उत्तराखंड

Nursing Protest Uttarakhand: 161 दिन बाद नर्सिंग अभ्यर्थियों का धरना स्थगित, सरकार के 3 प्रस्तावों से मिली राहत

Nursing Protest Uttarakhand: Nursing Candidates' Sit-in Suspended After 161 Days; Relief Found in Government's Three Proposals

देहरादून में पिछले 161 दिनों से चल रहा Nursing Protest Uttarakhand फिलहाल एक महीने के लिए स्थगित कर दिया गया है। लंबे संघर्ष, आमरण अनशन और पानी की टंकी पर 60 घंटे तक चले विरोध प्रदर्शन के बाद सरकार ने नर्सिंग अभ्यर्थियों की मांगों पर सकारात्मक रुख अपनाया है। डीजी हेल्थ की ओर से सरकार को भेजे गए तीन महत्वपूर्ण प्रस्तावों के बाद आंदोलनकारियों ने अस्थायी रूप से धरना समाप्त करने का निर्णय लिया।

यह आंदोलन केवल भर्ती प्रक्रिया का मुद्दा नहीं था, बल्कि उन हजारों युवाओं की उम्मीदों का प्रतीक बन गया था जो वर्षों से सरकारी नौकरी की प्रतीक्षा कर रहे हैं। Nursing Protest Uttarakhand ने राज्य सरकार को नर्सिंग भर्ती व्यवस्था पर दोबारा विचार करने के लिए मजबूर कर दिया।

161 दिन के संघर्ष के बाद मिली पहली बड़ी सफलता

नर्सिंग एकता मंच के बैनर तले देहरादून के परेड ग्राउंड में नर्सिंग अभ्यर्थी पिछले 161 दिनों से धरने पर बैठे थे। इनमें से कई अभ्यर्थी 26 दिनों से आमरण अनशन कर रहे थे। जब मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला सहित पांच लोग पानी की टंकी पर चढ़ गए और 60 घंटे तक वहीं डटे रहे।

लगातार बढ़ते दबाव और स्वास्थ्य जोखिम को देखते हुए प्रशासन सक्रिय हुआ। सिटी मजिस्ट्रेट और पुलिस अधिकारियों ने आंदोलनकारियों से बातचीत की और सरकार की ओर से प्रस्ताव प्रस्तुत किए गए। इसके बाद Nursing Protest Uttarakhand को एक महीने के लिए स्थगित करने पर सहमति बनी।

सरकार ने भेजे तीन अहम प्रस्ताव

डीजी हेल्थ द्वारा सरकार को भेजे गए प्रस्तावों को आंदोलनकारियों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।

1. वर्षवार भर्ती प्रक्रिया अंतिम बार लागू होगी

वर्तमान नर्सिंग भर्ती प्रक्रिया को अंतिम बार बैच या वर्षवार आधार पर पूरा किया जाएगा ताकि लंबे समय से इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों को अवसर मिल सके।

2. भविष्य में दो वर्ष का क्लीनिकल अनुभव अनिवार्य

आने वाली नर्सिंग भर्ती प्रक्रियाओं में न्यूनतम दो वर्ष का क्लीनिकल अनुभव आवश्यक होगा। इससे चयनित नर्सिंग अधिकारियों की व्यावहारिक दक्षता सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा।

3. लापरवाही पर सख्त कार्रवाई

चयन प्रक्रिया में यह प्रावधान जोड़ा जाएगा कि यदि सेवा के दौरान मरीज के उपचार में किसी प्रकार की लापरवाही पाई जाती है, तो संबंधित कर्मचारी के खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

इन प्रस्तावों के बाद Nursing Protest Uttarakhand से जुड़े अभ्यर्थियों ने इसे अपनी पहली जीत बताया।

ज्योति रौतेला ने दी चेतावनी

पानी की टंकी से नीचे उतरने के बाद ज्योति रौतेला भावुक नजर आईं। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन की पहली सीढ़ी है और स्वास्थ्य मंत्री ने व्यक्तिगत रूप से भरोसा दिया है कि प्रस्तावों को लागू किया जाएगा।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि सरकार अपने वादे से पीछे हटती है तो Nursing Protest Uttarakhand फिर से शुरू किया जाएगा और पहले से अधिक मजबूती से लड़ा जाएगा।

नवल पुंडीर ने सरकार का किया धन्यवाद

नर्सिंग एकता मंच के प्रदेश अध्यक्ष नवल पुंडीर ने कहा कि सरकार ने सकारात्मक पहल की है। इसी विश्वास के आधार पर एक महीने के लिए धरना स्थगित किया गया है। उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल का आभार व्यक्त किया।

उनके अनुसार, यदि प्रस्तावों को लिखित रूप में लागू किया जाता है तो इससे हजारों नर्सिंग अभ्यर्थियों को रोजगार का रास्ता मिलेगा।

गणेश गोदियाल बोले—यह युवाओं की जीत

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने इस आंदोलन को युवाओं की जीत बताया। उन्होंने कहा कि सरकार को पहले ही इन मांगों को स्वीकार कर लेना चाहिए था। ज्योति रौतेला के साहस और अभ्यर्थियों की एकजुटता ने सरकार को निर्णय लेने पर मजबूर किया।

उन्होंने कहा कि Nursing Protest Uttarakhand ने यह साबित कर दिया कि लोकतांत्रिक तरीके से किया गया संघर्ष सकारात्मक परिणाम दे सकता है।

स्वास्थ्य मंत्री ने दिया आश्वासन

स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि अभ्यर्थियों द्वारा दिए गए ज्ञापन और अन्य राज्यों के मॉडल का परीक्षण किया जा रहा है। सरकार नर्सिंग भर्ती से जुड़े सभी पहलुओं पर गंभीरता से विचार कर रही है।

उनके आश्वासन के बाद अभ्यर्थियों में उम्मीद जगी है कि भर्ती प्रक्रिया जल्द आगे बढ़ेगी।

क्यों शुरू हुआ था Nursing Protest Uttarakhand?

उत्तराखंड में लगभग 4,000 नर्सिंग पद लंबे समय से रिक्त हैं। वर्ष 2020 में 3,000 पदों पर भर्ती की घोषणा हुई थी, लेकिन प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। इस देरी के कारण कई अभ्यर्थियों की आयु सीमा पार होने लगी।

अभ्यर्थियों की मांग थी कि भर्ती प्रक्रिया वर्षवार आधार पर पूरी की जाए और सरकार लिखित आदेश जारी करे। इसी मांग को लेकर Nursing Protest Uttarakhand राज्य के सबसे लंबे रोजगार आंदोलनों में से एक बन गया।

एक महीने बाद फिर होगी समीक्षा

फिलहाल आंदोलन स्थगित है, समाप्त नहीं। नर्सिंग एकता मंच ने स्पष्ट किया है कि यदि एक महीने के भीतर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो धरना और अनशन दोबारा शुरू किया जाएगा।

अब सभी की नजर सरकार पर है। यदि प्रस्तावों को शीघ्र लागू किया जाता है तो यह न केवल हजारों युवाओं को राहत देगा, बल्कि राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को भी मजबूती प्रदान करेगा.

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