उत्तराखंड

Pauri Forest Fire: पौड़ी में जंगल की आग से दहशत, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय परिसर तक पहुंचीं लपटें!

Haridwar Traffic Jam: Impact of the Haridwar Gridlock, Fuel Crisis at Rishikesh Petrol Pump, People Troubled by Long Queues

उत्तराखंड में बढ़ती गर्मी के बीच जंगलों में आग की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। इसी बीच जनपद पौड़ी के देवप्रयाग क्षेत्र में लगी भीषण आग ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी है। Devprayag Forest Fire ने बाह बाजार, खेड़ा गांव और केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के रघुनाथ कीर्ति परिसर तक खतरा पैदा कर दिया। आग की तेज लपटों और धुएं के कारण पूरे इलाके में अफरातफरी का माहौल बन गया। स्थानीय लोग अपने घरों को बचाने के लिए रातभर जुटे रहे, जबकि वन विभाग और दमकल कर्मियों ने कई घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।

सौड़ गांव की तरफ से फैली आग, बाह बाजार तक पहुंचा खतरा

जानकारी के मुताबिक, देवप्रयाग नगरपालिका के वार्ड संख्या चार स्थित बाह बाजार क्षेत्र में जंगल की आग सौड़ गांव की दिशा से फैलती हुई पहुंची। तेज हवाओं के कारण आग तेजी से फैलती चली गई और कुछ ही समय में रिहायशी इलाकों के बेहद करीब पहुंच गई। स्थानीय लोगों ने जब जंगल से उठती ऊंची-ऊंची लपटें देखीं तो पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया।

आग का सबसे बड़ा खतरा केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के रघुनाथ कीर्ति परिसर पर मंडराने लगा। परिसर प्रशासन ने हालात बिगड़ते देख तुरंत वन विभाग, पुलिस और दमकल विभाग को सूचना दी। देर शाम तक आग की लपटें लगातार बढ़ती रहीं और धुएं का गुबार पूरे इलाके में फैल गया।

केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय परिसर में मची अफरातफरी

Devprayag Forest Fire का असर केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय परिसर में साफ दिखाई दिया। छात्रावास और कर्मचारियों के आवास के पास तक आग पहुंचने लगी थी। स्थिति गंभीर होती देख प्रशासन ने एहतियात के तौर पर छात्रों और कर्मचारियों से कुछ आवास खाली करा दिए।

छात्रों ने बताया कि रात के समय जब जंगल की आग की लपटें छात्रावास के ऊपर दिखाई देने लगीं तो हर कोई डर गया। कई छात्र खुले मैदानों की तरफ चले गए। परिसर में मौजूद कर्मचारियों ने भी आग बुझाने में वन विभाग की मदद की।

विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से लगातार जंगलों में आग लगने की घटनाएं सामने आ रही हैं। इससे पहले भी नृसिंहाचल पर्वत क्षेत्र में लगी आग को घंटों की मेहनत के बाद बुझाया गया था, लेकिन दो दिन बाद फिर आग भड़क उठी।

दुर्गम क्षेत्र होने से राहत कार्य में आई परेशानी

देवप्रयाग का यह इलाका पहाड़ी और ढालदार है, जिसके कारण आग बुझाने में राहत टीमों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। दमकल विभाग की गाड़ियां मौके तक तो पहुंचीं, लेकिन पाइप पर्याप्त दूरी तक नहीं पहुंच पाए। ऐसे में वन विभाग और स्थानीय लोगों को पारंपरिक तरीके से आग बुझाने की कोशिश करनी पड़ी।

वन विभाग के कर्मचारियों ने कई घंटों तक लगातार आग रोकने का अभियान चलाया। एक ओर आग पर कुछ हद तक नियंत्रण पा लिया गया था, लेकिन दूसरी तरफ तेज हवा के चलते आग फिर भड़क उठी। देर रात तक चले अभियान के बाद आखिरकार आग को बस्ती तक पहुंचने से रोक लिया गया।

खेड़ा गांव के लोग खुद उतरे आग बुझाने

Devprayag Forest Fire के कारण बाह बाजार के ऊपर स्थित खेड़ा गांव भी खतरे की जद में आ गया। गांव के चारों ओर जंगलों में आग फैलने लगी, जिसके बाद ग्रामीण खुद बाल्टियों और पेड़ों की टहनियों के सहारे आग बुझाने में जुट गए।

ग्रामीणों का कहना है कि हर साल गर्मियों में जंगलों में आग लगती है, लेकिन इस बार हालात ज्यादा भयावह हैं। आग की वजह से पूरे क्षेत्र में काला धुआं फैल गया है, जिससे लोगों को सांस लेने में परेशानी हो रही है। कई बुजुर्ग और बच्चे धुएं के कारण बीमार महसूस कर रहे हैं।

वन्यजीवों पर भी दिखा असर

जंगल की आग का असर वन्यजीवों पर भी साफ नजर आने लगा है। आग और धुएं से बचने के लिए कई जंगली जानवर आबादी वाले इलाकों की तरफ भाग रहे हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक, पिछले तीन दिनों में कई बार गुलदार विश्वविद्यालय परिसर और आसपास के क्षेत्रों में दिखाई दिया।

इसके अलावा कई घायल पक्षी और छोटे वन्यजीव सड़क किनारे पड़े मिले। वन विभाग का कहना है कि जंगलों में लगातार आग लगने से वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास प्रभावित हो रहा है, जिससे वे सुरक्षित स्थानों की तलाश में आबादी वाले इलाकों की तरफ आ रहे हैं।

तापमान बढ़ने से हालात और बिगड़े

पौड़ी और देवप्रयाग क्षेत्र में इन दिनों तापमान सामान्य से अधिक बना हुआ है। गर्म हवाओं और सूखे मौसम के कारण जंगलों में आग तेजी से फैल रही है। स्थानीय लोगों ने बताया कि आग के कारण इलाके में अचानक गर्मी काफी बढ़ गई है और धुएं के कारण वातावरण भारी हो गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जंगलों में सूखी घास और चीड़ की पत्तियां आग फैलने की सबसे बड़ी वजह बन रही हैं। तेज हवाएं आग को तेजी से एक इलाके से दूसरे इलाके तक पहुंचा रही हैं।

विश्वविद्यालय प्रशासन करेगा सुरक्षा योजना तैयार

केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के रघुनाथ कीर्ति परिसर के निदेशक प्रो. पीवीबी सुब्रह्मण्यम ने बताया कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने जंगल की आग की घटनाओं को गंभीरता से लिया है। उन्होंने कहा कि कुलपति प्रो. श्रीनिवास बरखेड़ी के साथ इस विषय पर विस्तृत चर्चा हुई है।

उन्होंने बताया कि भविष्य में परिसर को जंगल की आग से सुरक्षित रखने के लिए एक ठोस कार्ययोजना तैयार की जाएगी। इसमें वन विभाग और स्थानीय प्रशासन का सहयोग लिया जाएगा, ताकि ऐसी घटनाओं से समय रहते निपटा जा सके।

लगातार बढ़ रही Forest Fire की घटनाएं

उत्तराखंड में इस साल गर्मी बढ़ने के साथ ही जंगलों में आग की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। गढ़वाल और कुमाऊं मंडल के कई जिलों में वन विभाग को लगातार अलर्ट मोड पर रहना पड़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।

फिलहाल देवप्रयाग क्षेत्र में आग पर नियंत्रण पा लिया गया है, लेकिन कई इलाकों में अभी भी धुआं उठता दिखाई दे रहा है। प्रशासन लगातार निगरानी बनाए हुए है और लोगों से सतर्क रहने की अपील की जा रही है।

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