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Stock Market Crash: रुपया मजबूत, कच्चा तेल सस्ता, फिर भी शेयर बाजार में गिरावट, 5 कारणों से डूबे ₹7 लाख करोड़

Rupee strengthens, crude oil cheap, yet stock market falls, ₹7 lakh crore lost due to 5 reasons

नई दिल्ली: भारतीय शेयर बाजार में सोमवार, 12 अक्टूबर को शुरुआती तेजी के बाद भारी बिकवाली देखने को मिली। सेंसेक्स दिन के उच्चतम स्तर से 1,000 अंकों से ज्यादा नीचे फिसल गया। वहीं, निफ्टी में भी करीब 300 अंकों की गिरावट आई। इस गिरावट के दौरान निवेशकों की संपत्ति में लगभग 7 लाख करोड़ रुपये की कमी आने का अनुमान सामने आया।

इस Stock Market Crash की खास बात यह रही कि रुपये में मजबूती आई और कच्चे तेल की कीमतों में करीब 1 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। आमतौर पर इन दोनों संकेतों को भारतीय बाजार के लिए सकारात्मक माना जाता है। इसके बावजूद विदेशी निवेशकों की बिकवाली और वैश्विक अनिश्चितता ने बाजार पर दबाव बनाए रखा।

सेंसेक्स और निफ्टी में कितनी आई गिरावट?

कारोबार की शुरुआत में सेंसेक्स करीब 300 अंकों की बढ़त के साथ 72,771.32 पर खुला। यह दिन के दौरान 72,884.25 के उच्चतम स्तर तक पहुंचा। इसके बाद बिकवाली तेज हुई और सेंसेक्स करीब 624 अंक गिरकर 71,848.10 के स्तर पर आ गया।

निफ्टी 50 भी शुरुआती तेजी के बाद फिसल गया। यह 22,651.10 के इंट्राडे हाई से करीब 299 अंक नीचे आकर 22,352.35 के आसपास पहुंच गया। हालांकि, बाजार के सभी शेयरों में गिरावट नहीं रही। कुछ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में मजबूती भी दिखाई दी।

Stock Market Crash के 5 बड़े कारण

1. बॉन्ड यील्ड में तेजी

भारत की 10 साल की सरकारी बॉन्ड यील्ड बढ़कर करीब 7.37 फीसदी तक पहुंच गई। ऊंची बॉन्ड यील्ड के कारण निवेशकों को सरकारी प्रतिभूतियां शेयरों के मुकाबले आकर्षक लग सकती हैं। इससे इक्विटी बाजार में निवेश प्रभावित होता है।

2. विदेशी निवेशकों की बिकवाली

विदेशी निवेशकों की लगातार निकासी बाजार के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर के शुरुआती छह कारोबारी सत्रों में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों से करीब 45,125 करोड़ रुपये निकाले। इससे प्रमुख कंपनियों के शेयरों पर दबाव बढ़ा।

3. मिडिल ईस्ट में तनाव

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने वैश्विक बाजारों की चिंता बढ़ाई है। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बावजूद ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बताया गया। भारत तेल का बड़ा आयातक है, इसलिए महंगा कच्चा तेल महंगाई और कंपनियों की लागत बढ़ा सकता है।

4. एशियाई बाजारों में कमजोरी

दक्षिण कोरिया, जापान और दूसरे एशियाई बाजारों से मिले कमजोर संकेतों का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा। वैश्विक अनिश्चितता के बीच निवेशक जोखिम वाले निवेश से दूरी बना सकते हैं।

5. मुनाफावसूली

पिछले कारोबारी सत्र में बाजार में तेजी के बाद कुछ निवेशकों ने मुनाफा निकालना शुरू किया। इस प्रॉफिट बुकिंग ने शुरुआती बढ़त को कमजोर किया और बिकवाली का दबाव बढ़ा दिया।

किन शेयरों पर पड़ा ज्यादा असर?

टेक महिंद्रा के शेयरों में करीब 4 फीसदी तक की गिरावट आई। SBI, ITC, भारती एयरटेल, L&T, NTPC, ICICI बैंक और एक्सिस बैंक भी दबाव में रहे। दूसरी ओर, महिंद्रा एंड महिंद्रा, BEL और ट्रेंट के शेयरों में बढ़त दर्ज की गई। ऑटो सेक्टर ने भी अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया।

आगे कैसा रह सकता है बाजार?

विशेषज्ञों के मुताबिक, बाजार की दिशा विदेशी निवेशकों की गतिविधियों, बॉन्ड यील्ड, रुपये, कच्चे तेल और वैश्विक तनाव पर निर्भर करेगी। अगर बिकवाली जारी रहती है, तो बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।

फिलहाल Stock Market Crash के पीछे किसी एक वजह को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। रुपये की मजबूती और तेल की कीमतों में नरमी के बावजूद विदेशी निवेशकों की निकासी, ऊंची बॉन्ड यील्ड और वैश्विक अनिश्चितता ने निवेशकों की धारणा कमजोर की। निवेशकों को बाजार में गिरावट के दौरान जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय अपने वित्तीय लक्ष्यों और जोखिम क्षमता को ध्यान में रखना चाहिए।

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