Gairsain Assembly Session 2026: गैरसैंण में आज से धामी सरकार का विधानसभा सत्र, 7000 करोड़ के अनुपूरक बजट पर रहेगी नजर
Dhami government's assembly session begins today in Gairsain; focus will be on the ₹7,000 crore supplementary budget.
भराड़ीसैंण में विधानसभा सत्र की तैयारियां पूरी
गैरसैंण के भराड़ीसैंण स्थित विधानसभा परिसर में सत्र के लिए तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। विधानसभा सचिवालय के अधिकारी और कर्मचारी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने में जुटे रहे। विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण ने सोमवार को परिसर पहुंचकर तैयारियों का जायजा लिया।
विधानसभा अध्यक्ष के अनुसार, सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से संचालित करने के लिए जरूरी व्यवस्थाएं की गई हैं। उन्होंने कहा कि विधायकों को अपने क्षेत्रों और प्रदेश से जुड़े मुद्दे उठाने का अवसर दिया जाएगा। विधानसभा सचिवालय को 31 विधायकों की ओर से 400 से अधिक सवाल प्राप्त हुए हैं। अलग-अलग रिपोर्टों में सवालों की संख्या 426 से लेकर 445 से अधिक बताई गई है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी सत्र में शामिल होने के लिए भराड़ीसैंण पहुंच गए हैं। सरकार के लिए यह सत्र इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले इसे मौजूदा कार्यकाल के अहम सत्रों में गिना जा रहा है।
7,000 करोड़ रुपये से अधिक का अनुपूरक बजट होगा पेश
Gairsain Assembly Session 2026 का सबसे महत्वपूर्ण एजेंडा अनुपूरक बजट माना जा रहा है। धामी सरकार सदन में 7,000 करोड़ रुपये से अधिक का अनुपूरक बजट पेश करेगी। अनुपूरक बजट के माध्यम से सरकार वित्तीय वर्ष के दौरान उन खर्चों के लिए अतिरिक्त प्रावधान करती है, जिनके लिए मूल बजट में पर्याप्त राशि निर्धारित नहीं की गई हो या अतिरिक्त धन की जरूरत पड़ती हो।
इस बजट में किन विभागों को कितना अतिरिक्त आवंटन मिलेगा, यह सदन में पेश किए जाने वाले दस्तावेजों और आगे की विधायी प्रक्रिया से स्पष्ट होगा। विभिन्न विभागों की जरूरतों, चल रही योजनाओं और सरकारी प्रतिबद्धताओं के लिहाज से इस बजट पर नजर रहेगी।
सत्र के पहले दिन दिवंगत जनप्रतिनिधियों को श्रद्धांजलि देने का कार्यक्रम निर्धारित है। इसके बाद भोजनावकाश के पश्चात सरकार अनुपूरक बजट सदन में पेश करेगी। पहले दिन प्रश्नकाल नहीं होने की जानकारी भी सामने आई है।
आठ विधेयकों पर भी रहेगी नजर
दो दिवसीय विधानसभा सत्र में सरकार आठ विधेयक सदन के पटल पर रखने की तैयारी में है। इनमें समान नागरिक संहिता से संबंधित विधायी कार्यवाही, उत्तराखंड जनविश्वास अधिनियम में संशोधन और माल एवं सेवा कर यानी जीएसटी से जुड़े विधेयक शामिल बताए गए हैं। इसके अतिरिक्त विभिन्न विभागों और बोर्डों की वार्षिक रिपोर्ट भी सदन में प्रस्तुत की जा सकती हैं।
विधेयकों को सदन में पेश करने और उन पर आगे की कार्रवाई की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार होगी। कौन-सा विधेयक किस चरण तक पहुंचेगा, यह सत्र के दौरान तय होने वाले कार्यसूची और सदन की कार्यवाही पर निर्भर करेगा।
सरकार के लिए कम समय में बजट और विधायी कामकाज पूरा करना एक बड़ी चुनौती होगी। वहीं, विपक्ष चाहता है कि प्रदेश से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर पर्याप्त चर्चा हो और सरकार से जवाब मांगे जाएं।
बेरोजगारी और कानून-व्यवस्था पर सरकार को घेरेगा विपक्ष
Gairsain Assembly Session 2026 के दौरान विपक्ष के हमलावर रुख अपनाने की संभावना है। कांग्रेस ने बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, महंगाई, कानून-व्यवस्था, भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं और सरकारी जमीन से जुड़े आरोपों को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी की है।
इसके अलावा अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े सवाल भी राजनीतिक बहस का हिस्सा बन सकते हैं। विपक्ष इन मुद्दों पर सरकार से जवाब मांग सकता है। हालांकि, सदन में किन विषयों पर कितनी चर्चा होगी, यह कार्यसूची और विधानसभा अध्यक्ष के निर्देशों के अनुसार तय होगा।
कांग्रेस ने विधानसभा सत्र के पहले दिन सरकार के खिलाफ विधानसभा घेराव का भी ऐलान किया है। इससे सदन के भीतर और बाहर राजनीतिक गतिविधियां तेज रहने की संभावना है। भाजपा की ओर से भी विपक्ष के सवालों का जवाब देने की तैयारी की गई है।
दो दिवसीय सत्र की अवधि पर उठे सवाल
सत्र को केवल दो दिन तक सीमित रखने को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। बहुजन समाज पार्टी के विधायक शहजाद ने कम अवधि पर चिंता जताते हुए कहा कि इतने कम समय में सभी जनसमस्याओं पर विस्तार से चर्चा करना मुश्किल हो सकता है।
विपक्ष का तर्क है कि विधायकों के पास बड़ी संख्या में सवाल हैं और प्रदेश में रोजगार, पलायन, महंगाई, आपदा प्रबंधन तथा बुनियादी सुविधाओं जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा जरूरी है। दूसरी ओर, विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण ने सदन की कार्यवाही को सुचारु रूप से चलाने और सभी सदस्यों को अपने मुद्दे रखने का अवसर देने की बात कही है।
सत्र की अवधि बढ़ाई जाएगी या नहीं, इस पर अंतिम निर्णय कार्यमंत्रणा समिति और संबंधित प्रक्रिया के अनुसार होगा।
गैरसैंण की राजधानी संबंधी बहस फिर चर्चा में
गैरसैंण में विधानसभा सत्र आयोजित होने के साथ ही राजधानी का मुद्दा भी चर्चा में है। उत्तराखंड गठन के बाद देहरादून को अस्थायी राजधानी बनाया गया था। मार्च 2020 में तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की सरकार ने गैरसैंण के भराड़ीसैंण को राज्य की ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित किया था।
इसके बावजूद राज्य के प्रमुख प्रशासनिक कार्यालय और सचिवालय देहरादून में ही संचालित होते हैं। गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने की मांग राज्य गठन के आंदोलन के समय से उठती रही है। पहाड़ी क्षेत्रों के लोगों का मानना है कि राजधानी और प्रशासनिक गतिविधियों को पहाड़ के करीब लाने से क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा मिल सकता है।
ऐसे में Gairsain Assembly Session 2026 केवल बजट और विधेयकों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राज्य में क्षेत्रीय विकास और राजनीतिक प्राथमिकताओं से जुड़ी बहस को भी सामने लाता है।
सत्र से प्रदेश को क्या उम्मीदें?
दो दिनों तक चलने वाले इस सत्र में सरकार के सामने वित्तीय और विधायी कामकाज पूरा करने की चुनौती है, जबकि विपक्ष जनहित के मुद्दों पर चर्चा और जवाबदेही की मांग कर रहा है। अनुपूरक बजट में होने वाले प्रावधान, विधेयकों पर आगे की कार्रवाई और सदन में उठने वाले सवाल आगामी दिनों की राजनीतिक दिशा को प्रभावित कर सकते हैं।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि धामी सरकार बजट और विधायी एजेंडे को किस तरह आगे बढ़ाती है और विपक्ष के सवालों पर क्या जवाब देती है। भराड़ीसैंण में होने वाली कार्यवाही से प्रदेश की जनता को रोजगार, विकास, प्रशासन और जनकल्याण से जुड़े मुद्दों पर महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की उम्मीद है।


