Uttarakhand Higher Education Training: उच्च शिक्षा में बड़ा बदलाव! उत्तराखंड के 50 असिस्टेंट प्रोफेसर BHU में लेंगे स्पेशल ट्रेनिंग, शोध और नवाचार को मिलेगी नई धार
Uttarakhand Higher Education Training: A major shift in higher education! 50 assistant professors from Uttarakhand will receive special training at BHU, giving a new impetus to research and innovation.
उत्तराखंड सरकार राज्य के उच्च शिक्षा ढांचे को वैश्विक मानकों के अनुरूप ढालने के लिए एक महत्वाकांक्षी योजना पर काम कर रही है। ‘शिक्षा की गुणवत्ता और शोध’ को प्राथमिकता देते हुए, प्रदेश सरकार ने राज्य के विभिन्न राजकीय महाविद्यालयों में नवनियुक्त 50 विज्ञान वर्ग के असिस्टेंट प्रोफेसरों को देश के प्रतिष्ठित काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) में विशेष प्रशिक्षण दिलाने का निर्णय लिया है।
उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के नेतृत्व में शुरू की गई इस पहल का उद्देश्य शिक्षकों को आधुनिक शिक्षण तकनीकों और वैश्विक शोध पद्धतियों से लैस करना है, ताकि उत्तराखंड के छात्र भी राष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धा में अग्रणी रह सकें।
फोकस्ड ट्रेनिंग एंड इंडक्शन प्रोग्राम: 23 मार्च से होगा शंखनाद
Uttarakhand Higher Education Training के तहत यह विशेष ‘फोकस्ड ट्रेनिंग एंड इंडक्शन प्रोग्राम’ 23 मार्च से 19 अप्रैल 2026 तक आयोजित किया जाएगा। लगभग एक महीने तक चलने वाले इस सघन प्रशिक्षण शिविर में शिक्षकों को शैक्षणिक जगत के कई महत्वपूर्ण पहलुओं से अवगत कराया जाएगा:
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आधुनिक शिक्षण तकनीक: डिजिटल क्लासरूम और हाइब्रिड लर्निंग के दौर में प्रभावी शिक्षण के तरीके।
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शोध पद्धतियाँ (Research Methodology): विज्ञान के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप शोध पत्र तैयार करना।
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शैक्षणिक प्रशासन: महाविद्यालयों के बेहतर प्रबंधन और प्रशासनिक कार्यकुशलता की बारीकियां।
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नवाचार (Innovation): प्रयोगशालाओं का आधुनिक उपयोग और छात्रों में वैज्ञानिक सोच विकसित करना।
पुस्तकालयाध्यक्षों का भी चल रहा है प्रशिक्षण
उच्च शिक्षा विभाग केवल शिक्षकों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि ज्ञान के भंडार यानी ‘पुस्तकालयों’ को भी आधुनिक बना रहा है। योजना के तहत प्रदेश के 35 सहायक पुस्तकालयाध्यक्षों (Assistant Librarians) का प्रशिक्षण भी BHU में ही चल रहा है। 9 मार्च से शुरू हुआ यह 12 दिवसीय प्रशिक्षण 22 मार्च को संपन्न होगा। इसमें उन्हें निम्नलिखित विषयों पर विशेषज्ञता दी जा रही है:
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डिजिटल लाइब्रेरी: भौतिक पुस्तकों को डिजिटल प्रारूप में सुरक्षित और सुलभ बनाना।
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ई-रिसोर्सेज: ऑनलाइन जर्नल्स और डेटाबेस का प्रभावी प्रबंधन।
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सूचना प्रबंधन: आधुनिक सॉफ्टवेयर के जरिए लाइब्रेरी रिकॉर्ड्स को सुव्यवस्थित करना।
प्रशिक्षण के दौरान इन पुस्तकालयाध्यक्षों को वाराणसी के प्रतिष्ठित केंद्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान और नागरी प्रचारिणी सभा का भ्रमण भी कराया गया, ताकि वे पुस्तकालय प्रबंधन की सर्वश्रेष्ठ प्रणालियों को प्रत्यक्ष देख सकें।
शिक्षा मंत्री का विजन: उत्कृष्ट संस्थान, उत्कृष्ट शिक्षक
उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने इस पहल पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार शिक्षकों को बेहतरीन एक्स्पोज़र देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, “जब हमारे शिक्षक BHU जैसे महान संस्थानों के विशेषज्ञों और प्रख्यात विद्वानों से संवाद करेंगे, तो उनकी कार्यक्षमता में व्यापक सुधार होगा। यह निवेश अंततः हमारे छात्रों के भविष्य को संवारेगा और प्रदेश के कॉलेजों में एक शोधोन्मुखी (Research-oriented) वातावरण तैयार करेगा।

