माहौल
Gold and silver lose their sheen due to a strong dollar; markets remain cautious.
नई दिल्ली: वैश्विक बाजारों में पिछले सप्ताह सोना और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव का दौर देखने को मिला। मजबूत अमेरिकी डॉलर और उम्मीद से बेहतर आए आर्थिक आंकड़ों ने बुलियन बाजार की तेजी पर विराम लगा दिया। निवेशकों की नजर अमेरिका से आने वाले रोजगार और महंगाई से जुड़े संकेतकों पर टिकी रही, जिससे बाजार में स्पष्ट दिशा का अभाव बना रहा।
विशेषज्ञों के अनुसार, जब अमेरिकी अर्थव्यवस्था मजबूत दिखती है और ब्याज दरों में कटौती की संभावना घटती है, तब सोना-चांदी जैसी बिना ब्याज वाली संपत्तियों में निवेश की गति धीमी पड़ जाती है। यही कारण है कि हालिया तेजी के बाद अब बाजार सीमित दायरे में कारोबार कर रहा है।
घरेलू बाजार में मिला-जुला प्रदर्शन
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी के वायदा भाव में कमजोरी दर्ज की गई, जबकि सोना अपेक्षाकृत स्थिर रहा। चांदी में लगभग दो प्रतिशत तक की गिरावट देखी गई, जिससे निवेशकों में सतर्कता बढ़ी। दूसरी ओर, सोने में मामूली उतार-चढ़ाव के बावजूद बड़ी गिरावट नहीं आई।
बाजार विश्लेषकों का कहना है कि हाल के उच्च स्तरों से कीमतों में आई गिरावट मुख्य रूप से मुनाफावसूली का परिणाम है। निवेशकों ने ऊपरी स्तरों पर अपनी होल्डिंग घटाई, जिससे दबाव बना। हालांकि सुरक्षित निवेश की मांग ने कीमतों को पूरी तरह टूटने से बचाए रखा।
अंतरराष्ट्रीय बाजार का असर
वैश्विक स्तर पर भी सोना और चांदी की चाल सीमित रही। अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में मजबूती और बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी ने कीमती धातुओं पर दबाव डाला। जब डॉलर मजबूत होता है, तो अन्य मुद्राओं के धारकों के लिए सोना महंगा हो जाता है, जिससे मांग प्रभावित होती है।
साथ ही, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। बाजार को उम्मीद थी कि ब्याज दरों में जल्द राहत मिल सकती है, लेकिन मजबूत आर्थिक आंकड़ों ने इस संभावना को कमजोर कर दिया है। इस स्थिति ने निवेशकों को सतर्क रुख अपनाने के लिए मजबूर किया है।
एशियाई मांग और ETF गतिविधि
भारत और चीन जैसे देशों में मौसमी खरीदारी और ज्वेलरी की मांग ने सोने को कुछ समर्थन दिया। त्योहारों और शादी के सीजन से पहले की खरीदारी ने बाजार को सहारा प्रदान किया। वहीं दूसरी ओर, एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) में निवेशकों की मुनाफावसूली ने तेजी को सीमित रखा।
चांदी पर औद्योगिक मांग में नरमी का भी असर पड़ा है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सोलर सेक्टर से जुड़ी मांग में अस्थिरता के कारण चांदी की चाल अपेक्षाकृत कमजोर रही।
आगे की रणनीति क्या हो?
विशेषज्ञों का मानना है कि निकट अवधि में सोना और चांदी सीमित दायरे में रह सकते हैं। जब तक अमेरिकी महंगाई, जीडीपी और रोजगार से जुड़े आंकड़ों में स्पष्ट संकेत नहीं मिलते, तब तक बाजार में बड़ी चाल की संभावना कम है।
निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे वैश्विक आर्थिक हालात, डॉलर की चाल और केंद्रीय बैंक के फैसलों पर नजर रखें। अल्पकालिक निवेशकों के लिए उतार-चढ़ाव अवसर ला सकता है, जबकि दीर्घकालिक निवेशकों को संतुलित और धैर्यपूर्ण रणनीति अपनानी चाहिए।


