Diesel Price: G7 के 100 मिलियन बैरल रिजर्व रिलीज करने के फैसले से क्या सस्ता होगा डीजल?
Will diesel become cheaper due to G7's decision to release 100 million barrels of reserve?

नई दिल्ली: दुनियाभर में बढ़ती ईंधन कीमतों के बीच Diesel Price को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। G7 देशों ने रणनीतिक भंडार से 100 मिलियन बैरल तेल और पेट्रोलियम उत्पाद जारी करने पर सहमति जताई है। इसका मकसद वैश्विक ऊर्जा बाजार में सप्लाई बढ़ाना और कीमतों पर बने दबाव को कम करना है।
G7 के इस फैसले में डीजल को खास प्राथमिकता दी गई है। समूह के मुताबिक, रिजर्व से ईंधन की निकासी तुरंत शुरू होगी और यह प्रक्रिया करीब चार महीने तक चलेगी। शुरुआती 20 दिनों में डीजल की बड़ी मात्रा बाजार में पहुंचाने की योजना है। इस पूरी प्रक्रिया का समन्वय इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी यानी IEA करेगी।
G7 ने क्यों लिया इतना बड़ा फैसला?
पिछले कुछ समय से वैश्विक ऊर्जा बाजार में सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी है। कच्चे तेल और रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों पर इसका असर दिखाई दे रहा है। खासकर डीजल बाजार में दबाव ज्यादा है।
डीजल की कीमत बढ़ने का असर केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहता। ट्रक, कृषि मशीनरी, निर्माण उपकरण और कई औद्योगिक गतिविधियां डीजल पर निर्भर हैं। ऐसे में Diesel Price में लगातार तेजी से परिवहन और उत्पादन लागत भी बढ़ सकती है।
G7 ने इसी दबाव को कम करने के लिए रणनीतिक भंडार का इस्तेमाल करने का फैसला किया है। समूह ने यह भी कहा है कि ऊर्जा और पेट्रोलियम उत्पादों के व्यापार पर नए प्रतिबंध नहीं लगाए जाएंगे।
पहले 20 दिनों में डीजल की बड़ी सप्लाई
G7 के फैसले की सबसे महत्वपूर्ण बात डीजल की शुरुआती सप्लाई है। संयुक्त बयान के मुताबिक, 100 मिलियन बैरल की निकासी चार महीने में की जाएगी। लेकिन डीजल की एक बड़ी मात्रा पहले 20 दिनों में ही बाजार में लाई जाएगी।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर देश में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमत तुरंत कम हो जाएगी। स्थानीय टैक्स, रिफाइनिंग लागत, आयात लागत और मुद्रा विनिमय दर जैसे कई दूसरे कारक भी अंतिम कीमत तय करते हैं।
अमेरिका में Diesel Price रिकॉर्ड स्तर के करीब
G7 का फैसला ऐसे समय आया है जब अमेरिका में डीजल की कीमत काफी ऊंचे स्तर पर है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2 अक्टूबर को अमेरिका में डीजल की औसत कीमत 6.37 डॉलर प्रति गैलन रही। इससे पहले 22 सितंबर को कीमत 6.52 डॉलर प्रति गैलन के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई थी।
यूरोप में भी डीजल बाजार पर दबाव बना हुआ है। अमेरिका और यूरोप दोनों के लिए डीजल की पर्याप्त उपलब्धता इस समय अहम मुद्दा है। इसी वजह से रणनीतिक भंडार से डीजल जारी करने पर जोर दिया गया है।
फैसले के बाद कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट
G7 की घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में शुरुआती गिरावट देखने को मिली। Reuters के मुताबिक, दिसंबर डिलीवरी वाला ब्रेंट करीब 1.1 प्रतिशत गिरकर 101.23 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। WTI में करीब 2.3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 90.70 डॉलर प्रति बैरल रहा।
क्या औंधे मुंह गिर जाएगी डीजल की कीमत?
G7 के फैसले से Diesel Price पर दबाव कम हो सकता है, लेकिन कीमतों में अचानक बड़ी गिरावट की गारंटी नहीं है। बाजार में तेल की उपलब्धता केवल रणनीतिक भंडार पर निर्भर नहीं करती।
इसके अलावा, G7 के बयान में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि 100 मिलियन बैरल में कच्चे तेल, डीजल और दूसरे पेट्रोलियम उत्पादों की अलग-अलग मात्रा कितनी होगी। यह भी सवाल बना हुआ है कि घोषित मात्रा का कितना हिस्सा पहले से किए गए रिजर्व रिलीज कमिटमेंट में शामिल है।
भारत में क्या होगा असर?
भारत में Diesel Price पर G7 के फैसले का असर सीधे तौर पर तय नहीं किया जा सकता। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में लंबे समय तक गिरावट रहने पर आयात लागत में राहत मिल सकती है।
लेकिन भारत में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें केवल अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के दाम से तय नहीं होतीं। रुपये की विनिमय दर, टैक्स, रिफाइनिंग लागत और तेल कंपनियों की मूल्य निर्धारण नीति भी इसमें भूमिका निभाती है।
इसलिए फिलहाल G7 का फैसला वैश्विक बाजार के लिए सप्लाई बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण कदम है। Diesel Price में आगे कितनी राहत मिलती है, यह अगले कुछ हफ्तों में वास्तविक सप्लाई और अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार की प्रतिक्रिया से साफ होगा।



