Uttarakhand Monsoon Mock Drill: उत्तराखंड में मॉनसून की दस्तक, 13 जिलों के 66 स्थानों पर होगी राज्यस्तरीय मॉक ड्रिल, आपदा से निपटने की तैयारियों का होगा परीक्षण
Uttarakhand Monsoon Mock Drill: With the onset of the monsoon in Uttarakhand, a state-level mock drill will be conducted at 66 locations across 13 districts to test preparedness for handling disasters.
उत्तराखंड में मॉनसून ने पूरी तरह दस्तक दे दी है। पहाड़ों में लगातार बदलते मौसम और बारिश के साथ राज्य सरकार ने संभावित प्राकृतिक आपदाओं से निपटने की तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। हर साल मानसून के दौरान बादल फटना, भूस्खलन, बाढ़, सड़कें बंद होना और नदियों का उफान राज्य के लिए बड़ी चुनौती बनता है। इन्हीं परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए Uttarakhand Monsoon Mock Drill के तहत 2 जुलाई को पूरे राज्य में व्यापक स्तर पर मॉक ड्रिल आयोजित की जाएगी।
यह अभ्यास केवल औपचारिकता नहीं होगा, बल्कि वास्तविक आपदा की स्थिति में विभिन्न विभागों की प्रतिक्रिया क्षमता, संसाधनों की उपलब्धता और राहत एवं बचाव कार्यों की प्रभावशीलता को परखने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा।
13 जिलों के 66 संवेदनशील स्थानों पर होगा अभ्यास
राज्य आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार 2 जुलाई को उत्तराखंड के सभी 13 जिलों के कुल 66 चिन्हित स्थानों पर राज्यस्तरीय मॉक ड्रिल आयोजित की जाएगी। इन स्थानों का चयन पिछले वर्षों में आई प्राकृतिक आपदाओं, भौगोलिक परिस्थितियों और संभावित जोखिमों को ध्यान में रखकर किया गया है।
इस दौरान बाढ़, अतिवृष्टि, क्लाउडबर्स्ट, भूस्खलन, नदी-नालों में अचानक जलस्तर बढ़ने और अन्य आपदा संबंधी परिस्थितियों का कृत्रिम वातावरण तैयार किया जाएगा। संबंधित विभागों को उसी आधार पर राहत एवं बचाव कार्य संचालित करने होंगे ताकि उनकी वास्तविक तैयारी का आकलन किया जा सके।
मुख्यमंत्री करेंगे मॉक ड्रिल की निगरानी
राज्य सरकार ने इस अभ्यास को बेहद गंभीरता से लिया है। जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्वयं इस राज्यस्तरीय मॉक ड्रिल की निगरानी करेंगे और विभिन्न जिलों से प्राप्त फीडबैक के आधार पर तैयारियों की समीक्षा भी करेंगे।
सरकार का मानना है कि यदि किसी विभाग में संसाधनों, प्रशिक्षण या समन्वय की कमी सामने आती है तो उसे मानसून के दौरान किसी वास्तविक आपदा से पहले ही दूर किया जा सकेगा।
मॉक ड्रिल से पहले हुई टेबल टॉप एक्सरसाइज
राज्यस्तरीय अभ्यास से पहले 30 जून को देहरादून स्थित राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (SEOC) में टेबल टॉप एक्सरसाइज आयोजित की गई। इस बैठक में विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने संभावित आपदा परिदृश्यों पर विस्तार से चर्चा की।
इस दौरान यह समझाया गया कि यदि किसी जिले में अचानक बाढ़, बादल फटने या भूस्खलन जैसी स्थिति बनती है तो सूचना प्राप्त होने से लेकर राहत एवं बचाव कार्य शुरू होने तक कौन-कौन सी प्रक्रियाएं अपनाई जाएंगी।
अधिकारियों ने विभिन्न परिस्थितियों के लिए अपनी कार्ययोजनाएं प्रस्तुत कीं और विभागों के बीच समन्वय की रणनीति पर भी चर्चा की।
राहत एवं बचाव संसाधनों की होगी वास्तविक जांच
Uttarakhand Monsoon Mock Drill के दौरान केवल कागजी योजनाओं की समीक्षा नहीं होगी बल्कि उपलब्ध संसाधनों का भी वास्तविक परीक्षण किया जाएगा।
मॉक ड्रिल में निम्न संसाधनों के उपयोग का अभ्यास कराया जाएगा—
- जेसीबी मशीनें
- मोटर बोट और राफ्ट
- जल पुलिस
- गोताखोर दल
- एम्बुलेंस
- राहत वाहन
- संचार प्रणाली
- आपदा राहत उपकरण
इसके अलावा यह भी देखा जाएगा कि किसी आपदा की स्थिति में राहत दल कितनी तेजी से घटनास्थल तक पहुंचते हैं और बचाव कार्य किस प्रकार संचालित किया जाता है।
राहत शिविरों की व्यवस्थाओं पर भी रहेगा फोकस
मॉनसून के दौरान कई बार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करना पड़ता है। ऐसे में राहत शिविरों की व्यवस्थाएं बेहद महत्वपूर्ण होती हैं।
मॉक ड्रिल के दौरान राहत शिविरों में भोजन, पेयजल, चिकित्सा सुविधाएं, स्वच्छता, महिलाओं एवं बच्चों की सुरक्षा तथा अस्थायी आवास जैसी व्यवस्थाओं का भी परीक्षण किया जाएगा।
सरकार चाहती है कि यदि वास्तविक आपदा आती है तो प्रभावित लोगों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
जिलों को दिए गए विशेष दिशा-निर्देश
उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (USDMA) के अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी (क्रियान्वयन) डीआईजी राजकुमार नेगी ने सभी जिलों को मॉक ड्रिल के सफल संचालन के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि प्रत्येक विभाग अपने संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करे और अभ्यास के दौरान किसी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए।
साथ ही स्थानीय प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, लोक निर्माण विभाग, ऊर्जा विभाग, सिंचाई विभाग, वन विभाग और अन्य एजेंसियों के बीच समन्वय मजबूत रखने के निर्देश भी दिए गए।
क्या बोले आपदा प्रबंधन सचिव?
आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव विनोद कुमार सुमन ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर यह राज्यस्तरीय अभ्यास आयोजित किया जा रहा है।
उनके अनुसार इस अभ्यास का उद्देश्य केवल औपचारिक मॉक ड्रिल करना नहीं बल्कि वास्तविक परिस्थितियों में सभी विभागों की तैयारियों का परीक्षण करना है।
उन्होंने कहा कि किसी भी आपदा के दौरान त्वरित निर्णय क्षमता, संसाधनों की उपलब्धता और विभागों के बीच बेहतर समन्वय ही जन-धन की हानि को कम कर सकता है।
क्यों जरूरी है Uttarakhand Monsoon Mock Drill?
उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियां इसे देश के सबसे संवेदनशील राज्यों में शामिल करती हैं। मानसून के दौरान यहां कई जिलों में सड़कें बंद हो जाती हैं, पुल क्षतिग्रस्त हो जाते हैं और कई गांवों का संपर्क टूट जाता है।
ऐसी परिस्थितियों में पहले से अभ्यास होने पर राहत एवं बचाव एजेंसियां बेहतर तरीके से काम कर पाती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित मॉक ड्रिल से आपदा प्रतिक्रिया समय कम होता है, संसाधनों का बेहतर उपयोग होता है और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय मजबूत होता है।
कमियों की होगी पहचान, समय रहते होगा सुधार
इस राज्यस्तरीय अभ्यास के बाद सभी जिलों से विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी। रिपोर्ट में यह दर्ज किया जाएगा कि किन क्षेत्रों में सुधार की आवश्यकता है और किन संसाधनों की कमी महसूस हुई। इन निष्कर्षों के आधार पर राज्य सरकार मानसून के शेष सीजन के लिए अतिरिक्त तैयारियां करेगी ताकि किसी भी आपदा की स्थिति में राहत एवं बचाव कार्य तेज, प्रभावी और व्यवस्थित ढंग से संचालित किए जा सकें।



