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IMD Monsoon Update: देशभर में मानसून का कहर, जम्मू-कश्मीर में 23 मौतें, असम में 3.63 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित; उत्तराखंड-हिमाचल में हाई अलर्ट

IMD Monsoon Update: Monsoon wreaks havoc across the country; 23 deaths in Jammu & Kashmir, 3.63 lakh people affected by floods in Assam; high alert in Uttarakhand and Himachal Pradesh.

IMD Monsoon Update के अनुसार देशभर में मानसून अब राहत नहीं बल्कि कई राज्यों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश, बादल फटने, बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं ने उत्तर भारत से लेकर पूर्वोत्तर तक जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, असम और उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में प्रशासन हाई अलर्ट पर है। भारत मौसम विभाग (IMD) ने आने वाले दिनों में भी कई क्षेत्रों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश की संभावना जताई है और लोगों से सतर्क रहने की अपील की है।

मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि बंगाल की खाड़ी से लगातार मिल रही नमी और सक्रिय मानसूनी प्रणाली के कारण उत्तर-पश्चिम और पूर्वोत्तर भारत में बारिश का दौर अभी कुछ दिनों तक जारी रह सकता है। इसका असर सड़क, रेल और हवाई सेवाओं के साथ-साथ कृषि और आम जनजीवन पर भी दिखाई दे रहा है।

जम्मू-कश्मीर में बारिश और भूस्खलन से सबसे ज्यादा नुकसान

IMD Monsoon Update के बीच सबसे गंभीर स्थिति जम्मू-कश्मीर में देखने को मिली है। पिछले दो दिनों में लगातार हुई भारी बारिश, अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं में 23 लोगों की मौत हो चुकी है। पुंछ और राजौरी जिले सबसे अधिक प्रभावित बताए जा रहे हैं, जहां कई सड़कें बंद हो गई हैं और राहत-बचाव कार्यों में भी बाधाएं आ रही हैं।

प्रशासन के अनुसार सात लोग अभी भी लापता हैं, जिनकी तलाश के लिए एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और स्थानीय बचाव दल लगातार अभियान चला रहे हैं। कई गांवों का संपर्क मुख्य मार्गों से टूट गया है और प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।

असम में बाढ़ से 3.63 लाख लोग प्रभावित

पूर्वोत्तर भारत में भी IMD Monsoon Update चिंताजनक तस्वीर पेश कर रहा है। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) के अनुसार राज्य के 15 जिलों में 3.63 लाख से अधिक लोग बाढ़ की चपेट में हैं। 580 से ज्यादा गांव जलमग्न हो चुके हैं, जबकि 10 हजार हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि प्रभावित हुई है।

ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। कई स्थानों पर सड़कें, पुल और तटबंध क्षतिग्रस्त हो गए हैं, जिससे राहत कार्यों में दिक्कतें आ रही हैं। हजारों लोगों को राहत शिविरों में शिफ्ट किया गया है और प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

उत्तराखंड में भूस्खलन से सड़कें बंद, चारधाम यात्रा रोकी गई

उत्तराखंड में लगातार हो रही बारिश ने पर्वतीय क्षेत्रों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। IMD Monsoon Update के अनुसार राज्य में भूस्खलन की घटनाओं के कारण चार राष्ट्रीय राजमार्गों सहित करीब 150 सड़कें बंद हैं। यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन ने चारधाम यात्रा को अस्थायी रूप से रोक दिया है।

बागेश्वर जिले में सरयू नदी में बहने से आठ वर्षीय बच्चे की मौत हो गई। वहीं ऋषिकेश में गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। रामझूला के पास गंगा में बह गया एक भेलपुरी विक्रेता करीब पांच किलोमीटर दूर राजाजी टाइगर रिजर्व क्षेत्र के पास बने टापू पर फंस गया, जिसे एसडीआरएफ, जल पुलिस और आपदा राहत दल ने संयुक्त अभियान चलाकर सुरक्षित बचा लिया।

लगातार खराब मौसम को देखते हुए राज्य सरकार ने एहतियात के तौर पर कक्षा 1 से 12 तक के सभी सरकारी और निजी स्कूल बंद रखने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने और नदी-नालों के किनारे न जाने की अपील कर रहा है।

हिमाचल प्रदेश में बादल फटने और बाढ़ से हालात गंभीर

हिमाचल प्रदेश में भी मानसून का असर लगातार बढ़ रहा है। किन्नौर जिले में अचानक आई बाढ़ के कारण सांगला-चितकुल मार्ग और एक महत्वपूर्ण पुल क्षतिग्रस्त हो गया है। इससे सेना और आईटीबीपी की चौकियों का संपर्क भी प्रभावित हुआ है।

चंबा जिले के भरमौर क्षेत्र में बादल फटने के बाद कलाह नाले का जलस्तर अचानक बढ़ गया। हालांकि समय रहते बचाव अभियान चलाकर बीच नाले में फंसे तीन मजदूरों को सुरक्षित निकाल लिया गया।

मौसम विभाग द्वारा जारी रेड अलर्ट के बाद कांगड़ा, मंडी, सिरमौर और अन्य संवेदनशील जिलों में स्कूल, कॉलेज और अन्य शिक्षण संस्थानों को एहतियातन बंद कर दिया गया है।

उत्तर प्रदेश में 12 जिलों के लिए रेड अलर्ट

IMD Monsoon Update के अनुसार उत्तर प्रदेश में भी मानसून ने रफ्तार पकड़ ली है। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे के लिए 12 जिलों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया है।

बरेली, बिजनौर, रामपुर और शाहजहांपुर जैसे जिलों में पिछले 24 घंटों के दौरान 150 मिलीमीटर से अधिक वर्षा दर्ज की गई। इसके अलावा कई जिलों में बिजली गिरने और तेज हवाओं की भी चेतावनी जारी की गई है।

हालांकि मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार पूर्वी उत्तर प्रदेश में अब भी सामान्य से लगभग 33 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है, लेकिन आने वाले दिनों में मानसून की सक्रियता बढ़ने की संभावना है।

राजस्थान में भी तेज होगा बारिश का दौर

राजस्थान में भी मौसम बदलने लगा है। पूर्वी राजस्थान के कोटा, जयपुर, भरतपुर और अजमेर संभाग में आने वाले दिनों में भारी बारिश की संभावना जताई गई है। वहीं पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों में भी 22 से 28 जुलाई के बीच अच्छी बारिश होने का अनुमान है।

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यह बारिश खरीफ फसलों के लिए लाभदायक साबित हो सकती है, लेकिन अत्यधिक वर्षा होने की स्थिति में जलभराव और फसल नुकसान का खतरा भी बना रहेगा।

प्रशासन और मौसम विभाग ने जारी की एडवाइजरी

लगातार बिगड़ते मौसम को देखते हुए प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। विशेष रूप से पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भूस्खलन संभावित इलाकों से दूर रहने, नदी-नालों के पास न जाने और केवल आवश्यक होने पर ही यात्रा करने की सलाह दी गई है।

मौसम विभाग ने यह भी कहा है कि अगले चार से पांच दिनों तक उत्तर-पश्चिम और पूर्वोत्तर भारत में भारी से अत्यधिक भारी बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है। ऐसे में स्थानीय प्रशासन, आपदा प्रबंधन एजेंसियां और राहत दल पूरी तरह अलर्ट मोड पर हैं।

मानसून बना चुनौती, सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव

IMD Monsoon Update यह संकेत दे रहा है कि आने वाले कुछ दिन कई राज्यों के लिए चुनौतीपूर्ण रह सकते हैं। भारी बारिश के कारण बाढ़, भूस्खलन, जलभराव और सड़क संपर्क टूटने जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। ऐसे में लोगों के लिए मौसम विभाग द्वारा जारी चेतावनियों का पालन करना बेहद जरूरी है।

विशेषज्ञों का कहना है कि प्राकृतिक आपदाओं के दौरान घबराने के बजाय सतर्कता, समय पर सूचना और प्रशासन के निर्देशों का पालन ही सबसे प्रभावी सुरक्षा उपाय है। आने वाले दिनों में मानसून की गतिविधियों पर सभी की नजर बनी रहेगी, क्योंकि मौसम का अगला दौर कई राज्यों की स्थिति को और प्रभावित कर सकता है।

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