बागेश्वर में सुबह भूकंप के झटके, रिक्टर स्केल पर तीव्रता 3.4, जान-माल का नुकसान नहीं
Earthquake tremors felt in Bageshwar this morning, intensity 3.4 on Richter scale, no loss of life or property.
बागेश्वर: उत्तराखंड के पहाड़ी जिले बागेश्वर में मंगलवार सुबह भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए। नेशनल सेंटर ऑफ सिस्मोलॉजी (एनसीएस) के अनुसार भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 3.4 दर्ज की गई। भूकंप सुबह करीब 7 बजकर 48 मिनट पर आया, जबकि इसका केंद्र जमीन से लगभग 10 किलोमीटर की गहराई में स्थित था। झटके हल्के होने के कारण किसी तरह के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं है।
सुबह के समय भूकंप आने से अधिकांश लोग अपने दैनिक कार्यों में व्यस्त थे। कई इलाकों में लोगों को हल्का कंपन महसूस हुआ, जबकि कुछ स्थानों पर लोगों को भूकंप का एहसास भी नहीं हो पाया। स्थानीय प्रशासन के अनुसार स्थिति पूरी तरह सामान्य है और किसी प्रकार की आपात स्थिति सामने नहीं आई है। बागेश्वर जिला उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से लगभग 196 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
इसी साल बागेश्वर में आ चुका है पहला भूकंप
गौरतलब है कि वर्ष 2026 में उत्तराखंड का पहला भूकंप भी बागेश्वर जिले में ही दर्ज किया गया था। 13 जनवरी को सुबह करीब 7 बजकर 25 मिनट पर आए उस भूकंप की तीव्रता 3.5 मापी गई थी। इसके बाद 27 जनवरी को उत्तरकाशी जिले में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। लगातार आ रहे इन झटकों ने पहाड़ी क्षेत्रों में भूकंपीय गतिविधियों को लेकर चिंता जरूर बढ़ा दी है।
देश के अन्य हिस्सों में भी भूकंपीय गतिविधि
बागेश्वर के साथ-साथ मंगलवार सुबह देश के अन्य हिस्सों में भी भूकंप के झटके दर्ज किए गए। उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में भी लोगों ने हल्के झटके महसूस किए। वहीं पूर्वोत्तर भारत में स्थिति कुछ अधिक सक्रिय रही। सिक्किम के नामची, मंगन, गंगटोक और ग्यालशिंग में भूकंप के झटके आए। मंगन क्षेत्र में सुबह से अब तक सात बार भूकंप के झटके महसूस किए जा चुके हैं, जबकि नामची में चार बार धरती हिली है।
पड़ोसी देशों में भी महसूस किए गए झटके
नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी के अनुसार भारत के पड़ोसी देशों में भी भूकंपीय गतिविधियां दर्ज की गई हैं। चीन, नेपाल, म्यांमार, भूटान और तिब्बत के कई इलाकों में भूकंप के झटके महसूस किए गए। म्यांमार में भूकंप की तीव्रता 4.9 रही, जबकि तिब्बत में 4.5 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। विशेषज्ञों का कहना है कि हिमालयी क्षेत्र में टेक्टोनिक प्लेटों की हलचल के कारण इस तरह की गतिविधियां बनी रहती हैं।
सिस्मिक जोन-6 में पूरा उत्तराखंड
भूकंप की दृष्टि से उत्तराखंड को बेहद संवेदनशील माना जाता है। भारत सरकार के ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) द्वारा हाल ही में अपडेट किए गए नेशनल सिस्मिक हैजार्ड मैप के अनुसार अब पूरी हिमालयन बेल्ट को सिस्मिक जोन-6 में रखा गया है। पहले देश को चार से पांच सिस्मिक जोनों में बांटा गया था, लेकिन नए मानचित्र में जोन-6 को जोड़ा गया है।
इसका अर्थ है कि अरुणाचल प्रदेश से लेकर जम्मू-कश्मीर तक फैला हिमालयी क्षेत्र, जिसमें उत्तराखंड भी शामिल है, बड़े और संभावित रूप से विनाशकारी भूकंप के उच्च जोखिम वाले क्षेत्र में आता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे क्षेत्रों में भूकंप-रोधी निर्माण और आपदा प्रबंधन की तैयारियां बेहद जरूरी हैं, ताकि भविष्य में किसी बड़े भूकंप के प्रभाव को कम किया जा सके।


