उत्तराखंड

Uttarakhand Clean Mobility: देहरादून में स्वच्छ ईंधन आधारित 11 वाहनों को मुख्यमंत्री धामी ने दिखाई हरी झंडी, 6 वाहन स्वामियों को मिली 50% सब्सिडी

Uttarakhand Clean Mobility: Chief Minister Dhami flagged off 11 clean-fuel vehicles in Dehradun; six vehicle owners received a 50% subsidy.

Uttarakhand Clean Mobility के तहत उत्तराखंड सरकार ने राज्य में पर्यावरण-अनुकूल परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून स्थित मुख्य सेवक सदन में आयोजित कार्यक्रम के दौरान स्वच्छ ईंधन आधारित 11 नए सार्वजनिक वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर उन्होंने योजना के पहले चरण में चयनित छह वाहन स्वामियों को 50 प्रतिशत पूंजीगत अनुदान और प्रोत्साहन राशि के चेक भी वितरित किए।

राज्य सरकार का मानना है कि यह पहल केवल परिवहन व्यवस्था को आधुनिक बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रदूषण कम करने, हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने और शहरी क्षेत्रों में लोगों को बेहतर सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।

Uttarakhand Clean Mobility: 50 प्रतिशत सब्सिडी से बदलेगी सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था

Uttarakhand Clean Mobility योजना के तहत पात्र वाहन स्वामियों को नए स्वच्छ ईंधन आधारित वाहनों की खरीद पर वाहन लागत का 50 प्रतिशत तक पूंजीगत अनुदान दिया जाएगा। सरकार ने इस योजना की शुरुआत फिलहाल देहरादून से की है, जहां पुरानी और प्रदूषण फैलाने वाली सिटी बसों को चरणबद्ध तरीके से आधुनिक वाहनों से बदला जाएगा।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने छह लाभार्थियों को सब्सिडी के चेक सौंपे। अधिकारियों के अनुसार, छह अन्य चयनित वाहन स्वामियों को भी जल्द ही यह सहायता राशि उपलब्ध कराई जाएगी। सरकार का उद्देश्य अधिक से अधिक वाहन संचालकों को स्वच्छ ईंधन आधारित वाहनों की ओर आकर्षित करना है।

Uttarakhand Clean Mobility: देहरादून बना योजना का पहला शहर

राजधानी देहरादून को इस योजना के लिए सबसे पहले चुना गया है। शहर में वर्तमान में लगभग 170 सिटी बस संचालक और 450 से 500 मैजिक वाहन संचालक हैं। इनमें से कई वाहन लंबे समय से संचालित हो रहे हैं, जिससे वायु प्रदूषण बढ़ रहा है।

सरकार की योजना है कि इन पुराने वाहनों को धीरे-धीरे सीएनजी, इलेक्ट्रिक और अन्य स्वच्छ ईंधन आधारित वाहनों से बदला जाए। इसके बाद हरिद्वार, हल्द्वानी और अन्य प्रमुख शहरों में भी इस योजना का विस्तार किया जाएगा।

स्वच्छ ईंधन से घटेगा प्रदूषण, यात्रियों को मिलेगी बेहतर सुविधा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यह आर्थिक सहायता केवल वाहन स्वामियों के लिए प्रोत्साहन नहीं है, बल्कि उत्तराखंड को स्वच्छ और आधुनिक परिवहन व्यवस्था की ओर ले जाने का मजबूत संकल्प भी है।

उन्होंने कहा कि डीजल चालित पुराने वाहनों की जगह स्वच्छ ईंधन आधारित वाहन आने से वायु प्रदूषण में कमी आएगी और आम नागरिकों को अधिक सुरक्षित, आरामदायक तथा बेहतर सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध होगा। इससे पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी।

Uttarakhand Clean Mobility: जलवायु परिवर्तन से निपटने की दिशा में अहम पहल

मुख्यमंत्री ने कहा कि पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन की गंभीर चुनौती का सामना कर रही है। ऐसे समय में विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना बेहद आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सरकार का लक्ष्य ऐसा विकास मॉडल तैयार करना है, जिसमें प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के साथ आर्थिक प्रगति भी सुनिश्चित हो। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत वर्ष 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहा है। इसके साथ ही ‘लाइफस्टाइल फॉर एनवायरमेंट (LiFE)’, पीएम ई-बस सेवा और अक्षय ऊर्जा को बढ़ावा देने जैसी योजनाएं देश की पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं।

ईवी बसों और चार्जिंग नेटवर्क का होगा विस्तार

Uttarakhand Clean Mobility के तहत राज्य सरकार केवल स्वच्छ ईंधन आधारित वाहनों को बढ़ावा नहीं दे रही, बल्कि उनके लिए आवश्यक आधारभूत ढांचे का भी विस्तार कर रही है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि देहरादून, हरिद्वार और हल्द्वानी में इलेक्ट्रिक बसों का संचालन लगातार बढ़ाया जा रहा है। इसके साथ ही प्रदेशभर में ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जा रहे हैं, ताकि इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग में किसी प्रकार की असुविधा न हो।

सरकार आधुनिक अर्बन ट्रांसपोर्ट सिस्टम और रोपवे परियोजनाओं पर भी तेजी से कार्य कर रही है, जिससे शहरी यातायात अधिक सुगम, सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल बनाया जा सके।

लाभार्थी बनेंगे हरित परिवहन अभियान के प्रेरणास्रोत

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि जिन छह वाहन स्वामियों को आज सब्सिडी दी गई है, वे केवल इस योजना के लाभार्थी नहीं हैं, बल्कि उत्तराखंड में हरित परिवहन क्रांति के अग्रदूत हैं।

उन्होंने विश्वास जताया कि उनके इस कदम से अन्य वाहन संचालक भी स्वच्छ ईंधन आधारित वाहनों को अपनाने के लिए प्रेरित होंगे। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं की सफलता में जनभागीदारी की महत्वपूर्ण भूमिका होती है और पर्यावरण संरक्षण के इस अभियान में सभी नागरिकों को योगदान देना चाहिए।

सरकार का लक्ष्य—इकोलॉजी और इकोनॉमी साथ-साथ

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ऐसा विकास मॉडल तैयार कर रही है जिसमें पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास दोनों एक-दूसरे के पूरक बनें। उनका कहना था कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में विकास कार्य प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करते हुए ही आगे बढ़ाए जाने चाहिए।

उन्होंने बताया कि नई स्वच्छ ईंधन आधारित बसें आम लोगों की यात्रा को अधिक आरामदायक बनाएंगी, जबकि प्रदूषण में कमी आने से शहरों की वायु गुणवत्ता भी बेहतर होगी।

Uttarakhand Clean Mobility से मिलेगा हरित भविष्य

Uttarakhand Clean Mobility केवल एक परिवहन योजना नहीं, बल्कि राज्य को स्वच्छ, टिकाऊ और भविष्य के अनुरूप बनाने की व्यापक पहल है। 11 स्वच्छ ईंधन आधारित वाहनों की शुरुआत और छह वाहन स्वामियों को 50 प्रतिशत सब्सिडी का वितरण इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

यदि यह मॉडल सफल रहता है, तो आने वाले समय में हरिद्वार, हल्द्वानी और प्रदेश के अन्य शहरों में भी इसका विस्तार किया जाएगा। इससे सार्वजनिक परिवहन अधिक आधुनिक होगा, प्रदूषण में कमी आएगी और उत्तराखंड हरित विकास की दिशा में देश के अग्रणी राज्यों में अपनी पहचान मजबूत करेगा.

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