Asian Games 2026: 11 साल की उम्र में खोए माता-पिता, अब वर्ल्ड चैंपियन को हराकर जीता गोल्ड
Lost parents at age 11, now won gold by defeating the world champion

Asian Games 2026 में भारत के लिए कुश्ती के अखाड़े से बड़ी खुशखबरी आई है। भारतीय पहलवान अमन सहरावत ने पुरुषों की 57 किलोग्राम फ्रीस्टाइल कुश्ती में गोल्ड मेडल जीत लिया है। फाइनल मुकाबले में उन्होंने उत्तर कोरिया के मौजूदा वर्ल्ड चैंपियन हान चोंग-सोंग को 11-7 से हराया। इस जीत के साथ अमन ने एशियन गेम्स में 57 किलोग्राम वर्ग में भारत के लिए पहला गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया।
आखिरी पलों में पलटा पूरा मुकाबला
Asian Games 2026 के इस फाइनल में अमन सहरावत और हान चोंग-सोंग के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला। शुरुआत में अमन ने अपनी पकड़ मजबूत रखी। एक समय भारतीय पहलवान 6-1 की बढ़त पर थे। लेकिन मुकाबला यहीं खत्म नहीं हुआ।
हान चोंग-सोंग ने जोरदार वापसी की और स्कोर 7-6 कर दिया। इससे मुकाबला पूरी तरह पलट गया। ऐसा लग रहा था कि आखिरी समय तक दोनों पहलवानों के बीच एक-एक अंक के लिए संघर्ष होगा।
अमन ने दबाव में अपना संयम नहीं खोया। मुकाबले के अंतिम दौर में उन्होंने शानदार चार अंकों की चाल चली। इसके बाद उन्हें एक और अंक मिला। इस तरह स्कोर 11-7 हो गया और अमन ने गोल्ड अपने नाम कर लिया।
57 किलो वर्ग में भारत का पहला एशियन गेम्स गोल्ड
अमन सहरावत की यह जीत इसलिए भी खास है क्योंकि पुरुषों के 57 किलोग्राम फ्रीस्टाइल वर्ग में भारत इससे पहले एशियन गेम्स में गोल्ड नहीं जीत पाया था। अमन ने इस कमी को भी पूरा कर दिया।
इससे पहले हांग्जो एशियन गेम्स में अमन ने इसी वर्ग में ब्रॉन्ज मेडल जीता था। अब उन्होंने अपने पिछले प्रदर्शन को गोल्ड में बदल दिया है। उनके नाम पेरिस ओलंपिक 2024 का भी ब्रॉन्ज मेडल है। इस तरह बेहद कम उम्र में उनके खाते में ओलंपिक और एशियन गेम्स दोनों के पदक आ चुके हैं।
फाइनल से पहले भी दिखाया दम
Asian Games 2026 में अमन का सफर फाइनल तक आसान नहीं रहा। शुरुआती दौर में उन्होंने जापान के यामातो ओगावा को 20-0 से हराया। क्वार्टर फाइनल में कजाकिस्तान के नूरदानत ऐतानोव के खिलाफ भी अमन ने 12-1 से बड़ी जीत दर्ज की।
सेमीफाइनल में हालांकि उन्हें कड़ी चुनौती मिली। ताजिकिस्तान के ऐआल बेलोल्युब्स्की के खिलाफ अमन एक समय 2-6 से पीछे चल रहे थे। इसके बाद उन्होंने मुकाबले की तस्वीर बदल दी।
दूसरे पीरियड में अमन ने लगातार अंक जुटाए। उनकी आक्रामक कुश्ती के सामने प्रतिद्वंद्वी टिक नहीं सका। अमन ने आखिरकार 14-8 से मुकाबला जीतकर फाइनल में जगह बनाई।
11 साल की उम्र में सिर से उठा माता-पिता का साया
अमन सहरावत की कहानी सिर्फ पदकों तक सीमित नहीं है। उनके जीवन में बचपन से ही बड़ी चुनौतियां रही हैं। जब अमन करीब 10 साल के थे, तब उनकी मां का निधन हो गया था। इसके लगभग एक साल बाद उनके पिता भी इस दुनिया से चले गए। महज 11 साल की उम्र में अमन अनाथ हो गए थे।
माता-पिता के जाने के बाद उनके परिवार और रिश्तेदारों ने उन्हें संभाला। बाद में अमन दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम पहुंचे। यहीं से उनकी कुश्ती की यात्रा ने नया मोड़ लिया।
छत्रसाल में उन्हें नियमित ट्रेनिंग और प्रतियोगी माहौल मिला। छोटी उम्र में ही उन्होंने कुश्ती को अपना लक्ष्य बना लिया। उनके संघर्ष की कहानी में परिवार का सहयोग और अखाड़े की मेहनत दोनों अहम रहे हैं।
बचपन से कुश्ती का जुनून
अमन का जन्म हरियाणा के झज्जर जिले के बिरोहड़ गांव में हुआ। बचपन में ही उन्हें कुश्ती में दिलचस्पी थी। उन्होंने गांव के अखाड़े से इस खेल की शुरुआत की। बाद में छत्रसाल स्टेडियम उनकी ट्रेनिंग का प्रमुख केंद्र बना।
अमन ने जूनियर स्तर पर भी कई उपलब्धियां हासिल कीं। 2019 में उन्होंने एशियाई कैडेट चैंपियनशिप में गोल्ड जीता। 2022 में वह अंडर-23 वर्ल्ड चैंपियनशिप में गोल्ड जीतने वाले पहले भारतीय बने। इसके बाद सीनियर स्तर पर भी उनका प्रदर्शन लगातार मजबूत होता गया।
पेरिस ओलंपिक में भी जीता था ब्रॉन्ज
अमन सहरावत ने पेरिस ओलंपिक 2024 में भारत के लिए 57 किलो फ्रीस्टाइल में ब्रॉन्ज मेडल जीता था। ब्रॉन्ज मेडल मुकाबले में उन्होंने प्यूर्टो रिको के डेरियन क्रूज को 13-5 से हराया था।
ओलंपिक पदक के बाद अमन ने अपनी पहचान दुनिया के बड़े पहलवानों में बनाई। अब Asian Games 2026 में वर्ल्ड चैंपियन को हराकर गोल्ड जीतना उनके करियर की एक और बड़ी उपलब्धि बन गया है।
भारत के लिए कुश्ती में दूसरा गोल्ड
Asian Games 2026 में अमन सहरावत का गोल्ड भारत का कुश्ती में दूसरा स्वर्ण पदक भी है। उनसे पहले सुजीत कालकल ने पुरुषों के 65 किलोग्राम फ्रीस्टाइल वर्ग में गोल्ड जीता था।
अमन की जीत के साथ भारत की कुश्ती टीम का प्रदर्शन और मजबूत हुआ है। 57 किलो वर्ग में मिली यह जीत इसलिए भी खास है क्योंकि इसमें अमन ने मौजूदा वर्ल्ड चैंपियन को हराया।
संघर्ष से शिखर तक पहुंची कहानी
अमन सहरावत के लिए यह गोल्ड सिर्फ एक और मेडल नहीं है। 11 साल की उम्र में माता-पिता को खोने के बाद उन्होंने खेल के मैदान में अपनी अलग पहचान बनाई। गांव के अखाड़े से शुरू हुई यात्रा छत्रसाल स्टेडियम तक पहुंची और फिर ओलंपिक पोडियम तक।
अब Asian Games 2026 में गोल्ड जीतकर अमन ने अपने नाम एक और ऐतिहासिक उपलब्धि जोड़ ली है। 23 साल की उम्र में उनके पास ओलंपिक ब्रॉन्ज और एशियन गेम्स गोल्ड जैसे बड़े पदक हैं। फाइनल में आखिरी पलों में की गई उनकी वापसी यह दिखाती है कि दबाव के बीच भी उन्होंने मुकाबला अपने पक्ष में करने की क्षमता विकसित की है।

