उत्तराखंड

उत्तराखंड में बढ़ते डेमोग्राफिक बदलाव पर सरकार सख्त, फर्जी दस्तावेज़ और दोहरे वोटर आईडी की शुरू हुई बड़े स्तर पर जांच

Uttarakhand government cracks down on growing demographic shifts, launches large-scale investigation into fake documents and duplicate voter IDs

देहरादून: उत्तराखंड में लगातार बढ़ रहे डेमोग्राफिक चेंज को राज्य सरकार गंभीर चुनौती मान रही है। बाहरी राज्यों से आने वाली बढ़ती आबादी, अवैध बसावट, फर्जी दस्तावेज़ों के बढ़ते मामलों और दोहरे वोटर आईडी जैसी शिकायतों ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। इसी को देखते हुए राज्य सरकार ने प्रदेशभर में व्यापक सत्यापन अभियान शुरू कर दिया है। इसमें राशन कार्ड, स्थाई निवास प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, बिजली कनेक्शन और मतदाता पहचान पत्र की जांच प्राथमिकता पर की जा रही है।

सरकार का कहना है कि हाल के महीनों में बड़े पैमाने पर फर्जी दस्तावेज़ों का दुरुपयोग सामने आया है। कई लोगों ने पात्रता न होने के बावजूद सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए गलत तरीके से राशन कार्ड और अन्य पहचान पत्र बनवा लिए। इसी तरह सीमावर्ती क्षेत्रों में दो-दो जगह वोटर आईडी बने होने जैसी शिकायतें भी बढ़ रही हैं।


भू-कानून से लेकर ‘कालनेमि अभियान’ तक—सरकार की लगातार कार्रवाई

डेमोग्राफिक चेंज पर रोक लगाने के लिए उत्तराखंड सरकार ने कई कदम उठाए हैं। सख्त भू-कानून लागू करने से शुरुआत हुई, जिसके बाद “कालनेमि अभियान” चलाया गया। हाल ही में देवभूमि परिवार योजना को भी कैबिनेट की मंजूरी मिल चुकी है। राज्य सरकार का कहना है कि यह सभी कदम प्रदेश के मूल स्वरूप और सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लगातार इस मुद्दे पर अपनी दृढ़ता जताते रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि “उत्तराखंड की मूल पहचान और धार्मिक-सांस्कृतिक चरित्र को बदलने नहीं दिया जाएगा।”


सत्यापन अभियान में सभी संदिग्ध दस्तावेज़ जांच के दायरे में

सरकार के अनुसार, कई जगहों पर फर्जीवाड़े की शिकायतें मिली हैं जहाँ अपात्र लोगों को पात्रों की श्रेणी में दिखाकर राशन कार्ड, बिजली कनेक्शन, आधार और पहचान पत्र जारी कर दिए गए। सभी ऐसे मामलों की दोबारा जांच के निर्देश जारी कर दिए गए हैं। प्रशासन को यह भी निर्देश है कि फर्जी दस्तावेज़ जारी करने में शामिल कर्मचारियों की भी जिम्मेदारी तय की जाए और उन पर कार्रवाई हो।

सीएम धामी ने विशेष रूप से उत्तर प्रदेश सीमा से लगे जिलों—उधमसिंह नगर, चंपावत, नैनीताल, हरिद्वार, देहरादून और पौड़ी—में मतदाता पहचान पत्रों का सत्यापन तेज़ करने को कहा है, जहाँ दोहरे वोटर आईडी की शिकायतें अधिक हैं।


सरकार का संदेश स्पष्ट: डेमोग्राफिक बदलाव पर अब सख्त निगरानी

राज्य सरकार इसे सिर्फ कानून-व्यवस्था का नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक सुरक्षा का मुद्दा मान रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बड़े पैमाने पर जो परिवर्तन देखा जा रहा है, वह राज्य के लिए “उचित नहीं” है। इसलिए प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि बिना किसी दबाव के कठोर कार्रवाई की जाए।

सरकार को उम्मीद है कि इस राज्यव्यापी जांच और सख्त कदमों से फर्जी दस्तावेज़, अवैध बसावट और डेमोग्राफिक असंतुलन पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित हो सकेगा।

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