डॉलर के मुकाबले ऐतिहासिक गिरावट पर रुपया, 92 के करीब पहुंचा भाव; महंगाई की नई चिंता
The rupee hits a historic low against the dollar, nearing 92; raising new concerns about inflation.
नई दिल्ली: भारतीय मुद्रा रुपया गुरुवार को अमेरिकी डॉलर के सामने एक बार फिर कमजोर पड़ता नजर आया। विदेशी मुद्रा बाजार में कारोबार की शुरुआत के साथ ही रुपया गिरकर लगभग 92 रुपये प्रति डॉलर के स्तर के करीब पहुंच गया, जो अब तक का सबसे निचला स्तर माना जा रहा है। रुपये की इस ऐतिहासिक गिरावट ने न सिर्फ वित्तीय बाजारों में हलचल मचा दी है, बल्कि आम लोगों की जेब पर भी महंगाई का नया दबाव बनने की आशंका बढ़ा दी है।
बाजार खुलते ही दिखा दबाव
गुरुवार सुबह जैसे ही फॉरेक्स मार्केट खुला, रुपया कमजोर रुख के साथ कारोबार करता नजर आया। शुरुआती सत्र में यह 91.99 के स्तर तक फिसल गया, जबकि पिछले कारोबारी दिन यह 91.78 पर बंद हुआ था। जानकारों का कहना है कि वैश्विक संकेत पहले से ही रुपये के लिए अनुकूल नहीं थे, जिसका असर सीधे बाजार खुलते ही देखने को मिला।
अमेरिकी अर्थव्यवस्था बनी बड़ी वजह
रुपये की कमजोरी के पीछे सबसे बड़ा कारण अमेरिका की मजबूत होती अर्थव्यवस्था मानी जा रही है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से यह संकेत मिले हैं कि महंगाई अभी भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई है और रोजगार बाजार स्थिर है। इसके चलते अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी आई है, जिससे डॉलर और मजबूत हुआ है।
डॉलर के मजबूत होने का सीधा असर उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ता है। निवेशक बेहतर रिटर्न के लिए भारत जैसे बाजारों से पैसा निकालकर अमेरिका की ओर रुख करते हैं। इसी वजह से विदेशी निवेशकों की बिकवाली बढ़ी है और रुपये पर अतिरिक्त दबाव बना है।
आम लोगों पर पड़ेगा सीधा असर
रुपये की गिरावट का सबसे ज्यादा असर आम नागरिकों की रोजमर्रा की जरूरतों पर पड़ सकता है। भारत बड़ी मात्रा में कच्चा तेल, इलेक्ट्रॉनिक सामान और मशीनरी का आयात करता है। डॉलर महंगा होने से आयात लागत बढ़ेगी, जिसका सीधा असर पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर पड़ सकता है। ईंधन महंगा होने से परिवहन खर्च बढ़ेगा और इसका असर खाद्य पदार्थों व जरूरी वस्तुओं की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है।
मोबाइल फोन, लैपटॉप, कार और घरेलू उपकरण भी महंगे हो सकते हैं, क्योंकि इनके कई पुर्जे विदेश से आयात किए जाते हैं। इसके अलावा विदेश में पढ़ाई करने वाले छात्रों और विदेश यात्रा की योजना बना रहे लोगों के लिए खर्च और बढ़ना तय माना जा रहा है।
निर्यातकों को मिल सकती है राहत
हालांकि कमजोर रुपये का एक सकारात्मक पहलू भी है। निर्यात करने वाली कंपनियों को डॉलर के बदले ज्यादा रुपये मिलते हैं, जिससे उनकी आमदनी में सुधार हो सकता है। विदेश से भारत पैसा भेजने वालों को भी इसका फायदा मिलेगा।
आगे की राह पर नजर
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि अगर रुपया 92 के स्तर के ऊपर टिकता है, तो इसमें और गिरावट देखने को मिल सकती है। अब बाजार की निगाहें भारतीय रिजर्व बैंक पर टिकी हैं कि वह रुपये को संभालने के लिए क्या कदम उठाता है। फिलहाल कमजोर रुपया देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक नई चुनौती बनकर सामने आया है।


