Uttarakhandiyat Documentary: ‘हरदा’ ने भगतदा को बताया अपना दूसरा गुरु, डॉक्यूमेंट्री लॉन्च में दिखा राजनीतिक सौहार्द
Uttarakhandiyat Documentary: ‘Harda’ Names Bhagatda as His Second Guru; Political Bonhomie on Display at Documentary Launch
उत्तराखंड की राजनीति में लंबे समय तक सक्रिय रहे पूर्व मुख्यमंत्री Harish Rawat के जीवन, संघर्ष और राजनीतिक यात्रा पर आधारित डॉक्यूमेंट्री ‘उत्तराखंडियत की ओर’ का भव्य लोकार्पण समारोह आयोजित किया गया। इस मौके पर राजनीति के अलग-अलग विचारधाराओं से जुड़े नेताओं ने मंच साझा कर उत्तराखंड की राजनीतिक संस्कृति और सौहार्द का अनोखा उदाहरण पेश किया।
कार्यक्रम का आयोजन ‘आवाम इंडिया’ की ओर से किया गया था। डॉक्यूमेंट्री के पहले भाग का शुभारंभ पूर्व राज्यपाल और पूर्व मुख्यमंत्री Bhagat Singh Koshyari तथा यूकेडी के वरिष्ठ नेता Kashi Singh Airy ने संयुक्त रूप से बटन दबाकर किया। इस दौरान कार्यक्रम में बड़ी संख्या में राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़े लोग मौजूद रहे।
‘उत्तराखंडियत’ की अवधारणा को समझाने की कोशिश
डॉक्यूमेंट्री का मुख्य उद्देश्य उत्तराखंड की संस्कृति, संघर्ष, राजनीतिक चेतना और सामाजिक मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना बताया गया। इसमें पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के जीवन के कई ऐसे पहलुओं को शामिल किया गया है, जो अब तक सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए थे।
कार्यक्रम में बोलते हुए हरीश रावत ने कहा कि इस डॉक्यूमेंट्री के जरिए उनके जीवन के कई महत्वपूर्ण अनुभवों और संघर्षों को सामने लाने का प्रयास किया गया है। उन्होंने कहा कि डॉक्यूमेंट्री बनाने वाली टीम ने उनसे कई ऐसे सवाल पूछे, जिनके जवाब शायद उनके साथ ही चले जाते।
उन्होंने कहा कि डॉक्यूमेंट्री का दूसरा भाग और भी दिलचस्प होगा, क्योंकि उसमें उनके राजनीतिक संघर्ष, आंदोलनों और उत्तराखंड राज्य आंदोलन से जुड़े अनुभवों को विस्तार से दिखाया गया है।
भगत सिंह कोश्यारी को बताया ‘दूसरा गुरु’
कार्यक्रम के दौरान सबसे ज्यादा चर्चा उस वक्त हुई जब हरीश रावत ने मंच से भगत सिंह कोश्यारी की खुलकर तारीफ की और उन्हें अपना “दूसरा गुरु” बताया। उन्होंने कहा कि राजनीति में रहते हुए उन्होंने भगतदा को बेहद करीब से देखा और उनसे बहुत कुछ सीखा।
हरीश रावत ने कहा कि जब भगत सिंह कोश्यारी अपने संगठन को मजबूत करने का काम कर रहे थे, तब वे उन्हें ध्यान से देखा करते थे। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड को समझने वाले नेताओं में भगतदा का नाम बेहद अहम है।
उन्होंने यहां तक कहा कि अगर 2002 में भगत सिंह कोश्यारी मुख्यमंत्री बने रहते तो उत्तराखंड की राजनीतिक और प्रशासनिक स्थिति शायद कुछ और होती। यह बयान कार्यक्रम का सबसे चर्चित हिस्सा बन गया।
राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के बावजूद सम्मान
Uttarakhandiyat Documentary के मंच पर राजनीति से ऊपर उठकर दिखाई गई आपसी सम्मान की भावना ने लोगों का ध्यान खींचा। कांग्रेस और भाजपा की अलग विचारधाराओं के बावजूद दोनों वरिष्ठ नेताओं के बीच दिखा सम्मान कार्यक्रम की खास बात रही।
हरीश रावत ने कहा कि राजनीति में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन व्यक्तिगत रिश्ते और सामाजिक सम्मान हमेशा बने रहने चाहिए। उन्होंने कहा कि भगत सिंह कोश्यारी और काशी सिंह ऐरी का इस कार्यक्रम में आना उत्तराखंड की राजनीतिक संस्कृति के लिए सकारात्मक संदेश है।
‘हरदा’ ने सुनाए राजनीतिक संघर्ष के किस्से
कार्यक्रम के दौरान हरीश रावत ने अपने राजनीतिक जीवन के कई रोचक किस्से भी साझा किए। उन्होंने कहा कि जब वे पहली बार सांसद बने थे, तब भगत सिंह कोश्यारी उन्हें समय-समय पर मार्गदर्शन देते थे।
उन्होंने बताया कि उस दौर में वे कई वैचारिक मुद्दों पर भगतदा की आलोचना भी करते थे। इसके जवाब में उन्हें पोस्टकार्ड के जरिए इतिहास और तथ्यों की जानकारी भेजी जाती थी। इससे उन्हें समझ आया कि किसी भी व्यक्ति या विचारधारा की आलोचना करने से पहले उसके इतिहास को समझना जरूरी होता है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि राजनीति में कई बार उनके भीतर अहंकार भी आया, लेकिन जीवन के संघर्षों और हार ने उन्हें सही रास्ता दिखाया।
भगतदा ने भी की हरदा की जमकर तारीफ
कार्यक्रम में संबोधन के दौरान भगत सिंह कोश्यारी ने भी हरीश रावत की राजनीतिक यात्रा और जनसंपर्क क्षमता की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि जब हरीश रावत पहली बार सांसद बने थे, तब वे बेहद सक्रिय और जमीनी नेता के रूप में उभरे। उन्होंने कहा कि संसद में नए सांसद आमतौर पर कम बोलते हैं, लेकिन हरीश रावत ने शुरुआत से ही प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई। वे प्रश्नकाल में लगातार सवाल उठाते थे और जनता से सीधा संवाद बनाए रखते थे। भगतदा ने कहा कि हरदा ने गांव-गांव जाकर लोगों से जुड़ने की राजनीति की, जो आज के दौर में बहुत कम देखने को मिलती है।
अटल बिहारी वाजपेयी का भी किया जिक्र
कार्यक्रम में भगत सिंह कोश्यारी ने एक पुराना किस्सा साझा करते हुए बताया कि 1982 में जब Atal Bihari Vajpayee पिथौरागढ़ पहुंचे थे, तब उन्होंने युवा सांसद हरीश रावत की खूब तारीफ की थी।
उन्होंने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी ने उस समय कहा था कि यह युवा सांसद भविष्य में बड़ा नेता बन सकता है। भगतदा ने कहा कि इतनी बड़ी हस्ती द्वारा किसी युवा नेता की सार्वजनिक प्रशंसा करना उस दौर में बहुत बड़ी बात मानी जाती थी।
उत्तराखंडियत और राजनीति पर चर्चा
Uttarakhandiyat Documentary केवल एक राजनीतिक डॉक्यूमेंट्री नहीं बल्कि उत्तराखंड की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान को समझने की कोशिश भी मानी जा रही है। कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि उत्तराखंड की राजनीति को उसकी मूल भावना और पहाड़ी संस्कृति से जोड़कर देखने की जरूरत है।
हरीश रावत ने चिंता जताई कि उत्तराखंड धीरे-धीरे अपनी अलग राजनीतिक सोच और गवर्नेंस मॉडल से दूर होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य को अपनी भौगोलिक, सांस्कृतिक और सामाजिक परिस्थितियों के अनुसार विकास मॉडल तैयार करना चाहिए।
सौहार्द की राजनीति का संदेश
कार्यक्रम के अंत में नेताओं ने कहा कि उत्तराखंड की राजनीति की सबसे बड़ी ताकत उसका सामाजिक सौहार्द और आपसी सम्मान रहा है। आज जब देशभर में राजनीतिक कटुता बढ़ रही है, ऐसे समय में यह कार्यक्रम सकारात्मक संदेश देने वाला साबित हुआ। Uttarakhandiyat Documentary के जरिए न केवल हरीश रावत के राजनीतिक जीवन को सामने लाया गया, बल्कि उत्तराखंड की उस राजनीति को भी याद किया गया, जहां वैचारिक मतभेदों के बावजूद व्यक्तिगत सम्मान कायम रहता था।



