8वें वेतन आयोग को लेकर बढ़ी उम्मीदें, मेडिकल अलाउंस 1,000 से 20,000 रुपये करने की मांग तेज
Expectations rise regarding the 8th Pay Commission, demand for increasing medical allowance from Rs 1,000 to Rs 20,000 intensifies
नई दिल्ली: केंद्र सरकार द्वारा पिछले वर्ष नवंबर में 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के लिए टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) जारी किए जाने के बाद से ही कर्मचारी संगठनों के बीच हलचल तेज है। जैसे-जैसे आयोग की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है, केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की उम्मीदें भी बढ़ती जा रही हैं। इस बार चर्चा सिर्फ फिटमेंट फैक्टर या बेसिक वेतन संशोधन तक सीमित नहीं है, बल्कि मेडिकल सुविधाओं और पेंशन से जुड़े मुद्दे भी प्रमुखता से उठाए जा रहे हैं।
कई कर्मचारी प्रतिनिधि संस्थाओं का कहना है कि अंतिम टर्म्स ऑफ रेफरेंस में उनकी कई अहम मांगों को स्पष्ट रूप से शामिल नहीं किया गया है। खासतौर पर फिटमेंट फैक्टर, पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली और मेडिकल सुविधाओं पर ठोस उल्लेख न होने से असंतोष जताया गया है।
ड्राफ्टिंग कमेटी की बैठकों में बनी रणनीति
राजधानी में नेशनल काउंसिल-जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) की ड्राफ्टिंग कमेटी की बैठक 25 फरवरी से शुरू हुई, जो लगभग एक सप्ताह तक चली। इस दौरान करीब एक करोड़ केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स से जुड़े मुद्दों को लेकर मांगों का मसौदा तैयार किया गया।
कर्मचारी संगठनों ने सरकार के सामने अपनी मांगें पहले ही रखना शुरू कर दिया था, जब 8वें वेतन आयोग के गठन की घोषणा की गई थी। वित्त मंत्रालय ने भी स्टाफ साइड से सुझाव आमंत्रित किए थे, लेकिन प्रतिनिधियों का दावा है कि कई महत्वपूर्ण सुझाव अंतिम दस्तावेज में जगह नहीं बना सके।
फिक्स्ड मेडिकल अलाउंस पर सबसे बड़ी बहस
सबसे अधिक चर्चा फिक्स्ड मेडिकल अलाउंस (FMA) को लेकर हो रही है। वर्तमान में नॉन-CGHS (केंद्रीय सरकारी स्वास्थ्य योजना) क्षेत्रों में रहने वाले पेंशनर्स को 1,000 रुपये प्रति माह का मेडिकल अलाउंस मिलता है। कर्मचारी संगठनों ने इसे बढ़ाकर 20,000 रुपये प्रति माह करने की मांग उठाई है।
यूनियनों का तर्क है कि बढ़ती चिकित्सा महंगाई के बीच 1,000 रुपये की राशि बेहद कम है। खासकर ग्रामीण या दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले पेंशनर्स के लिए यह रकम स्वास्थ्य खर्च का सामना करने के लिए पर्याप्त नहीं है। उनका कहना है कि जब दवाइयों और इलाज की लागत लगातार बढ़ रही है, तो मेडिकल अलाउंस भी वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप संशोधित किया जाना चाहिए।
आयोग के कामकाज पर टिकी नजर
हाल ही में 8वें वेतन आयोग को दिल्ली के जनपथ स्थित चंद्रलोक बिल्डिंग में कार्यालय आवंटित किया गया है। आयोग की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं। इसे आयोग के औपचारिक कामकाज की शुरुआत का संकेत माना जा रहा है।
अब कर्मचारियों और पेंशनर्स की नजर आयोग की सिफारिशों पर टिकी है। यदि मेडिकल अलाउंस में प्रस्तावित वृद्धि जैसी मांगें स्वीकार की जाती हैं, तो यह लाखों पेंशनर्स के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है।
फिलहाल कर्मचारी संगठन अपने एजेंडे को मजबूती से आगे बढ़ाने में जुटे हैं। आने वाले महीनों में स्पष्ट होगा कि सरकार इन मांगों को कितनी प्राथमिकता देती है और 8वां वेतन आयोग कर्मचारियों की अपेक्षाओं पर कितना खरा उतर पाता है।



