अभिनेत्री उर्मिला सनावर के खिलाफ एक और मुकदमा दर्ज, राज्यपाल दुष्यंत गौतम समेत तीन लोगों की छवि धूमिल करने का आरोप
Another case filed against actress Urmila Sanawar, accused of tarnishing the reputations of three individuals, including Governor Dushyant Gautam.

देहरादून: उत्तराखंड में अभिनेत्री उर्मिला सनावर की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। देहरादून में उनके खिलाफ एक और मुकदमा दर्ज किया गया है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि सोशल मीडिया पर प्रसारित एक वीडियो में उर्मिला सनावर ने सिक्किम के राज्यपाल दुष्यंत कुमार गौतम समेत तीन लोगों के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक और मानहानिकारक बयान दिए। पुलिस ने शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े विवाद के कारण उर्मिला सनावर पहले से ही चर्चा में हैं।
शिकायत के आधार पर दर्ज हुआ मुकदमा
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, देहरादून की नगर कोतवाली में यह मामला मोती बाजार निवासी सागर की शिकायत पर दर्ज किया गया। शिकायतकर्ता ने पुलिस को बताया कि सोशल मीडिया पर एक वीडियो प्रसारित हो रहा है, जिसमें उर्मिला सनावर मीडिया के सामने बयान देती दिखाई दे रही हैं। शिकायत में इन बयानों को लेकर आपत्ति जताई गई है।
आरोप है कि वीडियो में सिक्किम के राज्यपाल दुष्यंत कुमार गौतम, भाजपा के वरिष्ठ नेता बीएल संतोष और आरती गौड़ के संबंध में आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं। शिकायतकर्ता का कहना है कि इस तरह के बयानों से संबंधित व्यक्तियों की सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंच सकता है।
हालांकि, ये आरोप शिकायत में लगाए गए हैं। इनकी सत्यता की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। पुलिस जांच के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
वीडियो और सोशल मीडिया पर प्रसार की जांच
पुलिस अब उस वीडियो की सामग्री और उसके सोशल मीडिया पर प्रसारित होने से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि वीडियो किस परिस्थिति में बनाया गया, उसमें क्या कहा गया और उसे किन लोगों ने विभिन्न प्लेटफॉर्म पर साझा किया।
मामले में अन्य लोगों की संभावित भूमिका की भी पड़ताल की जा सकती है। डिजिटल सामग्री से जुड़े मामलों में वीडियो का मूल स्रोत, उसकी प्रमाणिकता और उपलब्ध इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जांच के महत्वपूर्ण हिस्से होते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 79, 352, 353 और 356 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। जांच की जिम्मेदारी संबंधित पुलिस अधिकारी को सौंपी गई है। आगे की कार्रवाई जांच में सामने आने वाले तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी।
अंकिता भंडारी हत्याकांड से भी जुड़ा है विवाद
उर्मिला सनावर का नाम उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े घटनाक्रमों के कारण भी सुर्खियों में रहा है। उन्होंने सोशल मीडिया पर कथित ऑडियो और वीडियो साझा किए थे, जिनमें एक कथित वीआईपी का जिक्र होने के बाद प्रदेश में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस तेज हुई।
अंकिता भंडारी पौड़ी गढ़वाल जिले के एक रिसॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम करती थीं। सितंबर 2022 में उनकी हत्या कर दी गई थी। इस मामले में रिसॉर्ट मालिक पुलकित आर्य और उसके दो कर्मचारियों को मई 2025 में अदालत ने दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
हत्याकांड से जुड़े कथित ऑडियो और वीआईपी के दावे की जांच को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। इन दावों को स्थापित तथ्य मानने के बजाय जांच और संबंधित कानूनी प्रक्रिया के संदर्भ में देखना जरूरी है।
हरिद्वार के मामले में गिरफ्तारी की भी खबर
इस बीच, उर्मिला सनावर के खिलाफ हरिद्वार में दर्ज एक अलग मामले में गिरफ्तारी की खबर भी सामने आई है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पूर्व विधायक सुरेश राठौर की बेटी दीपिका राठौर ने सोशल मीडिया पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों, परिवार की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने, पांच करोड़ रुपये की मांग और धमकी देने के आरोप लगाए थे।
इस शिकायत के आधार पर हरिद्वार की रानीपुर कोतवाली में मामला दर्ज किया गया था। पुलिस ने रविवार को उत्तर प्रदेश के सहारनपुर स्थित उनके आवास से उर्मिला सनावर को हिरासत में लेकर गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, मामले में इस्तेमाल किया गया मोबाइल फोन भी बरामद किया गया।
हरिद्वार का यह मामला देहरादून में दर्ज नए मुकदमे से अलग है। दोनों मामलों की जांच संबंधित पुलिस इकाइयों द्वारा की जा रही है।
जांच के बाद स्पष्ट होगी स्थिति
देहरादून में दर्ज नए मुकदमे के बाद अब पुलिस वीडियो, कथित बयानों और उनके प्रसार से जुड़े तथ्यों की जांच कर रही है। फिलहाल शिकायत में लगाए गए आरोपों को अदालत में सिद्ध होना बाकी है।
आने वाले दिनों में जांच के दौरान सामने आने वाले साक्ष्य और पुलिस की आधिकारिक जानकारी इस मामले की दिशा तय करेंगे। संबंधित पक्षों का जवाब और कानूनी प्रक्रिया के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकेगी।

