Safe Motherhood Uttarakhand: सुरक्षित मातृत्व अभियान की बड़ी सफलता, होम डिलीवरी में 91.1% की रिकॉर्ड गिरावट
Safe Motherhood Uttarakhand: Major Success for the Safe Motherhood Campaign—A Record 91.1% Decline in Home Deliveries
उत्तराखंड में मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में चल रहे Safe Motherhood Uttarakhand अभियान ने उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। राज्य के स्वास्थ्य विभाग की सघन निगरानी, डिजिटल ट्रैकिंग और फील्ड स्तर पर जवाबदेही तय करने के प्रयासों का असर अब साफ दिखाई देने लगा है। बीते एक वर्ष में होम डिलीवरी के मामलों में 91.1 प्रतिशत की ऐतिहासिक कमी दर्ज की गई है।
जहां अप्रैल 2025 में राज्यभर में 404 होम डिलीवरी दर्ज की गई थीं, वहीं अप्रैल 2026 में यह संख्या घटकर केवल 36 रह गई। यह उपलब्धि न केवल स्वास्थ्य विभाग की कार्यकुशलता को दर्शाती है, बल्कि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती पहुंच का भी प्रमाण है।
Safe Motherhood Uttarakhand बना राष्ट्रीय स्तर पर उदाहरण
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार Safe Motherhood Uttarakhand अभियान ने यह साबित किया है कि यदि गर्भवती महिलाओं की समय पर पहचान, नियमित निगरानी और अस्पताल तक पहुंच सुनिश्चित की जाए, तो मातृ मृत्यु दर और नवजात जटिलताओं में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।
राज्य सरकार ने सुरक्षित प्रसव को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए गर्भवती महिलाओं के लिए संस्थागत प्रसव को बढ़ावा दिया। परिणामस्वरूप अप्रैल 2026 में राज्यभर में 9,923 संस्थागत प्रसव दर्ज किए गए, जो स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ते भरोसे को दर्शाता है।
स्वास्थ्य सचिव सचिन कुर्वे के निर्देशों से मिली गति
Sachin Kurve के निर्देश पर जिलावार समीक्षा बैठकों, डिजिटल मॉनिटरिंग, जवाबदेही तय करने और हाई रिस्क गर्भावस्था की ट्रैकिंग को कड़ाई से लागू किया गया। इससे स्वास्थ्य विभाग को प्रत्येक गर्भवती महिला की स्थिति पर नियमित नजर रखने में मदद मिली।
अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि किसी भी महिला का प्रसव घर पर न हो और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जाए। Safe Motherhood Uttarakhand की सफलता में यह रणनीति अत्यंत प्रभावी सिद्ध हुई।
हाई रिस्क प्रेगनेंसी की समय रहते पहचान
पर्वतीय और दुर्गम जिलों में विशेष अल्ट्रासाउंड अभियान चलाकर गर्भवती महिलाओं की विस्तृत जांच की गई। इस अभियान के तहत 10,184 अल्ट्रासाउंड किए गए, जिनमें 274 महिलाओं को हाई रिस्क प्रेगनेंसी श्रेणी में चिन्हित किया गया।
इन महिलाओं की विशेष निगरानी की गई और उन्हें समय से अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित की गई। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि Safe Motherhood Uttarakhand के तहत जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की समय रहते पहचान मातृ और शिशु सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण रही।
102 एंबुलेंस सेवा बनी जीवनरेखा
दूरस्थ क्षेत्रों की महिलाओं को प्रसव के लिए अस्पताल तक पहुंचाने के लिए 102 एंबुलेंस सेवा और विभागीय वाहनों का व्यापक उपयोग किया गया। पिक-अप और ड्रॉप सुविधा के कारण गर्भवती महिलाओं और उनके परिवारों की चिंता काफी हद तक कम हुई।
विशेष रूप से पहाड़ी जिलों में जहां परिवहन सुविधाएं सीमित रहती हैं, वहां Safe Motherhood Uttarakhand के तहत यह व्यवस्था बेहद कारगर साबित हुई।
तीन जिलों में शून्य होम डिलीवरी
अप्रैल 2026 में Pithoragarh, Rudraprayag और Udham Singh Nagar में एक भी होम डिलीवरी दर्ज नहीं हुई। यह उपलब्धि दर्शाती है कि जागरूकता, स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और प्रशासनिक निगरानी के संयुक्त प्रयास कितने प्रभावी साबित हुए हैं।
इन जिलों का प्रदर्शन अब अन्य जिलों के लिए प्रेरणास्रोत माना जा रहा है।
डिजिटल ट्रैकिंग से मिली नई मजबूती
Manuj Goyal ने बताया कि डिजिटल ट्रैकिंग, जिला-स्तरीय कार्ययोजना और फील्ड मॉनिटरिंग के जरिए गर्भवती महिलाओं की लगातार निगरानी की जा रही है।
हर पंजीकृत गर्भवती महिला का डेटा नियमित रूप से अपडेट किया जाता है, जिससे समय पर जांच, परामर्श और प्रसव की तैयारी सुनिश्चित की जा सके। Safe Motherhood Uttarakhand में तकनीक के इस उपयोग ने स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाया है।
मातृ और नवजात मृत्यु दर घटाने की दिशा में बड़ा कदम
स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि घर पर प्रसव के मामलों में कमी आने से जटिलताओं और मृत्यु के जोखिम में भी उल्लेखनीय कमी आएगी। प्रशिक्षित डॉक्टरों, नर्सों और आवश्यक चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता संस्थागत प्रसव को सुरक्षित बनाती है।
Safe Motherhood Uttarakhand न केवल होम डिलीवरी कम करने का अभियान है, बल्कि यह मातृ और शिशु स्वास्थ्य को स्थायी रूप से बेहतर बनाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।
जागरूकता और स्वास्थ्य सेवाओं का मिला सकारात्मक परिणाम
राज्यभर में आशा कार्यकर्ताओं, एएनएम, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और चिकित्सा अधिकारियों ने मिलकर गर्भवती महिलाओं को अस्पताल में प्रसव के लिए प्रेरित किया। नियमित परामर्श और स्वास्थ्य जांच ने महिलाओं में विश्वास बढ़ाया। इस सामूहिक प्रयास ने Safe Motherhood Uttarakhand को एक सफल जनस्वास्थ्य मॉडल के रूप में स्थापित किया है।



