उत्तराखंड

Women Reservation Bill Debate: महिला आरक्षण पर सियासत तेज, रेखा आर्य का विपक्ष पर हमला, बोलीं ‘ऐतिहासिक गलती’ का मिलेगा जवाब

Women's Reservation Bill Debate: Politics over women's reservation intensifies, Rekha Arya attacks the Opposition, declaring that their 'historic blunder' will be answered.

उत्तराखंड की महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्य ने महिला आरक्षण के मुद्दे पर विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि अब महिलाएं अपने अधिकारों के प्रति पूरी तरह जागरूक हो चुकी हैं और उन्हें उनका हक मिलने से कोई नहीं रोक सकता। Women Reservation Bill को लेकर देशभर में जारी बहस के बीच उनका यह बयान राजनीतिक माहौल को और गरमा गया है।

रेखा आर्य ने स्पष्ट कहा कि आधी आबादी अब सिर्फ दर्शक नहीं रहना चाहती, बल्कि निर्णय लेने की प्रक्रिया में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए तैयार है। उनके मुताबिक Women Reservation Bill महिलाओं को राजनीति में बराबरी का अवसर देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

हर बार डाला अड़ंगा

मंत्री रेखा आर्य ने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों पर आरोप लगाया कि उन्होंने हमेशा महिला आरक्षण के मुद्दे को टालने का काम किया है। उन्होंने कहा कि जब भी संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने की बात सामने आती है, तब विपक्षी दल बहाने बनाकर इसे रोकने या धीमा करने की कोशिश करते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि Women Reservation Bill लंबे समय से लंबित रहा है, लेकिन मौजूदा सरकार ने इसे आगे बढ़ाने की गंभीर कोशिश की है। उनके अनुसार, विपक्ष की नीतियां महिलाओं के वास्तविक सशक्तिकरण के अनुरूप नहीं हैं।

बीजेपी ने निभाई प्रतिबद्धता

रेखा आर्य ने केंद्र की सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में एक-तिहाई आरक्षण देने का संकल्प लिया गया है और इस दिशा में लगातार प्रयास जारी हैं।

उन्होंने विश्वास जताया कि Women Reservation Bill को लागू करने में देर भले हो, लेकिन इसे लागू होने से कोई नहीं रोक सकता। उन्होंने यह भी कहा कि इसका श्रेय अंततः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार को ही जाएगा।

28 अप्रैल को ‘आक्रोश मशाल रैली’, महिलाओं की भागीदारी पर जोर

मंत्री ने देहरादून में आयोजित होने वाली ‘आक्रोश मशाल रैली’ का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि यह रैली महिलाओं के भीतर बढ़ते आक्रोश और उनके अधिकारों के प्रति जागरूकता का प्रतीक होगी। बड़ी संख्या में महिलाओं के इस रैली में शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।

रेखा आर्य के मुताबिक, यह रैली Women Reservation Bill के समर्थन में एक मजबूत संदेश देगी कि महिलाएं अब अपने अधिकारों के लिए सड़क पर उतरने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि आज की महिला पहले से ज्यादा शिक्षित और राजनीतिक रूप से जागरूक हो चुकी है।

महिलाएं अब सिर्फ वोटर नहीं, नीति निर्माता बनना चाहती हैं

रेखा आर्य ने कहा कि आज महिलाएं केवल वोट देने तक सीमित नहीं रहना चाहतीं, बल्कि वे नीति निर्माण में भी सक्रिय भूमिका निभाना चाहती हैं। ऐसे में Women Reservation Bill का महत्व और भी बढ़ जाता है, क्योंकि यह उन्हें राजनीतिक मंच पर उचित प्रतिनिधित्व दिलाने का माध्यम बनेगा।

उन्होंने कहा कि महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से लोकतंत्र और अधिक संतुलित और संवेदनशील बनेगा। इससे समाज के हर वर्ग की जरूरतों को बेहतर तरीके से समझा और पूरा किया जा सकेगा।

परिवारवाद पर विपक्ष को घेरा

विपक्षी दलों पर हमला जारी रखते हुए रेखा आर्य ने कहा कि कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय जनता दल जैसे दलों में परिवारवाद हावी है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन दलों में आम महिलाओं को आगे बढ़ने का अवसर नहीं मिलता, जबकि कुछ खास परिवारों की महिलाओं को ही राजनीतिक मंच दिया जाता है।

उन्होंने कहा कि यह दोहरा रवैया महिलाओं के सशक्तिकरण में सबसे बड़ी बाधा है। Women Reservation Bill का विरोध या उसे टालना इसी मानसिकता को दर्शाता है।

‘ऐतिहासिक गलती’ का चुनाव में मिलेगा जवाब

रेखा आर्य ने विपक्ष के रुख को ‘ऐतिहासिक गलती’ बताते हुए कहा कि इसका खामियाजा उन्हें आगामी चुनावों में भुगतना पड़ेगा। उन्होंने दावा किया कि देश और राज्य की महिलाएं अब पूरी तरह जागरूक हैं और वे अपने वोट के माध्यम से यह तय करेंगी कि कौन उनके अधिकारों के साथ खड़ा है।

उन्होंने कहा कि Women Reservation Bill को लेकर जनता की भावना स्पष्ट है और महिलाएं अब किसी भी तरह के भेदभाव को स्वीकार नहीं करेंगी।

सामाजिक न्याय और समानता का सवाल

रेखा आर्य ने महिला आरक्षण को केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और समानता का विषय बताया। उन्होंने कहा कि जब तक महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिलेगा, तब तक लोकतंत्र पूर्ण रूप से संतुलित नहीं हो सकता।

उन्होंने यह भी कहा कि महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से नीतियों में संवेदनशीलता आएगी और समाज के विकास को नई दिशा मिलेगी। Women Reservation Bill इसी बदलाव का आधार बन सकता है।

 

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