उत्तराखंड

उत्तराखंड में बिजली फिर महंगी, फरवरी से लागू हुई नई दरें, उपभोक्ताओं पर बढ़ा खर्च का बोझ

Electricity prices rise again in Uttarakhand, new rates come into effect from February, increasing the burden on consumers

देहरादून: उत्तराखंड में बिजली उपभोक्ताओं को एक बार फिर झटका लगा है। उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) ने फरवरी माह के लिए फ्यूल एंड पावर परचेज कॉस्ट एडजस्टमेंट (एफपीपीसीए) के तहत नई बिजली दरें लागू कर दी हैं। नई दरों के अनुसार प्रति यूनिट बिजली 4 पैसे से लेकर 15 पैसे तक महंगी हो गई है। ऊर्जा निगम के प्रबंधन की मंजूरी के बाद यह फैसला लागू किया गया है।

मार्च के बिल में दिखेगा सीधा असर

यह बढ़ोतरी फरवरी महीने में खपत की गई बिजली पर लागू होगी, जिसका असर उपभोक्ताओं को मार्च में आने वाले बिजली बिलों में साफ दिखाई देगा। ऐसे में आने वाले दिनों में लोगों को ज्यादा भुगतान करना पड़ेगा। लगातार बढ़ते बिलों ने पहले से ही महंगाई से जूझ रहे परिवारों की चिंता बढ़ा दी है।

बीते एक साल में बार-बार बढ़ीं दरें

पिछले एक साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो बिजली दरों में बढ़ोतरी का सिलसिला लगातार जारी रहा है। जनवरी 2025 से जनवरी 2026 के बीच कुल 10 बार बिजली महंगी हुई, जबकि केवल तीन बार ही उपभोक्ताओं को थोड़ी राहत मिली। कुछ महीनों में मामूली कटौती जरूर हुई, लेकिन कुल मिलाकर सालभर बिजली उपभोक्ताओं की जेब पर अतिरिक्त भार पड़ता रहा।

वार्षिक टैरिफ बढ़ोतरी से भी नहीं मिली राहत

ऊर्जा निगम की ओर से पहले यह संकेत दिए गए थे कि मासिक एफपीपीसीए समायोजन के कारण वार्षिक टैरिफ में अतिरिक्त बढ़ोतरी नहीं होगी। इसके बावजूद 1 अप्रैल 2025 से बिजली की सालाना दरों में 5.6 प्रतिशत की वृद्धि लागू कर दी गई। इससे उपभोक्ताओं पर दोहरा असर पड़ा- एक ओर सालाना दरें बढ़ीं और दूसरी ओर हर महीने एफपीपीसीए के तहत अतिरिक्त शुल्क जुड़ता रहा।

घरेलू उपभोक्ताओं पर कितना बढ़ा बोझ

नवीन दरों के अनुसार घरेलू उपभोक्ताओं के लिए औसतन 10 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि की गई है। बीपीएल श्रेणी के उपभोक्ताओं पर भी हल्का अतिरिक्त भार डाला गया है। कमर्शियल उपभोक्ताओं के लिए 14 पैसे, सरकारी संस्थानों के लिए 13 पैसे और निजी ट्यूबवेल उपभोक्ताओं के लिए भी मामूली बढ़ोतरी की गई है। कृषि श्रेणी में भी प्रति यूनिट शुल्क बढ़ाया गया है।

उद्योग, रेलवे और ईवी चार्जिंग भी प्रभावित

नई दरों का असर सिर्फ घरेलू उपभोक्ताओं तक सीमित नहीं है। औद्योगिक इकाइयों के लिए 13 पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोतरी की गई है। रेलवे, मिक्स लोड उपभोक्ताओं और इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशनों के लिए भी दरें बढ़ाई गई हैं। अस्थायी बिजली कनेक्शन लेने वालों को सबसे ज्यादा अतिरिक्त भुगतान करना होगा।

बढ़ती महंगाई से उपभोक्ताओं में नाराजगी

लगातार बढ़ रही बिजली दरों को लेकर उपभोक्ताओं में असंतोष बढ़ता जा रहा है। लोगों का कहना है कि रोजमर्रा की जरूरतों के साथ-साथ बिजली के बढ़ते खर्च ने घरेलू बजट बिगाड़ दिया है। कई सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि सरकार और ऊर्जा निगम स्थायी समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाएं।

आगे भी जारी रह सकता है उतार-चढ़ाव

ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक ईंधन और बिजली खरीद की लागत में स्थिरता नहीं आती, तब तक एफपीपीसीए के जरिए दरों में बदलाव जारी रह सकता है। फिलहाल उपभोक्ताओं को बढ़े हुए बिलों के साथ ही आगे की योजना बनानी होगी।

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