पश्चिम बंगाल में चुनाव से ठीक पहले न्यायिक सुरक्षा और प्रशासनिक विफलता को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है। शनिवार को बालुरघाट में मीडिया से मुखातिब होते हुए केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार ने ममता बनर्जी सरकार पर कड़ा प्रहार किया। Sukanta Majumdar on NIA Investigation के संदर्भ में उन्होंने मालदा के कालियाचक में महिला जजों और न्यायिक अधिकारियों को घंटों बंधक बनाए जाने की घटना को ‘लोकतंत्र की हत्या’ करार दिया।
मजूमदार ने आरोप लगाया कि यह हमला कोई अचानक हुई भीड़ की प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि न्यायपालिका को डराने और फर्जी वोटरों के सिंडिकेट को संरक्षण देने की एक सुनियोजित साजिश है।
न्यायपालिका पर प्रहार
डॉ. मजूमदार ने घटना का विवरण देते हुए कहा कि मालदा में जिस तरह महिला जजों को बंधक बनाया गया, वह बंगाल के इतिहास में एक काला अध्याय है।
-
प्रशासनिक विफलता: केंद्रीय मंत्री ने सवाल उठाया कि राज्य पुलिस मूकदर्शक क्यों बनी रही? उन्होंने कहा कि अंततः केंद्रीय बलों (Central Forces) को हस्तक्षेप कर जजों को सुरक्षित निकालना पड़ा, जो यह साबित करता है कि राज्य की मशीनरी पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है।
-
सुनियोजित घेराव: सुकांत मजूमदार के अनुसार, न्यायिक अधिकारियों पर दबाव बनाना बंगाल में एक नई और खतरनाक परंपरा बनती जा रही है।
फर्जी वोटरों और घुसपैठियों का कनेक्शन
सुकांत मजूमदार ने इस हिंसा के पीछे एक गहरी साजिश का दावा किया। उन्होंने कहा कि जब भी चुनाव आयोग मतदाता सूची के शुद्धिकरण (SIR) और फर्जी नामों को हटाने की प्रक्रिया शुरू करता है, जानबूझकर अशांति फैलाई जाती है।
-
नेटवर्क को संरक्षण: मंत्री का आरोप है कि टीएमसी सरकार अवैध घुसपैठियों और फर्जी वोटरों के नेटवर्क को बचाने के लिए इस तरह के उपद्रवों को मौन सहमति देती है।
-
अधिकारियों में खौफ: उनका कहना है कि जजों और प्रशासनिक अधिकारियों को डराकर यह सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है कि वे फर्जीवाड़े के खिलाफ कड़ी कार्रवाई न करें।
लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हमला
मालदा में कवरेज के दौरान मीडियाकर्मियों पर हुए हमलों पर भी डॉ. मजूमदार ने गहरा क्षोभ व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि जब सत्ता पक्ष को लगता है कि उनके काले कारनामे उजागर हो रहे हैं, तो वे सत्य को दबाने के लिए पत्रकारों को निशाना बनाते हैं। Sukanta Majumdar on NIA Investigation की मांग का समर्थन करते हुए उन्होंने कहा कि केवल केंद्रीय एजेंसियां ही इस ‘सिंडिकेट राज’ की परतों को खोल सकती हैं।
2026 का चुनाव और एनआईए की उम्मीद
डॉ. मजूमदार ने विश्वास जताया कि एनआईए (NIA) इस मामले की तह तक जाएगी और उन चेहरों को बेनकाब करेगी जो जजों को बंधक बनाने के पीछे थे।
-
जनता का बदलाव: उन्होंने दावा किया कि बंगाल की जनता अब हिंसा और डर की राजनीति से ऊब चुकी है।
-
निष्पक्ष चुनाव: सुकांत मजूमदार ने चुनाव आयोग से अपील की कि 2026 के विधानसभा चुनाव पूरी तरह शांतिपूर्ण और केंद्रीय बलों की कड़ी निगरानी में कराए जाएं ताकि हर नागरिक बिना किसी डर के मतदान कर सके।



