Uttarakhand: छोटे अपराधों पर घटेगी जेल की सजा, बढ़ेगा जुर्माना 3 साल की कैद अब 2 महीने करने का प्रस्ताव
Uttarakhand: jail terms for minor offenses will be reduced while fines will be increased; a proposal has been made to cut the 3-year prison sentence down to 2 months.
Uttarakhand: उत्तराखंड में छोटे और नियामकीय अपराधों से जुड़े कानूनों में बदलाव की तैयारी है। राज्य सरकार ने विधानसभा में उत्तराखंड जन विश्वास उपबंधों का संशोधन विधेयक पेश किया है। इसके तहत कई मामलों में जेल की अधिकतम सजा कम करने और जुर्माने की राशि बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया है। मत्स्य अधिनियम के एक प्रावधान में अधिकतम तीन साल की कैद घटाकर दो महीने करने की तैयारी है। वहीं, सार्वजनिक संपत्ति पर पोस्टर चिपकाने, विज्ञापन लगाने या दीवारों पर लिखने जैसे मामलों में जुर्माना बढ़ाकर 20 हजार रुपये करने का प्रस्ताव है।
मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को भराड़ीसैंण में आयोजित विधानसभा सत्र के दौरान यह संशोधन विधेयक सदन में पेश किया गया। सरकार का उद्देश्य छोटे उल्लंघनों के लिए दंड व्यवस्था में बदलाव करना और कारोबार से जुड़े कानूनी प्रावधानों को सरल बनाना बताया गया है। हालांकि, प्रस्तावित बदलावों को लागू कानून मानने से पहले विधेयक के पारित होने और उसके प्रभावी होने की प्रक्रिया पूरी होना जरूरी है।
Uttarakhand: Fisheries Act में 3 साल की जेल घटकर 2 महीने करने का प्रस्ताव
उत्तराखंड मत्स्य अधिनियम, 2003 में कई महत्वपूर्ण बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं। इसके तहत विषाक्त पदार्थों का इस्तेमाल कर मछलियों को नुकसान पहुंचाने जैसे उल्लंघनों में अधिकतम तीन वर्ष की कैद को घटाकर दो महीने करने का प्रस्ताव है।
इसके साथ ही अलग-अलग प्रावधानों में जुर्माने की राशि बढ़ाई जाएगी। जिन मामलों में पहले 500 रुपये का जुर्माना था, उसे बढ़ाकर 5,000 रुपये करने का प्रस्ताव है। इसी तरह 1,000 रुपये के जुर्माने को 10,000 रुपये और 2,000 रुपये के जुर्माने को 20,000 रुपये किया जा सकता है।
इस बदलाव का अर्थ यह नहीं है कि मत्स्य संसाधनों को नुकसान पहुंचाने वाले कार्यों को अपराध की श्रेणी से पूरी तरह बाहर किया जा रहा है। प्रस्ताव में कारावास की अधिकतम अवधि कम करने के साथ आर्थिक दंड को अधिक रखने की व्यवस्था की गई है।
Uttarakhand: सार्वजनिक संपत्ति पर Poster चिपकाना पड़ेगा महंगा
प्रस्तावित संशोधनों का असर सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले मामलों पर भी पड़ेगा। उत्तराखंड लोक संपत्ति विरूपण निवारण अधिनियम के तहत सार्वजनिक स्थानों पर पोस्टर चिपकाना, दीवारों पर लिखना, रंग लगाना या अनधिकृत विज्ञापन लगाकर संपत्ति का स्वरूप बिगाड़ना दंडनीय है।
मौजूदा प्रावधान में ऐसे उल्लंघनों पर अधिकतम एक वर्ष की कैद या 10 हजार रुपये तक जुर्माना अथवा दोनों का प्रावधान है। संशोधन विधेयक में जेल की अधिकतम अवधि घटाकर तीन महीने और जुर्माने की अधिकतम राशि बढ़ाकर 20 हजार रुपये करने का प्रस्ताव है।
इसका असर सार्वजनिक दीवारों, सरकारी संपत्तियों और अन्य सार्वजनिक दृश्य में आने वाली संपत्तियों पर अनधिकृत प्रचार सामग्री लगाने वालों पर पड़ सकता है।
संपत्ति को पहले जैसी स्थिति में लाने का खर्च भी देना होगा
सार्वजनिक संपत्ति को विरूपित करने के मामले में केवल जुर्माना भरना ही पर्याप्त नहीं होगा। प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार, संपत्ति को उसकी मूल स्थिति में वापस लाने पर होने वाला खर्च भी दोषी से वसूला जा सकेगा।
उदाहरण के तौर पर, किसी सार्वजनिक दीवार पर अनधिकृत पोस्टर चिपकाने या पेंट से लिखने के बाद उसकी सफाई और मरम्मत पर खर्च आता है, तो संबंधित प्रावधानों के तहत उस खर्च की वसूली भी की जा सकती है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य सार्वजनिक संपत्ति को हुए नुकसान की भरपाई करना है। हालांकि, किसी विशेष मामले में कितना जुर्माना लगेगा और कितनी राशि वसूली जाएगी, यह लागू कानूनी प्रावधानों तथा संबंधित कार्रवाई पर निर्भर करेगा।
Uttarakhand: Water Management Act में एक साल की जेल घटकर छह महीने
उत्तराखंड जल प्रबंधन एवं विनियामक अधिनियम, 2013 के एक प्रावधान में भी कारावास की अधिकतम अवधि घटाने का प्रस्ताव है।
संशोधन के अनुसार, संबंधित उल्लंघन के लिए अधिकतम एक वर्ष की कैद को घटाकर छह महीने किया जाएगा। यह बदलाव जल प्रबंधन और विनियमन से संबंधित निर्धारित कानूनी प्रावधानों पर लागू होगा।
जल संसाधनों के प्रबंधन में नियमों का पालन महत्वपूर्ण है। ऐसे में सजा की अवधि घटाने का प्रस्ताव संबंधित उल्लंघनों को स्वतः वैध नहीं बनाता, बल्कि उनके लिए निर्धारित दंड की प्रकृति में बदलाव करता है।
अधिक कीमत वसूलने पर भी बढ़ सकता है जुर्माना
प्रस्तावित बदलावों में निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत वसूलने से जुड़े प्रावधान भी शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार, ऐसे मामलों में अतिरिक्त वसूली गई राशि के दस गुना तक जुर्माना लगाने की व्यवस्था प्रस्तावित है।
इसके अलावा उत्तर प्रदेश पाठ्य पुस्तक अधिनियम, 1978 के उत्तराखंड में लागू प्रावधानों की धारा आठ में अधिकतम 10 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रस्ताव रखा गया है।
इन संशोधनों का उद्देश्य संबंधित कानूनों के उल्लंघन पर आर्थिक दंड की व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना है। अलग-अलग मामलों में लागू जुर्माना संबंधित अधिनियम की धारा और उल्लंघन की प्रकृति पर निर्भर करेगा।
Jan Vishwas Amendment Bill का क्या है उद्देश्य?
जन विश्वास से जुड़े कानूनी सुधारों का मुख्य विचार छोटे और प्रक्रियागत उल्लंघनों के लिए दंड व्यवस्था को अधिक अनुपातिक बनाना है। ऐसे मामलों में जहां लंबे कारावास की आवश्यकता कम मानी जाती है, वहां आर्थिक दंड या अन्य नियामकीय कार्रवाई को प्राथमिकता देने पर जोर दिया जाता है।
केंद्र सरकार ने भी जन विश्वास कानूनों के माध्यम से कई केंद्रीय अधिनियमों में छोटे उल्लंघनों के लिए आपराधिक दंड कम करने की दिशा में कदम उठाए हैं। हालांकि, उत्तराखंड विधानसभा में पेश विधेयक राज्य में लागू संबंधित कानूनों के संशोधन से जुड़ा अलग विधायी प्रस्ताव है।
सरकार की ओर से कारोबार को आसान बनाने और कानूनी अनुपालन की प्रक्रिया सरल करने को इस पहल का प्रमुख उद्देश्य बताया गया है।
क्या अब छोटे अपराधों में जेल नहीं होगी?
इस सवाल का जवाब है कि प्रस्तावित बदलावों में सभी संबंधित अपराधों के लिए जेल की सजा पूरी तरह समाप्त नहीं की गई है।
मत्स्य अधिनियम के संबंधित प्रावधान में तीन साल की अधिकतम कैद को दो महीने, सार्वजनिक संपत्ति विरूपण के मामले में एक साल को तीन महीने और जल प्रबंधन कानून के संबंधित प्रावधान में एक साल को छह महीने करने का प्रस्ताव है।
इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि इन मामलों में अब केवल जुर्माना लगेगा। प्रस्तावित कानून के अनुसार कुछ उल्लंघनों में जेल की सजा का विकल्प बना रह सकता है।
इसके अलावा, यह संशोधन सभी प्रकार के अपराधों पर लागू नहीं होगा। बदलाव केवल उन कानूनों और धाराओं से संबंधित होंगे जिन्हें संशोधन विधेयक में शामिल किया गया है।
विधेयक लागू होने के बाद बदलेगी दंड व्यवस्था
उत्तराखंड विधानसभा में पेश संशोधन विधेयक के माध्यम से सरकार छोटे अपराधों में कारावास की अवधि कम करने और आर्थिक दंड बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
सार्वजनिक संपत्ति पर पोस्टर चिपकाने और दीवारों पर लिखने के मामले में 20 हजार रुपये तक जुर्माने का प्रस्ताव आम लोगों, प्रचार सामग्री लगाने वालों और संबंधित संस्थाओं के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
वहीं, मत्स्य अधिनियम और जल प्रबंधन कानून में प्रस्तावित बदलाव नियामकीय उल्लंघनों की दंड व्यवस्था को प्रभावित कर सकते हैं।
फिलहाल ये विधानसभा में पेश किए गए प्रस्ताव हैं। इनके अंतिम स्वरूप और लागू होने की तारीख की पुष्टि विधायी प्रक्रिया पूरी होने तथा आधिकारिक अधिसूचना जारी होने के बाद ही होगी।



