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‘इस्तीफा जरूर आएगा’… Article 370 पर रुहुल्लाह की फारूक अब्दुल्ला को दो टूक!

‘The resignation will certainly come’… Ruhullah’s blunt message to Farooq Abdullah on Article 370!

Article 370: जम्मू-कश्मीर की राजनीति में एक बार फिर हलचल बढ़ गई है। नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर मतभेद खुलकर सामने आ रहे हैं। श्रीनगर से सांसद आगा रुहुल्लाह मेहदी ने पार्टी अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला पर निशाना साधा है।

रुहुल्लाह ने पार्टी के रुख पर कई सवाल उठाए हैं। उन्होंने Article 370 और जम्मू-कश्मीर के राज्य के दर्जे को लेकर भी सवाल किया है। उनका कहना है कि पार्टी को अपने पुराने वादों पर स्पष्ट रुख रखना चाहिए।

यह विवाद फारूक अब्दुल्ला के एक बयान के बाद बढ़ा। अब्दुल्ला ने रुहुल्लाह को इस्तीफा देने की चुनौती दी थी। इसके बाद सांसद ने भी पलटवार किया।

फारूक अब्दुल्ला को दिया करारा जवाब

रुहुल्लाह ने फारूक अब्दुल्ला को पत्र लिखा। इसमें उन्होंने कई मुद्दों का जिक्र किया। उन्होंने अब्दुल्ला के हालिया बयान पर भी प्रतिक्रिया दी।

रुहुल्लाह ने कहा कि अगर उन्हें लगता है कि जनता उनके साथ नहीं है, तो वह इस्तीफा दे सकते हैं। उन्होंने यह भी साफ किया कि वह इस्तीफे से पीछे नहीं हट रहे हैं।

उनका कहना है कि सही समय आने पर इस्तीफा जरूर आएगा। लेकिन इससे पहले कई सवालों के जवाब मिलने चाहिए।

Article 370 पर क्या बोले रुहुल्लाह?

रुहुल्लाह ने Article 370 को लेकर पार्टी की रणनीति पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा नेशनल कॉन्फ्रेंस के चुनावी घोषणापत्र का हिस्सा रहा है।

उनके मुताबिक, चुनाव के दौरान जनता से कई वादे किए गए थे। इनमें जम्मू-कश्मीर की विशेष संवैधानिक स्थिति से जुड़े मुद्दे भी शामिल थे।

अब सरकार बनने के बाद इन वादों पर सवाल उठ रहे हैं। रुहुल्लाह चाहते हैं कि पार्टी अपना रुख साफ करे।

उनका कहना है कि केवल राज्य का दर्जा वापस मांगना पर्याप्त नहीं है। जम्मू-कश्मीर के संवैधानिक और राजनीतिक अधिकारों पर भी बात होनी चाहिए।

राज्य का दर्जा बहाली भी बड़ा मुद्दा

जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करना नेशनल कॉन्फ्रेंस की प्रमुख मांगों में शामिल है। पार्टी लगातार इस मुद्दे को उठाती रही है।

रुहुल्लाह का रुख इससे आगे जाता दिख रहा है। वह Article 370 के मुद्दे को भी उतना ही महत्वपूर्ण मानते हैं।

उनका कहना है कि पार्टी ने चुनाव के समय जनता के सामने अपना एजेंडा रखा था। अब उस एजेंडे पर आगे बढ़ने की जरूरत है।

‘इस्तीफा जरूर आएगा’

फारूक अब्दुल्ला ने रुहुल्लाह को सांसद पद से इस्तीफा देने की चुनौती दी थी। उन्होंने सवाल उठाया था कि क्या रुहुल्लाह पार्टी के समर्थन के बिना चुनाव जीत सकते हैं।

रुहुल्लाह ने इसका जवाब भी दिया। उन्होंने संकेत दिया कि वह इस्तीफा देने के लिए तैयार हैं।

उन्होंने कहा कि इस्तीफा जरूर आएगा। लेकिन पहले राजनीतिक जवाबदेही तय होनी चाहिए।

यही बयान अब जम्मू-कश्मीर की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है।

नवंबर में इस्तीफे की चर्चा

रिपोर्ट के मुताबिक, रुहुल्लाह नवंबर में इस्तीफा दे सकते हैं। हालांकि, अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

इससे पहले 31 अक्टूबर को सांसदों का सम्मेलन प्रस्तावित है। इसके बाद ही आगे की स्थिति साफ हो सकती है।

अगर रुहुल्लाह इस्तीफा देते हैं, तो यह नेशनल कॉन्फ्रेंस के लिए बड़ा राजनीतिक झटका हो सकता है।

उमर अब्दुल्ला से भी मतभेद

रुहुल्लाह के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से भी मतभेद सामने आ चुके हैं। वह कई मुद्दों पर सरकार के फैसलों की आलोचना कर चुके हैं।

आरक्षण के मुद्दे पर भी उनका रुख सरकार से अलग रहा है। दिसंबर 2024 में वह छात्रों के प्रदर्शन में शामिल हुए थे।

इससे साफ है कि रुहुल्लाह पार्टी लाइन से अलग अपनी बात रखने में पीछे नहीं हट रहे हैं।

क्या नेशनल कॉन्फ्रेंस में बढ़ेगा विवाद?

रुहुल्लाह के ताजा रुख ने पार्टी की अंदरूनी राजनीति को चर्चा में ला दिया है। Article 370 का मुद्दा इस विवाद का अहम हिस्सा बन गया है।

एक तरफ फारूक अब्दुल्ला और पार्टी नेतृत्व हैं। दूसरी तरफ रुहुल्लाह लगातार सवाल उठा रहे हैं।

अब देखना होगा कि पार्टी इस विवाद को कैसे संभालती है। क्या दोनों पक्षों के बीच समझौता होगा? या फिर रुहुल्लाह कोई बड़ा राजनीतिक फैसला लेंगे?

फिलहाल उनकी ओर से इस्तीफे की अंतिम घोषणा नहीं हुई है। इसलिए अगले कुछ महीने जम्मू-कश्मीर की राजनीति के लिए काफी अहम माने जा रहे हैं।

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