उत्तराखंड

देहरादून में होली बाजार फीका, ऑनलाइन खरीदारी से स्थानीय व्यापारियों की बिक्री घटी

Dehradun's Holi market is bleak, with online shopping reducing sales for local traders.

देहरादून: रंगों के त्योहार होली से पहले शहर के बाजार सज चुके हैं। दुकानों पर गुलाल, पिचकारी, रंग-बिरंगे मुखौटे और तरह-तरह के गिफ्ट पैक सजे हैं, लेकिन इस बार कारोबारियों के चेहरे पर उत्साह कम और चिंता ज्यादा नजर आ रही है। उनका कहना है कि उम्मीद के मुताबिक बिक्री नहीं हो रही है, जिसकी बड़ी वजह ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का बढ़ता चलन है।

व्यापारियों के अनुसार, होली साल में एक बार आने वाला बड़ा त्योहार है, इसलिए वे करीब 15 से 20 दिन पहले से तैयारी शुरू कर देते हैं। थोक बाजार से माल मंगवाकर दुकानें भर दी जाती हैं, ताकि त्योहार के समय ग्राहकों को हर विकल्प मिल सके। इस बार भी तैयारियां पूरी थीं, लेकिन ग्राहकों की संख्या में कमी ने कारोबार पर असर डाला है।

ऑनलाइन बाजार बना चुनौती

स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में ऑनलाइन खरीदारी का ट्रेंड तेजी से बढ़ा है। खासकर कोरोना काल के बाद लोगों की आदतें बदल गई हैं। अब छोटे से छोटा सामान भी घर बैठे ऑर्डर किया जा सकता है। यही सुविधा बाजारों के लिए बड़ी चुनौती बन रही है।

दुकानदारों का कहना है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर न सिर्फ सामान आसानी से उपलब्ध है, बल्कि होम डिलीवरी की सुविधा भी ग्राहकों को आकर्षित करती है। कई लोग भीड़भाड़ और ट्रैफिक से बचने के लिए बाजार आने से कतराते हैं।

30 से 50 फीसदी तक घटी बिक्री

कई व्यापारियों का दावा है कि इस बार उनकी बिक्री में 30 से 50 फीसदी तक की गिरावट आई है। अनमोल गुप्ता नामक एक व्यापारी ने बताया कि ऑनलाइन खरीदारी के कारण बाजारों में मांग कम हो गई है। उनका कहना है कि वे ऑर्गेनिक और हर्बल रंग भी बेच रहे हैं, फिर भी ग्राहकों की संख्या अपेक्षा से कम है।

व्यापारी हेमंत ओबेरॉय का कहना है कि त्योहार के कारण कुछ बिक्री जरूर हो रही है, लेकिन ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की वजह से कारोबार पर असर साफ दिखाई दे रहा है। उन्होंने बताया कि कई बार जिस सामान को वे थोक में खरीदते हैं, वही उत्पाद ऑनलाइन थोड़े ज्यादा दाम पर भी ग्राहकों को घर बैठे मिल जाता है, फिर भी लोग सुविधा के कारण ऑनलाइन ही खरीदारी कर रहे हैं।

दीक्षा शर्मा, जो पिछले कई वर्षों से रंगों का व्यापार कर रही हैं, बताती हैं कि यह स्थिति सिर्फ इस साल की नहीं है। हर साल बाजार की रौनक कम होती जा रही है। उनका कहना है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म ने पारंपरिक बाजार व्यवस्था को प्रभावित किया है।

खरीदारों की संख्या में कमी

व्यापारी हनी सिंह के अनुसार, पिछले सालों की तुलना में इस बार बाजार में लगभग आधे खरीदार ही दिखाई दे रहे हैं। उनका मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म को बढ़ावा मिलने से छोटे दुकानदारों को सीधा नुकसान हो रहा है।

हालांकि होली नजदीक है और कुछ जगहों पर उत्सव की शुरुआत भी हो चुकी है, लेकिन व्यापारियों को उम्मीद है कि अंतिम दिनों में बिक्री में कुछ तेजी आएगी। फिलहाल बाजार सजे हैं, लेकिन खरीदारों की कमी ने कारोबारियों की चिंता बढ़ा दी है।

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