Jhilmil Lake Jungle Safari: हरिद्वार में जंगल सफारी शुरू, 16,717 पर्यटकों का रिकॉर्ड तोड़ने की उम्मीद
Jungle safari launched in Haridwar; expected to break the record of 16,717 tourists.
Jhilmil Lake Jungle Safari का उद्घाटन हरिद्वार के डीएफओ स्वप्निल अनिरुद्ध ने पूजा-अर्चना के बाद किया। उन्होंने जंगल सफारी वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। वन विभाग के अनुसार, इस सीजन में पर्यटक 15 अक्टूबर से 30 जून तक सफारी का आनंद ले सकेंगे।
झिलमिल झील संरक्षण रिजर्व धीरे-धीरे वन्यजीव प्रेमियों और प्रकृति की सैर पसंद करने वाले पर्यटकों के बीच लोकप्रिय हो रहा है। पिछले सीजन में यहां पर्यटकों की संख्या ने नया रिकॉर्ड बनाया था। इसी आधार पर वन विभाग को उम्मीद है कि इस बार भी सफारी को अच्छा प्रतिसाद मिलेगा।
Jhilmil Lake Jungle Safari: 15 अक्टूबर से खुले गेट
हरिद्वार के लालढांग क्षेत्र में स्थित झिलमिल झील संरक्षण रिजर्व अपनी प्राकृतिक सुंदरता और वन्यजीवों की मौजूदगी के लिए जाना जाता है। यहां जंगल सफारी के जरिए पर्यटक संरक्षित क्षेत्र के प्राकृतिक वातावरण को करीब से देख सकते हैं।
15 अक्टूबर को नए सीजन की शुरुआत के साथ ही सफारी वाहनों का संचालन शुरू हो गया है। पर्यटकों के लिए यह मौका खास है, क्योंकि वे जंगल के वातावरण, हरियाली और वन्यजीवों को देखने के लिए यहां पहुंच सकते हैं।
Jhilmil Lake Jungle Safari का संचालन निर्धारित पर्यटन अवधि के दौरान किया जाएगा। मौजूदा जानकारी के अनुसार, सफारी सीजन 30 जून तक जारी रहेगा। पर्यटकों को यात्रा की योजना बनाने से पहले वन विभाग से उपलब्धता, सफारी की समय-सारणी, बुकिंग और शुल्क संबंधी जानकारी की पुष्टि कर लेनी चाहिए।
हाथी, गुलदार और सांभर समेत कई वन्यजीव देखने का मौका
झिलमिल झील संरक्षण रिजर्व में पर्यटकों को कई तरह के वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक आवास में देखने का अवसर मिल सकता है। यहां हाथी, गुलदार, भालू, चीतल, हिरन और सांभर जैसे वन्यजीवों की मौजूदगी बताई गई है।
वन्यजीवों को देख पाना मौसम, समय और जंगल में उनकी गतिविधियों पर निर्भर करता है। इसलिए सफारी के दौरान हर पर्यटक को सभी जानवर दिखाई दें, इसकी गारंटी नहीं होती। यही प्राकृतिक जंगल सफारी का रोमांच भी है।
Jhilmil Lake Jungle Safari उन लोगों के लिए आकर्षक विकल्प बन सकती है, जो वन्यजीवों की दुनिया को करीब से समझना चाहते हैं। परिवार, प्रकृति प्रेमी और फोटोग्राफी में रुचि रखने वाले पर्यटक भी इस क्षेत्र की यात्रा की योजना बना सकते हैं। हालांकि, जंगल में वन्यजीवों से सुरक्षित दूरी बनाए रखना और वन विभाग के निर्देशों का पालन करना जरूरी है।
पिछले सीजन में 16,717 पर्यटकों ने की सफारी
झिलमिल झील संरक्षण रिजर्व में पर्यटकों की बढ़ती दिलचस्पी का अंदाजा वन विभाग के आंकड़ों से लगाया जा सकता है। विभाग के अनुसार, पिछले पर्यटन सीजन में कुल 16,717 पर्यटक जंगल सफारी के लिए पहुंचे थे। इस दौरान विभाग को 53,01,200 रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ।
इससे पहले के सीजन में 10,840 पर्यटकों ने सफारी की थी। उस समय वन विभाग को 31,19,525 रुपये का राजस्व मिला था। दोनों सीजन के आंकड़ों की तुलना से पर्यटकों की संख्या और सफारी से होने वाली आय में बढ़ोतरी दिखाई देती है।
पिछले सीजन में पर्यटकों की संख्या पहले के 10,840 से बढ़कर 16,717 हो गई। यानी करीब 5,877 अधिक पर्यटक यहां पहुंचे। यह वृद्धि झिलमिल झील को पर्यटन के नक्शे पर मिल रही पहचान की ओर संकेत करती है।
पांच साल में 42,864 पर्यटक पहुंचे
वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में झिलमिल झील संरक्षण रिजर्व में कुल 42,864 पर्यटक जंगल सफारी का आनंद ले चुके हैं। इस अवधि में विभाग को लगभग 1.23 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ।
ये आंकड़े बताते हैं कि झिलमिल झील में जंगल सफारी की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। पर्यटकों की संख्या में बढ़ोतरी से क्षेत्र की पहचान मजबूत होने के साथ-साथ प्रकृति आधारित पर्यटन की संभावनाएं भी बढ़ती हैं।
Jhilmil Lake Jungle Safari से जुड़ी बढ़ती दिलचस्पी वन विभाग के लिए भी महत्वपूर्ण है। हालांकि, पर्यटन बढ़ने के साथ संरक्षित क्षेत्र की जैव विविधता और प्राकृतिक वातावरण को सुरक्षित रखना भी उतना ही जरूरी है। सफारी संचालन में पर्यटकों की सुरक्षा और वन्यजीवों के प्राकृतिक व्यवहार को प्राथमिकता देना आवश्यक है।
इस सीजन में रिकॉर्ड टूटने की उम्मीद
पिछले साल मिले अच्छे परिणामों के बाद वन विभाग को उम्मीद है कि मौजूदा सीजन में पर्यटकों की संख्या नया रिकॉर्ड बना सकती है। हालांकि, यह अभी एक अनुमान है। इस सीजन में वास्तविक संख्या पर्यटकों की रुचि, मौसम, सफारी की उपलब्धता और अन्य परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।
झिलमिल झील का आकर्षण केवल वन्यजीवों तक सीमित नहीं है। यहां का प्राकृतिक वातावरण भी पर्यटकों को अपनी ओर खींचता है। राजाजी टाइगर रिजर्व और जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क जैसे लोकप्रिय वन्यजीव पर्यटन स्थलों के बीच झिलमिल झील भी अपनी अलग पहचान बना रही है।
जंगल सफारी के दौरान इन बातों का रखें ध्यान
झिलमिल झील घूमने जाने वाले पर्यटकों को कुछ जरूरी सावधानियां बरतनी चाहिए। सफारी वाहन से बिना अनुमति बाहर न निकलें और वन्यजीवों को भोजन न दें। तेज आवाज करने, जानवरों के करीब जाने या उन्हें परेशान करने से बचें।
जंगल में प्लास्टिक और अन्य कचरा न फैलाएं। वन विभाग के निर्देशों का पालन करें और सफारी के दौरान गाइड या संबंधित कर्मचारियों की सलाह को प्राथमिकता दें। इससे पर्यटकों की सुरक्षा के साथ वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास की रक्षा करने में भी मदद मिलेगी।
Jhilmil Lake Jungle Safari का नया सीजन शुरू होने से हरिद्वार में प्रकृति और वन्यजीव पर्यटन को एक और अवसर मिला है। पिछले सीजन में 16,717 पर्यटकों की भागीदारी और पांच वर्षों में 42,864 पर्यटकों का आंकड़ा इस क्षेत्र की बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाता है। अब वन विभाग की नजर नए सीजन पर है, जहां उसे पिछले रिकॉर्ड से आगे निकलने की उम्मीद है।

