Uttarakhand High Court: गिरधारी लाल साहू को फिलहाल राहत नहीं, गिरफ्तारी पर रोक और FIR रद्द करने की याचिका दूसरी पीठ को भेजी
Uttarakhand High Court: No immediate relief for Girdhari Lal Sahu, petition seeking a stay on his arrest and quashing of the FIR referred to another bench.
Uttarakhand High Court: उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या के पति गिरधारी लाल साहू को हाईकोर्ट से फिलहाल राहत नहीं मिली है। बुधवार, 28 अक्टूबर 2026 को उत्तराखंड हाईकोर्ट में साहू की उस याचिका पर सुनवाई हुई, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ दर्ज मुकदमे को निरस्त करने और गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग की थी। न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की एकलपीठ ने मामले को दूसरी पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए भेज दिया।
अब मुख्य न्यायाधीश की ओर से मामले को दूसरी पीठ को आवंटित किए जाने के बाद आगे की सुनवाई होगी। अदालत की इस कार्यवाही में साहू को गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण मिलने की पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि, याचिका दूसरी पीठ को भेजे जाने का अर्थ यह नहीं है कि अदालत ने मुकदमे की वैधता या आरोपों के संबंध में अंतिम फैसला सुना दिया है।
Uttarakhand High Court: High Court में गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग
गिरधारी लाल साहू ने अपने खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को चुनौती देते हुए उत्तराखंड हाईकोर्ट का रुख किया था। उनकी ओर से दाखिल याचिका में कहा गया कि मुकदमे में लगाए गए आरोप निराधार हैं और उन्हें गलत तरीके से फंसाया गया है।
याचिका के माध्यम से साहू ने दो प्रमुख राहत मांगी थीं। पहली, उनके खिलाफ दर्ज मुकदमे को निरस्त किया जाए। दूसरी, मामले की कानूनी प्रक्रिया के दौरान उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगाई जाए।
बुधवार को न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। इसके बाद याचिका को दूसरी पीठ के पास भेजने की प्रक्रिया अपनाई गई।
इस घटनाक्रम के बाद साहू की ओर से मांगी गई राहत पर अगली सुनवाई महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल मुकदमे और पुलिस जांच की प्रक्रिया जारी है।
Uttarakhand High Court: Rekha Arya ने पति पर लगाए हैं गंभीर आरोप
उत्तराखंड सरकार में कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने अपने पति गिरधारी लाल साहू के खिलाफ कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उनकी शिकायत के आधार पर देहरादून के कैंट थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था।
शिकायत में आरोप लगाया गया कि साहू ने विवाह के समय खुद को अविवाहित बताया था, जबकि वह पहले से विवाहित थे। इसके अलावा जालसाजी, दस्तावेजों में कथित फर्जीवाड़े, जान से मारने की धमकी और जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल से संबंधित आरोप भी लगाए गए हैं।
मंत्री ने कंपनियों के निदेशक पदों से हटाने के लिए कथित तौर पर फर्जी हस्ताक्षर और दस्तावेजों का इस्तेमाल किए जाने का भी आरोप लगाया है।
ये सभी शिकायत और जांच से जुड़े आरोप हैं। इन्हें अदालत द्वारा सिद्ध किए गए अपराध के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
Girdhari Lal Sahu ने आरोपों को बताया झूठा
दूसरी ओर, गिरधारी लाल साहू ने अपने खिलाफ दर्ज मुकदमे को गलत बताया है। हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में उनकी ओर से कहा गया कि वर्ष 2004 में रेखा आर्या से उनका विवाह हुआ था और उसके बाद से दोनों साथ रह रहे थे।
साहू का दावा है कि उन्हें गलत तरीके से फंसाया गया है। उन्होंने अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों से इनकार किया है और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
साहू की ओर से रेखा आर्या पर भी वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं। उन्होंने मंत्री बनने के बाद कथित तौर पर 210 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति अर्जित किए जाने का दावा करते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
हालांकि, साहू के इन आरोपों की भी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। दोनों पक्षों के दावों की सत्यता जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही निर्धारित होगी।
Uttarakhand High Court: निचली अदालत से खारिज हो चुकी है अग्रिम जमानत याचिका
हाईकोर्ट में सुनवाई से पहले गिरधारी लाल साहू को देहरादून की विशेष एससी-एसटी अदालत से भी राहत नहीं मिली थी।
18 अक्टूबर को विशेष अदालत ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। उस सुनवाई में बचाव पक्ष ने कहा था कि मामला पति-पत्नी के बीच घरेलू और आर्थिक विवाद से जुड़ा है।
बचाव पक्ष ने कथित जातिसूचक टिप्पणी के स्थान और परिस्थितियों को लेकर भी सवाल उठाए थे। दूसरी ओर, अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि शिकायत में अन्य कर्मचारियों की मौजूदगी में अपमानजनक शब्दों के इस्तेमाल का आरोप लगाया गया है।
विशेष अदालत ने उपलब्ध अभिलेखों और दलीलों पर विचार करते हुए प्रथम दृष्टया एससी-एसटी एक्ट के प्रावधान लागू होने की संभावना पाई और अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया।
यह आदेश अग्रिम जमानत से संबंधित था, न कि मामले में दोषसिद्धि का अंतिम फैसला।
SIT ने जांच तेज की, कर्मचारियों के बयान दर्ज
रेखा आर्या और गिरधारी लाल साहू के बीच चल रहे विवाद की जांच विशेष जांच दल यानी SIT कर रहा है।
जांच टीम ने मंत्री के बयान दर्ज करने के साथ संबंधित दस्तावेज और अन्य साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया शुरू की है। रिपोर्टों के अनुसार, SIT ने मंत्री के स्टाफ के बयान भी दर्ज किए हैं।
कुछ कर्मचारियों ने कथित जातिसूचक टिप्पणियों से संबंधित आरोपों के बारे में जानकारी दी है। जांच एजेंसी इन बयानों का अन्य उपलब्ध साक्ष्यों से मिलान कर रही है।
इसके अलावा बरेली से संबंधित दस्तावेज जुटाए गए हैं। कंपनियों के दस्तावेजों और कथित फर्जी हस्ताक्षरों से जुड़े आरोपों की भी जांच की जा रही है।
जांच में सामने आने वाली जानकारी के आधार पर ही आगे की पुलिस कार्रवाई तय होगी।
कथित Audio Recording की भी जांच
इस विवाद में सोशल मीडिया पर सामने आई एक कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग भी चर्चा का विषय रही है।
रेखा आर्या की ओर से इस रिकॉर्डिंग को आरोपों से जोड़कर प्रस्तुत किया गया था। वहीं, गिरधारी लाल साहू ने इसकी प्रामाणिकता पर सवाल उठाए हैं और इसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से तैयार किए जाने का दावा किया है।
पुलिस इस रिकॉर्डिंग से संबंधित तथ्यों की जांच कर रही है। रिपोर्टों के अनुसार, रिकॉर्डिंग की फॉरेंसिक जांच और आवाज के मिलान की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण हो सकती है।
जब तक तकनीकी जांच से रिकॉर्डिंग की प्रामाणिकता स्थापित नहीं होती, तब तक उसे किसी व्यक्ति की आवाज का प्रमाणित रिकॉर्ड मानना उचित नहीं होगा।
दूसरी पीठ को मामला भेजने का क्या मतलब?
हाईकोर्ट की एक पीठ से दूसरी पीठ को मामला भेजना न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है। इसके बाद संबंधित मामले को उचित पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाता है।
गिरधारी लाल साहू के मामले में भी अब मुख्य न्यायाधीश के स्तर से पीठ आवंटन के बाद आगे की सुनवाई होगी।
इस प्रक्रिया का अर्थ यह नहीं है कि अदालत ने याचिका स्वीकार कर ली है या उसे अंतिम रूप से खारिज कर दिया है। यह भी नहीं कहा जा सकता कि साहू के खिलाफ लगाए गए आरोप अदालत में सिद्ध हो चुके हैं।
अगली सुनवाई में याचिका के कानूनी आधार, गिरफ्तारी पर रोक की मांग और प्राथमिकी निरस्त करने के अनुरोध पर आगे विचार हो सकता है।
अब अगली सुनवाई और SIT की कार्रवाई पर नजर
गिरधारी लाल साहू को बुधवार की सुनवाई में गिरफ्तारी पर रोक या मुकदमा निरस्त करने जैसी कोई राहत नहीं मिली। हाईकोर्ट ने मामले को दूसरी पीठ के समक्ष भेज दिया है।
दूसरी ओर, SIT शिकायत में लगाए गए आरोपों, दस्तावेजों, कर्मचारियों के बयानों और कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग से जुड़े तथ्यों की जांच कर रही है।
अब मामले में दो प्रक्रियाएं महत्वपूर्ण रहेंगी। पहली, हाईकोर्ट में साहू की याचिका पर आगे की सुनवाई और दूसरी, पुलिस की जांच के आधार पर होने वाली कानूनी कार्रवाई।
फिलहाल आरोपों पर अंतिम न्यायिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है। मामले में आगे की स्थिति अदालत के आदेशों और जांच के परिणामों से स्पष्ट होगी।



