Uttarakhand Assembly Session: गैरसैंण में 27 अक्टूबर से शुरू हुआ विधानसभा सत्र, ₹7,400 करोड़ का अनुपूरक बजट विपक्ष ने सरकार को घेरा
Uttarakhand Assembly Session: Legislative session begins in Gairsain on October 27; ₹7,400 crore supplementary budget presented; opposition corners the government.
Uttarakhand Assembly Session: उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण के भराड़ीसैंण विधानसभा भवन में 27 अक्टूबर 2026 से दो दिवसीय विधानसभा सत्र शुरू हुआ। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए लगभग ₹7,400 करोड़ का अनुपूरक बजट सदन में पेश करने की तैयारी की थी। इसके साथ कई महत्वपूर्ण विधेयकों को भी सदन के पटल पर रखा जाना था।
विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण ने सत्र से पहले बताया था कि विधायकों को अपने क्षेत्र की समस्याएं उठाने का अवसर दिया जाएगा। दूसरी ओर, विपक्षी कांग्रेस ने बेरोजगारी, महंगाई, भ्रष्टाचार और कानून व्यवस्था जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बनाई थी।
Uttarakhand Assembly Session: 27 अक्टूबर को सुबह 11 बजे शुरू हुई विधानसभा की कार्यवाही
उत्तराखंड विधानसभा के वर्ष 2026 के तीसरे सत्र की शुरुआत मंगलवार, 27 अक्टूबर को सुबह 11 बजे निर्धारित की गई थी। यह सत्र दो दिनों के लिए बुलाया गया था।
पहले दिन सदन में पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी और पूर्व मंत्री हीरा सिंह बिष्ट को श्रद्धांजलि देने का कार्यक्रम रखा गया।
इसके बाद सरकार की ओर से अनुपूरक बजट और विभिन्न विधेयक प्रस्तुत किए जाने थे। दूसरे दिन प्रश्नकाल और अन्य विधायी कार्य निर्धारित किए गए थे।
गैरसैंण में आयोजित यह सत्र इसलिए भी महत्वपूर्ण था क्योंकि इसे मौजूदा विधानसभा के कार्यकाल के अंतिम सत्र के रूप में देखा जा रहा था।
₹7,400 करोड़ के Supplementary Budget पर फोकस
सत्र का प्रमुख एजेंडा वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए अनुपूरक बजट था। सरकार ने लगभग ₹7,400 करोड़ के अतिरिक्त बजट का प्रस्ताव तैयार किया था।
अनुपूरक बजट के माध्यम से सरकार वित्तीय वर्ष के दौरान उन विभागों और योजनाओं के लिए अतिरिक्त धनराशि उपलब्ध कराने का प्रस्ताव रखती है, जिनके लिए पहले स्वीकृत बजट से अधिक संसाधनों की आवश्यकता होती है।
इसमें विकास कार्यों, बुनियादी सुविधाओं और विभिन्न विभागीय जरूरतों के लिए वित्तीय प्रावधान किए जा सकते हैं।
हालांकि, प्रस्तावित बजट की वास्तविक मदों और विभागवार आवंटन की जानकारी बजट दस्तावेजों से ही स्पष्ट होती है।
Uttarakhand Assembly SessionUttarakhand Assembly Sessionकई महत्वपूर्ण विधेयक सदन में रखे गए
दो दिवसीय सत्र में सरकार ने विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े विधेयकों को विधायी प्रक्रिया के लिए रखा।
इनमें उत्तराखंड जनविश्वास उपबंधों का संशोधन विधेयक, माल एवं सेवा कर से संबंधित संशोधन, सिंचाई एवं जल निकासी, राजकोषीय उत्तरदायित्व, अल्पसंख्यक शिक्षा तथा अग्निशमन एवं आपात सेवाओं से जुड़े प्रस्ताव शामिल थे।
जनविश्वास से संबंधित विधेयक का उद्देश्य कुछ छोटे और नियामकीय उल्लंघनों में दंड संबंधी प्रावधानों को बदलना है।
वहीं, अन्य विधेयक राज्य की प्रशासनिक, वित्तीय और नियामकीय व्यवस्थाओं से जुड़े हैं। इनका प्रभाव संबंधित कानूनों में किए गए अंतिम संशोधनों पर निर्भर करेगा।
31 विधायकों ने भेजे सैकड़ों सवाल
विधानसभा सत्र के लिए विधायकों ने बड़ी संख्या में प्रश्न प्रस्तुत किए थे।
विधानसभा अध्यक्ष की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, 31 विधायकों ने विभिन्न विभागों से संबंधित प्रश्न भेजे। शुरुआती रिपोर्टों में 426 प्रश्नों का उल्लेख था, जबकि सत्र के नजदीक प्रकाशित रिपोर्टों में यह संख्या 445 बताई गई।
इन प्रश्नों में सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और स्थानीय विकास से जुड़े विषय शामिल थे।
प्रश्नकाल विधानसभा की एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से निर्वाचित प्रतिनिधि सरकारी विभागों से जवाब मांग सकते हैं।
हालांकि, प्रश्नों का सदन में प्रस्तुत होना और उन पर विस्तृत चर्चा होना अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। सीमित अवधि के सत्र में सभी प्रश्नों पर चर्चा संभव नहीं होती।
Congress ने सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा
मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने विधानसभा सत्र के दौरान राज्य सरकार के खिलाफ प्रदर्शन की घोषणा की थी।
नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने आरोप लगाया कि सरकार महत्वपूर्ण सार्वजनिक मुद्दों पर पर्याप्त चर्चा से बच रही है। उन्होंने दो दिवसीय सत्र की अवधि को भी कम बताया।
कांग्रेस ने अंकिता भंडारी हत्याकांड, भ्रष्टाचार के आरोपों, महंगाई, बेरोजगारी और महिलाओं की सुरक्षा जैसे मुद्दों को उठाने की रणनीति बनाई।
विपक्ष ने विधानसभा के बाहर प्रदर्शन और घेराव की भी तैयारी की थी।
हालांकि, ये विपक्ष की राजनीतिक आपत्तियां और आरोप हैं। सरकार की ओर से भी अपने निर्णयों और नीतियों का पक्ष रखा गया।
Uttarakhand Assembly Session: में सुरक्षा के कड़े इंतजाम
विधानसभा सत्र और संभावित विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए गैरसैंण में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई।
रिपोर्टों के अनुसार, लगभग 1,500 पुलिसकर्मियों को तैनात करने की व्यवस्था की गई थी। विधानसभा क्षेत्र और आसपास के इलाकों को पांच सुपर जोन और 13 सेक्टर में बांटा गया।
सुरक्षा व्यवस्था में नागरिक पुलिस के साथ सशस्त्र पुलिस, पीएसी और अन्य विशेष इकाइयों को शामिल किया गया।
संवेदनशील रास्तों पर बैरिकेडिंग और प्रवेश नियंत्रण के इंतजाम भी किए गए थे।
सुरक्षा व्यवस्था का उद्देश्य विधानसभा की कार्यवाही को सुचारु बनाए रखना और विरोध प्रदर्शनों के दौरान कानून व्यवस्था सुनिश्चित करना था।
दो दिवसीय सत्र की अवधि पर उठे सवाल
उत्तराखंड में विधानसभा सत्रों की अवधि लंबे समय से सार्वजनिक और राजनीतिक चर्चा का विषय रही है।
विपक्ष का तर्क है कि कम दिनों के सत्र में राज्य की समस्याओं, सरकारी योजनाओं और विभागीय कामकाज पर पर्याप्त चर्चा नहीं हो पाती।
दूसरी ओर, विधानसभा अध्यक्ष ने सत्र से पहले कहा था कि कार्यमंत्रणा समिति के निर्धारित एजेंडे के अनुसार कार्यवाही संचालित होगी और विधायकों को अपने मुद्दे रखने का अवसर दिया जाएगा।
विधानसभा की भूमिका केवल विधेयक पारित करने तक सीमित नहीं है। यह सरकार की जवाबदेही तय करने और जनता के प्रतिनिधियों को सवाल उठाने का संवैधानिक मंच भी है।
इसलिए सत्र की अवधि के साथ सदन में होने वाली वास्तविक चर्चा और विधायी कार्य की गुणवत्ता भी महत्वपूर्ण होती है।
दूसरे दिन हंगामे के बीच समाप्त हुई कार्यवाही
बाद की रिपोर्टों के अनुसार, गैरसैंण विधानसभा सत्र का पहला दिन लगभग सात घंटे चला, जबकि दूसरे दिन कार्यवाही करीब एक घंटे चार मिनट में सिमट गई।
सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच टकराव के कारण कई सार्वजनिक मुद्दों पर अपेक्षित चर्चा नहीं हो सकी।
रिपोर्ट के अनुसार, सत्र में 10 विधेयक पारित किए गए और दो अध्यादेश सदन के पटल पर रखे गए।
इस घटनाक्रम ने एक बार फिर विधानसभा में पर्याप्त चर्चा, प्रश्नकाल और विधायी जवाबदेही के महत्व को सामने ला दिया।
गैरसैंण में सत्र का राजनीतिक और प्रशासनिक महत्व
गैरसैंण उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी है। पर्वतीय क्षेत्रों के विकास और प्रशासनिक प्रतिनिधित्व की दृष्टि से यहां विधानसभा सत्र आयोजित करना महत्वपूर्ण माना जाता है।
भराड़ीसैंण में आयोजित इस सत्र के दौरान सरकार ने वित्तीय और विधायी कार्यों को आगे बढ़ाया, जबकि विपक्ष ने विभिन्न सार्वजनिक मुद्दों पर अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं।
सत्र का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि सीमित समय में अनुपूरक बजट और कई विधेयकों पर कार्यवाही हुई।
आगे इन विधायी फैसलों के वास्तविक प्रभाव का आकलन उनके क्रियान्वयन, बजट के उपयोग और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली के आधार पर किया जाएगा।



