उत्तराखंड

देहरादून एलिवेटेड रोड पर बवाल! 300 से ज्यादा घरों पर संकट, आशियाना बचाने के लिए विधानसभा के बाहर धरना

Uproar over Dehradun elevated road! Over 300 homes at risk, protest held outside the Legislative Assembly to save their dwellings.

देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में प्रस्तावित मोहकमपुर-अजबपुर फ्लाईओवर एलिवेटेड रोड परियोजना को लेकर स्थानीय लोगों और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के बीच विवाद बढ़ गया है। प्रभावित परिवारों का दावा है कि नए अलाइनमेंट के कारण 300 से अधिक घरों पर असर पड़ सकता है और 1,200 से ज्यादा लोगों के सामने बेघर होने का खतरा खड़ा हो गया है। इसके विरोध में स्थानीय लोगों ने विधानसभा के बाहर धरना शुरू कर दिया है।

नए अलाइनमेंट से बढ़ी लोगों की चिंता

देहरादून में बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करने के उद्देश्य से मोहकमपुर से आशारोड़ी तक एलिवेटेड रोड परियोजना प्रस्तावित है। इसके तहत मोहकमपुर से अजबपुर फ्लाईओवर तक रेलवे लाइन के समानांतर सड़क बनाने की योजना पर काम हो रहा है।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि पहले सड़क के लिए अलग अलाइनमेंट पर विचार किया गया था, लेकिन बाद में रूट बदल दिया गया। लोगों के अनुसार, घरों पर निशान लगाए जाने के बाद उन्हें संभावित नुकसान की जानकारी मिली। इसके बाद प्रभावित परिवारों ने एकजुट होकर 14 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया।

घरों के साथ रोजगार पर भी खतरा

प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना है कि कई परिवार दशकों से इस क्षेत्र में रह रहे हैं। कुछ लोगों ने नगरपालिका से नक्शे स्वीकृत कराने के बाद मकान बनाए, जबकि कई परिवारों की आजीविका दुकानों और स्थानीय कारोबार पर निर्भर है।

मोहकमपुर-आशारोड़ी एलिवेटेड रोड संघर्ष समिति के संयोजक सुशील कुमार के मुताबिक, लोगों ने जीवनभर की कमाई अपने घर बनाने में लगाई है। ऐसे में घरों को नुकसान पहुंचने पर उनके सामने रहने और रोजगार दोनों का संकट खड़ा हो सकता है।

स्थानीय निवासी पारितोष भटनागर ने दावा किया कि नए अलाइनमेंट से 300 से ज्यादा घर और 1,200 से अधिक लोग प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि, प्रभावित संपत्तियों की अंतिम संख्या सर्वे पूरा होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

पुराने रूट पर विचार करने की मांग

स्थानीय लोग स्पष्ट कर चुके हैं कि वे सड़क निर्माण के विरोध में नहीं हैं। उनकी मांग है कि परियोजना के लिए ऐसा विकल्प चुना जाए, जिससे आवासीय संपत्तियों को कम से कम नुकसान हो। प्रदर्शनकारियों ने पहले प्रस्तावित मार्ग पर दोबारा विचार करने के साथ डोईवाला, मोथरोवाला, बंजारावाला और दुधली रोड जैसे वैकल्पिक रास्तों पर भी विचार करने की मांग उठाई है।

प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो आंदोलन को जिलाधिकारी कार्यालय और मुख्यमंत्री आवास तक ले जाया जाएगा। प्रभावित लोगों को 23 अक्टूबर को भूमि अध्याप्ति अधिकारी के समक्ष अपनी बात रखने के लिए बुलाए जाने की जानकारी भी दी गई है।

NHAI ने बताया नए रूट का कारण

NHAI अधिकारी सौरभ सिंह के अनुसार, राष्ट्रीय राजमार्ग-7 पर प्रिंस चौक से जोगीवाला तक यातायात का दबाव अधिक है। इसे कम करने के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार कर कई विकल्पों का अध्ययन किया गया।

प्राधिकरण का कहना है कि पुराने अलाइनमेंट और मौजूदा हाईवे को चौड़ा करने पर बड़ी संख्या में मकान तथा अन्य संरचनाएं प्रभावित हो सकती थीं। इसलिए रेलवे लाइन के पास उपलब्ध जमीन के आधार पर नए मार्ग पर विचार किया गया।

सर्वे के बाद तय होगा मुआवजा

NHAI के मुताबिक, फिलहाल सर्वे और मार्किंग के जरिए यह आकलन किया जा रहा है कि किन संपत्तियों का कितना हिस्सा परियोजना की जद में आएगा। सर्वे पूरा होने के बाद राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम के तहत नियमानुसार मुआवजे का निर्धारण किया जाएगा।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि ट्रैफिक से राहत देने वाली इस परियोजना में विकास और स्थानीय परिवारों के आवासीय अधिकारों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाएगा। प्रभावित लोगों की आपत्तियों और सर्वे के नतीजों के बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।

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