उत्तराखंड

देहरादून में छात्र एंजेल चकमा की हत्या से सियासी उबाल

The murder of student Angel Chakma in Dehradun has sparked political unrest.

राहुल गांधी ने बताया ‘नफरत का अपराध’, नॉर्थ ईस्ट के छात्रों में बढ़ी असुरक्षा

राजधानी देहरादून में त्रिपुरा के छात्र एंजेल चकमा की हत्या का मामला अब केवल आपराधिक घटना नहीं रह गया है, बल्कि यह सामाजिक और राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। इस सनसनीखेज घटना पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने इस घटना को “भयानक नफरत का अपराध” करार देते हुए समाज और राजनीति, दोनों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

राहुल गांधी का तीखा बयान

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा कि देहरादून में एंजेल चकमा और उनके भाई माइकल के साथ जो हुआ, वह केवल एक आपराधिक वारदात नहीं, बल्कि वर्षों से पनपाई जा रही नफरत की सोच का परिणाम है। उन्होंने लिखा कि नफरत अचानक पैदा नहीं होती, बल्कि इसे लगातार सामान्य व्यवहार की तरह प्रस्तुत किया जाता है। खासकर युवाओं को ज़हरीले कंटेंट और गैर-जिम्मेदार बयानों के जरिए प्रभावित किया जा रहा है। राहुल गांधी ने कहा कि भारत सम्मान, एकता और विविधता का देश है, डर और हिंसा का नहीं।

बाजार विवाद से हत्या तक

जानकारी के अनुसार, 24 वर्षीय एंजेल चकमा त्रिपुरा के निवासी थे और देहरादून में एक निजी संस्थान से एमबीए फाइनल ईयर की पढ़ाई कर रहे थे। 9 दिसंबर को वह अपने छोटे भाई माइकल के साथ सेलाकुई बाजार में खरीदारी करने गए थे। इसी दौरान कुछ स्थानीय युवकों से उनका विवाद हो गया। आरोप है कि गाली-गलौज का विरोध करने पर मारपीट शुरू हो गई और हमले में एंजेल पर धारदार हथियार से वार किया गया।

दो हफ्ते तक चला इलाज

गंभीर रूप से घायल एंजेल चकमा को ग्राफिक एरा अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां करीब दो हफ्ते तक उनका इलाज चला। हालांकि, 26 दिसंबर की सुबह उन्होंने दम तोड़ दिया। उनकी मौत की खबर से परिवार, छात्र समुदाय और नॉर्थ ईस्ट से जुड़े संगठनों में भारी आक्रोश फैल गया।

पुलिस कार्रवाई और गिरफ्तारियां

देहरादून पुलिस ने मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए दो नाबालिगों सहित कुल पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि एक आरोपी नेपाल फरार बताया जा रहा है। फरार आरोपी की तलाश के लिए पुलिस टीम नेपाल भेजी गई है। गिरफ्तार आरोपियों में अविनाश नेगी, सूरज खवास और सुमित शामिल हैं।

सरकार और समाज पर सवाल

एंजेल चकमा के पिता बीएसएफ में कार्यरत हैं। बेटे की मौत के बाद परिवार गहरे सदमे में है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पीड़ित परिवार से बात कर न्याय का भरोसा दिलाया है। वहीं इस घटना के बाद देहरादून सहित देश के अन्य शहरों में पढ़ाई कर रहे नॉर्थ ईस्ट के छात्रों में असुरक्षा की भावना बढ़ गई है। यह मामला अब कानून के साथ-साथ समाज की सोच और व्यवस्था पर भी बड़े सवाल खड़े कर रहा है।

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